शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार लगातार बढ़ते वित्तीय दबाव के बीच एक बार फिर बाजार से 500 करोड़ रुपये का ऋण लेने की तैयारी में जुट गई है।  RDG बंद होने के बाद राज्य की आर्थिक स्थिति पर असर पड़ा है- इसके चलते सरकार को नियमित खर्चों और देनदारियों को पूरा करने के लिए अतिरिक्त वित्तीय संसाधनों की जरूरत पड़ रही है।

जनता पर बढ़ता जा रहा कर्ज का बोझ

सूत्रों के अनुसार, वित्त विभाग ने नए ऋण को लेकर जरूरी औपचारिकताएं लगभग पूरी कर ली हैं। इससे पहले चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में सरकार ने 900 करोड़ रुपये तक ऋण लेने के लिए आवेदन किया था।

यह भी पढ़ें- हिमाचल : 25 वर्षीय युवक लापता, तलाश में दर-दर भटक रही मां और बहन; लोगों से मांगी मदद

सुक्खू सरकार फिर लेने जा रही नया लोन

बताया जा रहा है कि राज्य पर कुल कर्ज का बोझ अब एक लाख दस हजार करोड़ रुपये से अधिक पहुंच चुका है। सरकार को हर महीने भारी वित्तीय जिम्मेदारियां निभानी पड़ रही हैं।

पेंशन पर भी संकट

कर्मचारियों के वेतन के लिए करीब दो हजार करोड़ रुपये की आवश्यकता होती है। जबकि पेंशन भुगतान पर लगभग 800 करोड़ रुपये खर्च किए जाते हैं। इसके अलावा पहले से लिए गए कर्ज के ब्याज भुगतान और मूलधन चुकाने पर भी हर माह बड़ी राशि खर्च हो रही है।

यह भी पढ़ें- हिमाचल : मां की कोख सूनी, घर से एक साथ उठेगी दो भाइयों की अर्थी- पिता को खड्ड में मिली थी देह

सरकार ने लिए सख्त फैसले

वित्तीय दबाव को कम करने के लिए सरकार पहले ही कई सख्त फैसले ले चुकी है। मंत्रियों, विधायकों और अधिकारियों के वेतन का एक हिस्सा अस्थायी रूप से रोकने का निर्णय भी इसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है। सरकार का मानना है कि आने वाले महीनों में आर्थिक स्थिति में सुधार होने पर रोकी गई राशि को दोबारा जारी किया जा सकेगा।

संतुलन बनाने की चुनौती

प्रदेश की आर्थिक स्थिति को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर लगातार मंथन जारी है। सरकार फिलहाल विकास कार्यों और जरूरी भुगतान के बीच संतुलन बनाने की चुनौती से जूझ रही है।

नोट : ऐसी ही तेज़, सटीक और ज़मीनी खबरों से जुड़े रहने के लिए इस लिंक पर क्लिक कर हमारे फेसबुक पेज को फॉलो करें