सोलन। हिमाचल प्रदेश में सड़क सुदृढ़ीकरण को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है, जहां विक्रमादित्य सिंह के विभाग के तहत बनी सड़क की टारिंग एक ही दिन में उखड़ गई। स्थानीय जनता द्वारा निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर आरोप लगाए हैं। साथ ही ठेकेदार की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। जिससे स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी है।
कठघरे में लोक निर्माण विभाग की कार्यशैली
दरअसल, सोलन जिले में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत चल रहे एक अहम सड़क प्रोजेक्ट चंबा घाट से शलूमना वाया बसाल मार्ग के सुदृढ़ीकरण और चौड़ीकरण कार्य को लेकर स्थानीय लोगों ने निर्माण गुणवत्ता पर कड़ी आपत्ति जताई है।
यह भी पढ़ें : अनोखा विवाह : एक साथ हुई 6 भाई-बहनों की शादी, बिना फेरों के निभाई रस्में- गांव भर में जश्न
करीब एक साल से जारी इस परियोजना में लापरवाही के आरोपों ने लोक निर्माण विभाग की कार्यशैली को कठघरे में खड़ा कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की टायरिंग बेहद खराब स्तर की है। कई स्थानों पर निर्माण के एक-दो दिन के भीतर ही सड़क की परत उखड़ने लगी।
सड़क के क्षतिग्रस्त होने की आशंका
स्थानीय प्रतिनिधियों के अनुसार बिटुमेन की परत इतनी पतली है कि हल्के दबाव में ही टूटने लगती है, जिससे काम की गुणवत्ता पर गंभीर संदेह पैदा हो गया है। सड़क चौड़ीकरण को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। लोगों का आरोप है कि मार्ग को तय मानकों के अनुरूप चौड़ा नहीं किया गया, जिससे यह अब भी संकरा और जोखिम भरा बना हुआ है।
यह भी पढ़ें- PWD इंजीनियर पर मेहरबान सुक्खू सरकार : 23 दिन में पलटा अपना फैसला, निकाला नया ऑर्डर
सड़क के किनारे नीचे होने से दोपहिया चालकों के लिए दुर्घटना का खतरा बढ़ गया है। साथ ही, नालियों और जल निकासी की उचित व्यवस्था न होने से बरसात के दौरान सड़क के क्षतिग्रस्त होने की आशंका भी जताई जा रही है।
विभागीय अधिकारी नहीं कर रहे नियमित निरीक्षण
स्थानीय निवासियों ने यह भी आरोप लगाया कि विभागीय अधिकारी नियमित निरीक्षण नहीं कर रहे, जिससे ठेकेदार मनमानी कर रहा है। कई बार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई न होने से लोगों में रोष बढ़ता जा रहा है। मामले में संबंधित अधिकारियों ने सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया देने से परहेज किया है।
यह भी पढ़ें- हिमाचल में कांग्रेस के ऑफर को महिला ने ठुकराया, बोली- निर्दलीय लड़ूंगी चुनाव, नहीं चाहिए टिकट
अब ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने केंद्र और प्रदेश सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने निर्माण कार्य की गुणवत्ता, मोटाई और सामग्री की उच्चस्तरीय जांच कराने तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने की अपील की है, ताकि सार्वजनिक धन का दुरुपयोग रोका जा सके और लोगों को सुरक्षित सड़क सुविधा मिल सके।
