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May 1, 2026

हिमाचल में पानी घोटाला : अधिकारियों-ठेकेदारों पर गिरेगी गाज, फर्जी गाड़ी नंबर से किया करोड़ों का खेल

फर्जी टैंकरों के सहारे करोड़ों की निकासी

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शिमला। हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले में जल संकट के दौर में टैंकरों के जरिए पानी पहुंचाने के नाम पर हुए कथित घोटाले की जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। ठियोग उपमंडल में विजिलेंस विभाग ने इस मामले में करीब 1.13 करोड़ रुपये की अनियमितताओं को लेकर अपनी जांच पूरी कर दी है।

9 अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ चालान पेश

मामले में विजिलेंस ने 9 अधिकारियों-कर्मचारियों और संबंधित ठेकेदारों के खिलाफ अदालत में चालान पेश कर दिया है। जांच के दौरान जो तथ्य सामने आए, उन्होंने पूरे मामले को गंभीर बना दिया। रिकॉर्ड में जिन टैंकरों से पानी सप्लाई दिखाया गया। उनके पंजीकरण नंबर असल में स्कूटर, मोटरसाइकिल और निजी कारों के निकले।

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बिल पर सवाल खड़े

यानी कागजों में टैंकर दौड़ते रहे, जबकि हकीकत में ऐसे वाहन अस्तित्व में ही नहीं थे। इससे यह साफ संकेत मिला कि बिलिंग प्रक्रिया में बड़े स्तर पर हेरफेर किया गया। इतना ही नहीं, जिन दुर्गम गांवों तक आज भी सड़क मार्ग नहीं पहुंच पाया है, वहां तक टैंकरों के जरिए पानी सप्लाई दिखाकर भुगतान ले लिया गया। इस तरह के फर्जी बिलों ने पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

नालों से भरा पानी

जांच में यह भी उजागर हुआ कि पानी ढुलाई का काम तय नियमों को दरकिनार करते हुए बिना किसी टेंडर प्रक्रिया के चुनिंदा ठेकेदारों को सौंप दिया गया। नियमों के मुताबिक जहां से पानी भरना तय था- वहां से न लेकर ठेकेदारों ने स्थानीय नालों से पानी भरकर सप्लाई की, जिससे पानी की गुणवत्ता को लेकर भी गंभीर चिंताएं सामने आईं।

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कई अधिकारी-कंट्रैक्टर रडार पर

विजिलेंस ने अपनी रिपोर्ट में जल शक्ति विभाग के एक जूनियर इंजीनियर, लिपिक और अन्य अधिकारियों के साथ ठेकेदारों की भूमिका को संदिग्ध माना है। आरोप है कि जूनियर इंजीनियर ने बिना किसी भौतिक जांच के फर्जी बिल तैयार किए, जिन्हें कार्यकारी अभियंता ने आगे बढ़ाया और SDM कार्यालय से भी बिना सत्यापन के भुगतान स्वीकृत कर दिया गया।

120 लोगों के बयान दर्ज

इस पूरे प्रकरण में अब तक करीब 120 लोगों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं, जिनके आधार पर जांच को अंतिम रूप दिया गया। शुरुआती स्तर पर ही सरकार ने इस मामले में संलिप्त 10 अधिकारियों को निलंबित किया था, जबकि संबंधित ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई भी शुरू की गई।

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कैसे हुआ घोटाले का पर्दाफाश?

गौरतलब है कि इस पूरे घोटाले का पर्दाफाश RIT के जरिए हुआ था, जिसके बाद मामला सामने आते ही सरकार ने विजिलेंस जांच के आदेश दिए थे। अब अदालत में चालान पेश होने के बाद यह देखना अहम होगा कि दोषियों के खिलाफ आगे क्या कार्रवाई होती है और क्या इस मामले में जवाबदेही तय हो पाती है या नहीं।

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