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May 6, 2026

हिमाचल में वृद्ध पेंशन घोटाला : 44 साल के लोग भी उठा रहे लाभ, करोड़ों का गोलमाल

इस सूची में 26 पुरुष और 19 महिलाएं हैं

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शिमला। हिमाचल प्रदेश के जिला शिमला से एक ऐसा मामला सामने आया है- जिसने सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रोहड़ू उपमंडल में विकास खंड छौहारा की एक पंचायत में वृद्धावस्था पेंशन योजना के तहत कथित गड़बड़ी उजागर हुई है।

हिमाचल में एक और बड़ा घोटाला

यहां दर्जनों लोग निर्धारित आयु सीमा से पहले ही इस सुविधा का लाभ ले रहे हैं। तांगणू-जांगलिख पंचायत में 60 साल से कम उम्र के लोग वृद्धावस्था पेंशन का पैसा सरकार से ले रहे हैं।

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60 साल से कम उम्र के लोग ले रहे वृद्धावस्था पेंशन

जानकारी के अनुसार, कुल 45 ऐसे लोगों की पहचान हुई है जो 60 वर्ष की अनिवार्य आयु पूरी किए बिना ही वृद्धावस्था पेंशन प्राप्त कर रहे हैं। इनमें तांगणू गांव के 20 और जांगलिख गांव के 25 लोग शामिल बताए जा रहे हैं।

45 लोगों की हुई पहचान

इस सूची में 26 पुरुष और 19 महिलाएं हैं, जिनकी उम्र 44 से 54 वर्ष के बीच बताई जा रही है। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से कई लोग वर्ष 2018-19 से ही पेंशन का लाभ उठा रहे हैं, जबकि कुछ को 2021 के बाद सूची में जोड़ा गया।

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कैसे हुआ इतना बड़ा घोटाला?

इस पूरे मामले ने सत्यापन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। नियमों के अनुसार, वृद्धावस्था पेंशन के लिए पंचायत स्तर पर परिवार रजिस्टर के आधार पर आवेदन किया जाता है और उसके बाद तहसील कल्याण अधिकारी कार्यालय से इसकी पुष्टि होती है। मगर यहां आरोप है कि पंचायत स्तर पर परिवार रजिस्टर की नकल में ही हेरफेर कर उम्र को गलत तरीके से दर्शाया गया।

रिकॉर्ड देख उड़े होश

सूत्रों का कहना है कि इस गड़बड़ी में उस समय के पंचायत सचिवों की भूमिका संदिग्ध प्रतीत हो रही है। अगर रिकॉर्ड में जन्म वर्ष 1972 से 1982 के बीच दर्ज हैं- तो यह स्पष्ट है कि संबंधित लाभार्थी अभी 60 वर्ष की आयु से काफी दूर हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिरकार किन आधारों पर इन आवेदनों को स्वीकृति मिली और भुगतान भी जारी रहा।

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किसी के खिलाफ FIR दर्ज

शिकायत सामने आने के बाद जिला कल्याण अधिकारी ने खुद मौके पर पहुंचकर जांच की है। हालांकि, कई दिन बीत जाने के बावजूद न तो किसी के खिलाफ FIR दर्ज हुई है और न ही कोई ठोस कार्रवाई सामने आई है। इससे स्थानीय लोगों में आक्रोश बढ़ रहा है और यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि कहीं इस मामले को दबाने की कोशिश तो नहीं की जा रही।

दस्तावेजों में बड़ी गड़बड़ी

लोगों का कहना है कि अगर दस्तावेजों में स्पष्ट गड़बड़ी है, तो कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है। यह मामला सिर्फ आर्थिक नुकसान का नहीं, बल्कि उन असली जरूरतमंद बुजुर्गों के हक का भी है, जिन्हें इस योजना का लाभ मिलना चाहिए।

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ऑनलाइन व ऑफलाइन जांच

इस संबंध में जिला कल्याण अधिकारी कपिल शर्मा ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में आया है और ऑनलाइन व ऑफलाइन दोनों स्तर पर जांच जारी है। फिलहाल वे कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं हैं। वहीं, सहायक आयुक्त एवं BDO छौहारा हिमानी शर्मा ने कहा कि उन्हें इस मामले की कोई जानकारी नहीं है और पेंशन से संबंधित कार्य अलग विभाग के अंतर्गत आता है।

जांच में होगा खुलासा

अब देखना यह होगा कि जांच के बाद सच्चाई कितनी जल्दी सामने आती है और जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई होती है। फिलहाल यह मामला प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही की परीक्षा बन गया है।

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