#अपराध
May 1, 2026
हिमाचल : जमीन घोटाला उजागर करने वाली SDM खुद बुरी फंसी, लाखों का लेन-देन आया सामने; होगी जांच
SDM पर बेनामी जमीनी सौदे का आरोप
शेयर करें:

सोलन। हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में प्रशासनिक तंत्र से जुड़ा एक संवेदनशील मामला सामने आया है, जिसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। SDM सोलन पूनम बंसल जांच घेरे में आ गई है।
बंसल के खिलाफ कथित बेनामी जमीन सौदों और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर अनुशासनात्मक व विजिलेंस जांच की सिफारिश की गई है। इस संबंध में कार्यवाहक DGP अशोक तिवारी ने संबंधित अधिकारियों को पत्र भेजा है।
मामले को लेकर खास बात यह है कि पूनम बंसल ने ही सोलन में चर्चित चेस्टर हिल्स हाउसिंग प्रोजेक्ट से जुड़े कथित फर्जीवाड़े को उजागर किया था। ऐसे में अब उन्हीं पर जांच की सिफारिश होने से पूरे घटनाक्रम पर सवाल उठने लगे हैं और इसे लेकर अलग-अलग तरह की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं।
पुलिस मुख्यालय की रिपोर्ट में दस्तावेजी साक्ष्यों, बैंक लेन-देन और फील्ड वेरिफिकेशन के आधार पर प्रारंभिक स्तर पर कई गंभीर आशंकाएं जताई गई हैं। इसमें पद के संभावित दुरुपयोग, संदिग्ध वित्तीय लेन-देन और बेनामी संपत्ति खरीद की संभावना से इनकार नहीं किया गया है।
जांच में एक महत्वपूर्ण पहलू ₹40.50 लाख के ट्रांजैक्शन का सामने आया है। आरोप है कि जमीन सौदे से ठीक पहले संबंधित पक्ष के बैंक खाते में यह राशि ट्रांसफर की गई और उसके तुरंत बाद जमीन किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर दर्ज कर दी गई। जांच एजेंसियां इसे संभावित बेनामी लेन-देन के संकेत के रूप में देख रही हैं।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि धनराशि को सीधे ट्रांसफर करने के बजाय कई स्तरों पर घुमाया गया, जिससे वित्तीय ट्रेल को छिपाने की आशंका जताई जा रही है। एक ही दिन में अलग-अलग खातों में तेज लेन-देन को “लेयरिंग” तकनीक से जोड़कर देखा जा रहा है- जो आमतौर पर संदिग्ध आर्थिक गतिविधियों में उपयोग होती है।
मामले का एक और गंभीर पहलू यह है कि जिन जमीनों से जुड़े सौदों की जांच हो रही है- वे उस समय किए गए जब संबंधित राजस्व मामले अदालत में लंबित थे। ऐसे में हितों के टकराव को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
उधर, चेस्टर हिल्स प्रोजेक्ट को लेकर भी विवाद गहराता जा रहा है। इस परियोजना में कथित तौर पर नियमों की अनदेखी और भूमि कानूनों के उल्लंघन की जांच पहले से चल रही है। राज्य सरकार के स्तर पर भी इस पूरे मामले पर नजर रखी जा रही है।
फिलहाल, रिपोर्ट उपायुक्त स्तर पर समीक्षा में है और आगे की कार्रवाई को लेकर उच्च स्तर पर निर्णय लिया जाना बाकी है। अगर प्रारंभिक आरोपों में दम पाया गया, तो विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ आपराधिक जांच की दिशा में भी कदम बढ़ सकते हैं।