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April 29, 2026

IGMC में महिला मरीजों की प्राइवेसी से खिलवाड़ : पर्दे के पीछे चला इलाज, बाहर से दिखता रहा सब

महिला मरीजों का उपचार व्यवस्था पर उठे सवाल

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शिमला। हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान IGMC शिमला में स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। मंगलवार को स्त्री रोग विभाग की माइनर ओटी OT में महिला मरीजों का उपचार ऐसे हालात में किया गया- जहां उनकी प्राइवेसी पूरी तरह सुरक्षित नहीं रह पाई।

IGMC में महिला मरीजों की प्राइवेसी से खिलवाड़

बताया जा रहा है कि ओटी में लगाया गया पर्दा इस तरह था कि बाहर बैठे मरीजों और उनके तीमारदारों को अंदर की गतिविधियां साफ दिखाई दे रही थीं। ऐसे में उपचार के दौरान महिलाओं की गोपनीयता प्रभावित हुई- जिससे अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।

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पर्दे के पीछे चला इलाज

मौके पर मौजूद एक वरिष्ठ महिला कर्मचारी की नजर जब इस स्थिति पर पड़ी तो उन्होंने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए OT का दरवाजा बंद करवाया और व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए। हालांकि, तब तक यह मामला चर्चा का विषय बन चुका था।

बाहर से दिखता रहा सब

स्वास्थ्य मानकों के अनुसार, महिला मरीजों के उपचार के दौरान उनकी निजता का विशेष ध्यान रखना अनिवार्य होता है। खुले या अधूरी व्यवस्था में इस तरह की प्रक्रिया न केवल नियमों के खिलाफ है, बल्कि संवेदनशीलता की कमी भी दर्शाती है।

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महिला मरीजों को हो रही परेशानी

दरअसल, 16 अप्रैल को कमला नेहरू अस्पताल से स्त्री रोग विभाग को IGMC में शिफ्ट किया गया था। मगर नई जगह पर अभी तक बुनियादी सुविधाएं पूरी तरह विकसित नहीं हो पाई हैं- जिसके चलते महिला मरीजों को असुविधा झेलनी पड़ रही है।

समय पर नहीं मिल रही रिपोर्ट

अस्पताल पहुंची कई महिलाओं ने बताया कि जहां पहले KNH में जांच और रिपोर्ट एक ही दिन में मिल जाती थी। वहीं अब IGMC में सामान्य परीक्षण के लिए भी पूरा दिन लग रहा है। वर्तमान में KNH में केवल प्रसव सेवाएं दी जा रही हैं, जबकि अन्य स्त्री रोग संबंधी उपचार के लिए मरीजों को IGMC आना पड़ता है।

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सरकारी अस्पतालों में नहीं आ रहे मरीज

स्थिति यह है कि पहले जहां KNH में रोजाना करीब 300 महिलाएं उपचार के लिए पहुंचती थीं। वहीं, अब IGMC में OPD का आंकड़ा 100 के आसपास सिमट गया है। मरीजों को दोनों अस्पतालों के बीच बार-बार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, जिससे उनकी परेशानी और बढ़ गई है।

प्राइवेट अस्पतालों में भीड़

इसी कारण अब कई महिला मरीज रिपन अस्पताल और निजी अस्पतालों का रुख कर रही हैं। IGMC में डॉक्टरों की कमी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। इस पूरे मामले पर IGMC के कार्यकारी एमएस डॉ. प्रवीण भाटिया ने कहा कि मामले की जांच की जाएगी और भविष्य में ऐसी घटनाएं दोहराई न जाएं- इसके लिए संबंधित विभाग को सख्त निर्देश जारी किए गए हैं।

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