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May 5, 2026

कब जागेगी सुक्खू सरकार! एक कमरे में चल रही पांच कक्षाएं, ग्रामीणों के सब्र का बांध टूटा- दी ये चेतावनी

बच्चों को सरकारी स्कूल से निकालने पर मजबूर अभिभावक

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Himachal Government Schools

शिमला। हिमाचल प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था की एक बदहाल तस्वीर सामने आई है, जहां एक ही कमरे में पांच कक्षाएं चल रही हैं। बुनियादी सुविधाओं के अभाव और प्रशासनिक अनदेखी से परेशान ग्रामीणों का सब्र अब टूटने लगा है। जहां एक ओर प्रदेश सरकार शिक्षा सुधारों के बड़े दावे कर रही है, वहीं इस गांव के स्कूल बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझ रहे हैं।

पढ़ाई की गुणवत्ता पर पड़ रहा है असर

प्राप्त जानकारी के अनुसार, शिमला जिले के ठियोग क्षेत्र के तहत आती धगाली पंचायत में पलैल चंबल गांव में शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक तस्वीर चिंताजनक है। यहां का प्राथमिक विद्यालय वर्षों पुराना है, लेकिन आज भी ढांचे और संसाधनों की भारी कमी से जूझ रहा है।

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स्थिति यह है कि स्कूल में सिर्फ एक ही कमरा उपलब्ध है, जिसमें एक साथ पांच कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। एक ही शिक्षक सभी बच्चों को पढ़ाने के साथ-साथ प्रशासनिक कार्य भी संभाल रहा है, जिससे पढ़ाई की गुणवत्ता पर असर पड़ना स्वाभाविक है।

बच्चों को सरकारी स्कूल से निकालने पर मजबूर अभिभावक

 

स्कूल भवन की हालत भी बेहद खराब है। दीवारों में दरारें, टूटी खिड़कियां और जर्जर छत बरसात के दिनों में बड़ी समस्या बन जाती है। बारिश के दौरान कक्षाओं में पानी टपकता है, जिससे बच्चों को पढ़ाई जारी रखना मुश्किल हो जाता है।

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अभिभावकों का कहना है कि इन परिस्थितियों में बच्चों को स्कूल भेजना जोखिम भरा महसूस होता है, इसलिए कई परिवार अपने बच्चों को सरकारी स्कूल से निकालने पर मजबूर हैं। लोगों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द हालात नहीं सुधरे, तो पंचायत चुनाव में वही उम्मीदवार समर्थन पाएगा जो स्कूलों की स्थिति सुधारने का ठोस आश्वासन देगा।

शौचालय और अन्य आवश्यक सुविधाएं भी दूर

प्राथमिक विद्यालय से कुछ दूरी पर स्थित मिडिल स्कूल की स्थिति भी अलग नहीं है। यह स्कूल एक सामुदायिक भवन में चल रहा है, जहां सभी कक्षाएं एक ही हॉल में लगती हैं। शौचालय और अन्य आवश्यक सुविधाएं भी दूर स्थित हैं, जिससे खासकर बरसात के मौसम में बच्चों को काफी परेशानी होती है।

ग्रामीणों का आरोप

ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार शिक्षा विभाग को इन समस्याओं से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। बेहतर शिक्षा के अभाव में लोग कर्ज लेकर शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं।

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बहरहाल, अब ग्रामीणों ने इस मुद्दे को लेकर सख्त रुख अपनाया है। पंचायत चुनाव नजदीक होने के चलते उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि वे उसी प्रत्याशी का समर्थन करेंगे, जो शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए ठोस आश्वासन देगा।

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