शिमला। हिमाचल प्रदेश में लंबित पेंशन देनदारियों को लेकर सरकार और पेंशनर्स संगठनों के बीच खींचतान बढ़ती दिख रही है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने 21 सितंबर को पेंशनर्स ज्वाइंट फ्रंट के साथ बैठक में कक्षा-III पेंशनरों को अक्टूबर में 30 प्रतिशत और कक्षा-I व II को 15 प्रतिशत पेंशन एरियर देने की घोषणा की थी। इसके बाद वित्त विभाग की ओर से एरियर भुगतान संबंधी अधिसूचना भी जारी हुई।
12 नवंबर तक चलेगा जनजागरण अभियान
इसके बावजूद हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति ने सरकार के खिलाफ आंदोलन का ऐलान किया है। समिति का कहना है कि अभी भी कई लंबित वित्तीय मांगों का समाधान नहीं हुआ है। समिति के पदाधिकारियों के अनुसार आंदोलन के पहले चरण में गांधीवादी तरीके से जनजागरण अभियान चलाया जाएगा।
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पेंशनरों की टोलियां गांव-गांव जाकर लंबित मांगों को लेकर जागरूकता अभियान चलाएंगी। समिति के मुताबिक 2 अक्टूबर को ठियोग में गांधी जयंती के कार्यक्रम के दौरान आंदोलन को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया जाएगा। इसके बाद अभियान को प्रदेश के अन्य हिस्सों तक ले जाने की योजना है।
43 हजार पेंशनर्स का मुद्दा उठाया
समिति के अतिरिक्त महासचिव भूप राम वर्मा और मीडिया प्रभारी सेन राम नेगी समेत पदाधिकारियों ने शिमला में सरकार पर पेंशनरों की मांगों को पर्याप्त प्राथमिकता नहीं देने का आरोप लगाया। समिति का दावा है कि 1 जनवरी 2016 से 31 जनवरी 2022 के बीच सेवानिवृत्त करीब 43 हजार पेंशनर्स को संशोधित वित्तीय लाभों से जुड़े कई भुगतान अभी पूरी तरह नहीं मिले हैं। इनमें लीव एनकैशमेंट, ग्रेच्युटी, कम्यूटेशन और विभिन्न एरियर शामिल हैं।
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पेंशनर्स संगठन लंबे समय से 15 प्रतिशत लंबित महंगाई राहत (DA/DR) की मांग भी उठा रहे हैं। सितंबर की शुरुआत में हुए पेंशनर्स के प्रदर्शन में भी संशोधित वेतनमान के एरियर, लंबित पेंशन एरियर, डीए और मेडिकल बिलों के भुगतान की मांग प्रमुख रही थी। संघर्ष समिति का कहना है कि इन मांगों को लेकर सरकार से लगातार बातचीत की कोशिश की जा रही है, लेकिन कई मुद्दे अभी लंबित हैं।
वार्ता नहीं हुई तो बढ़ेगा आंदोलन
समिति ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार उसके प्रतिनिधिमंडल को बातचीत के लिए नहीं बुलाती और लंबित मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाती है तो आंदोलन को अगले चरण में ले जाया जाएगा।
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इसके तहत जिला स्तर पर धरने, विधायकों और मंत्रियों को ज्ञापन देने तथा आगे विधानसभा और सचिवालय के घेराव की योजना बताई गई है। इससे पहले समिति ने सरकार को 15 दिन में वार्ता के लिए बुलाने की मांग भी रखी थी।
सरकार का पक्ष भी सामने आया
वहीं मुख्यमंत्री सुक्खू ने पेंशनर्स ज्वाइंट फ्रंट के साथ बैठक में कहा था कि सरकार पेंशनरों और कर्मचारियों से जुड़े वित्तीय मामलों को चरणबद्ध तरीके से निपटा रही है। सरकार ने अक्टूबर में अलग-अलग श्रेणियों के पेंशनरों को एरियर का हिस्सा जारी करने की बात कही है। साथ ही लंबित मेडिकल प्रतिपूर्ति के मामलों को भी निपटाने के निर्देश दिए गए हैं।
