शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के रामपुर उपमंडल से स्वास्थ्य सुविधाओं की पोल खोल देने वाली एक खबर सामने आई है। यहां सरकारी अस्पताल में इतने बुरे हालात है कि एक बेड पर तीन-तीन मरीज लेटा दिए गए हैं।

सरकारी अस्पताल के बुरे हाल

आपको बता दें कि चार जिलों की बड़ी आबादी को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाने वाले खनेरी अस्पताल रामपुर में इन दिनों मरीजों का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। मौसम में बदलाव के साथ वायरल फीवर, उल्टी-दस्त और अन्य मौसमी बीमारियों के मरीज बड़ी संख्या में उपचार के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं।

यह भी पढ़ें- राष्ट्रपति भवन तक पहुंची हिमाचली नाटी की गूंज : डॉ. हाब्बी को मिला बड़ा सम्मान

एक बेड पर 3-3 मरीज

मरीजों की संख्या बढ़ने से अस्पताल के वार्डों में उपलब्ध बिस्तर कम पड़ने लगे हैं। स्थिति ऐसी बन गई है कि कई जगहों पर एक ही बेड पर दो से तीन मरीजों को रखने की मजबूरी पैदा हो रही है।

 

4 जिलों के लोग आते हैं इलाज करवाने

खनेरी अस्पताल केवल रामपुर बुशहर और आसपास के क्षेत्रों के मरीजों के लिए ही महत्वपूर्ण स्वास्थ्य केंद्र नहीं है, बल्कि किन्नौर, कुल्लू, लाहौल-स्पीति और सीमावर्ती क्षेत्रों से भी लोग यहां उपचार के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में मरीजों की बढ़ती संख्या का सीधा असर अस्पताल की मौजूदा व्यवस्थाओं पर पड़ रहा है।

यह भी पढ़ें- हिमाचल में फौजी ढेर सारे चिट्टे संग गिरफ्तार : पिता भी कर चुके हैं पुलिस में नौकरी

400 बेड की जरूरत

स्थानीय लोगों के अनुसार अस्पताल की बेड क्षमता लंबे समय से लगभग 200 के आसपास है। जबकि क्षेत्र की बढ़ती आबादी और बाहरी क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को देखते हुए अब कम से कम 400 बेड की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

मौसमी बीमारियों के बढ़ते मामलों से बढ़ी परेशानी

इन दिनों अस्पताल में वायरल फीवर के साथ उल्टी और दस्त से पीड़ित मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। कई मरीजों को उपचार के लिए भर्ती करने की जरूरत पड़ रही है। भर्ती मरीजों की संख्या बढ़ने के कारण उपलब्ध बेड पर अतिरिक्त दबाव बन रहा है। इससे मरीजों के साथ-साथ उनके तीमारदारों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

यह भी पढ़ें- हिमाचल में Mrs CM और पूर्व मंत्री में ठनी : एक-दूसरे पर किए जुबानी वार- कह दिया बहुत कुछ

मरीजों के तीमारदार परेशान

अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके तीमारदारों चंपा, दिनेश और अरुण का कहना है कि मरीजों की संख्या बढ़ने के बावजूद पर्याप्त बेड उपलब्ध नहीं हैं। एक ही बेड पर दो से तीन मरीजों को रखने की स्थिति मरीजों के लिए असुविधाजनक है। उनका कहना है कि बीमारी की हालत में मरीजों को पर्याप्त जगह और बेहतर वातावरण की जरूरत होती है, लेकिन भीड़ बढ़ने के कारण अस्पताल की व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं।

 

स्वास्थ्य कर्मियों पर भी बढ़ रहा अतिरिक्त दबाव

मरीजों की संख्या बढ़ने का असर अस्पताल में तैनात चिकित्सकों और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों पर भी पड़ रहा है। एक साथ अधिक संख्या में मरीजों के पहुंचने से उनके उपचार, निगरानी और देखभाल की जिम्मेदारी बढ़ गई है। खासकर उन दिनों में स्थिति अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाती है, जब वायरल और पेट संबंधी बीमारियों के मामले अचानक बढ़ जाते हैं।

यह भी पढ़ें- चंबा में एक और हाद....सा- मुंडन से लौटते वक्त गाड़ी की ब्रेक फेल, मासूम समेत 9 थे सवार

उपचार कराने आते हैं कई लोग

अस्पताल की मौजूदा क्षमता को लेकर स्थानीय स्तर पर लंबे समय से बेड बढ़ाने और सुविधाओं के विस्तार की मांग उठती रही है। लोगों का कहना है कि जिस समय अस्पताल की वर्तमान क्षमता निर्धारित की गई थी, उस समय क्षेत्र में मरीजों का दबाव आज की तुलना में काफी कम था। अब रामपुर के साथ आसपास के जिलों से भी बड़ी संख्या में लोग यहां उपचार के लिए पहुंच रहे हैं।

200 बेड का अस्पताल

स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल की जरूरत को मौजूदा परिस्थितियों के आधार पर दोबारा आंका जाना चाहिए। उनका तर्क है कि अस्पताल पर केवल रामपुर क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था का भार नहीं है। चार जिलों और आसपास के दूरदराज के इलाकों से मरीज यहां पहुंचते हैं। ऐसे में करीब 200 बेड की मौजूदा क्षमता बढ़ाकर लगभग 400 बेड किए जाने की जरूरत है।

यह भी पढ़ें- हिमाचल : जमीन के नीचे मची हलचल से सहमे लोग- 100 घरों पर खतरा, दीवारों में पड़ी दरारें

मरीजों की बढ़ रही संख्या

राजेन्द्र ठाकुर ने कहा कि अस्पताल में बेड की संख्या बढ़ाने के साथ अतिरिक्त वार्डों का निर्माण और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार जरूरी है। उन्होंने कहा कि मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए अस्पताल की क्षमता बढ़ाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने चाहिए, ताकि लोगों को उपचार के दौरान पर्याप्त सुविधाएं मिल सकें।

जनप्रतिनिधियों से भी लोगों ने मांगा जवाब

समाजसेवी पवन पहाड़ियां ने क्षेत्र के नेताओं और जनप्रतिनिधियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि अस्पताल से जुड़ी समस्याओं को लेकर समय-समय पर आश्वासन दिए जाते रहे हैं। मगर अस्पताल की क्षमता बढ़ाने के मामले में अपेक्षित गति से काम नहीं हुआ।

यह भी पढ़ें- हिमाचल: नशा मुक्ति केंद्र से युवती को होटल में ले गया युवक, जबरन शराब पिलाकर किया मुंह काला

चुनावी वादे फेल

उनका कहना है कि चुनावों के दौरान या अन्य अवसरों पर अस्पताल का दौरा कर लोगों को कई तरह के भरोसे दिए जाते हैं। मगर मरीजों की बढ़ती संख्या के अनुरूप आधारभूत सुविधाओं का विस्तार अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।

 

लोगों की जरूरत पर दें ध्यान

उन्होंने सरकार से मांग की कि खनेरी अस्पताल की मौजूदा जरूरतों का व्यापक आकलन करवाया जाए। इसके आधार पर बेड क्षमता बढ़ाने, नए वार्ड तैयार करने और अस्पताल में आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाने की दिशा में जल्द काम शुरू किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि दूरदराज के पहाड़ी क्षेत्रों से आने वाले मरीजों के लिए खनेरी अस्पताल बेहद महत्वपूर्ण है, इसलिए इसकी क्षमता बढ़ाना समय की जरूरत है।

यह भी पढ़ें : हिमाचल: जंगली मशरूम ने अस्पताल पहुंचाया पूरा परिवार, दो मासूमों सहित 8 की बिगड़ी तबीयत

अस्पताल प्रबंधन ने भी क्या कहा?

एमएस रोशन कौंडल ने बताया कि इन दिनों अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि वायरल फीवर के साथ-साथ उल्टी-दस्त से पीड़ित मरीज भी उपचार के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं और इन मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। मरीजों की संख्या अधिक होने के कारण बेड की उपलब्धता को लेकर परेशानी सामने आ रही है और कुछ परिस्थितियों में एक बेड पर दो से तीन मरीजों को रखने की स्थिति बन रही है।

नोट : ऐसी ही तेज़, सटीक और ज़मीनी खबरों से जुड़े रहने के लिए इस लिंक पर क्लिक कर हमारे फेसबुक पेज को फॉलो करें