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August 14, 2026

राष्ट्रपति भवन तक पहुंची हिमाचली नाटी की गूंज : डॉ. हाब्बी को मिला बड़ा सम्मान

डॉ. हाब्बी ने हिमाचली नाटी को दुनियाभर में दिलाई अलग पहचान

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सिरमौर। हिमाचल की पहाड़ियों में पीढ़ियों से गूंजते लोकगीत और कदमों से थिरकती नाटी अब देश के सबसे बड़े मंचों पर अपनी पहचान दर्ज करा रही है। सिरमौर की लोक संस्कृति को सहेजने और उसे देश-दुनिया तक पहुंचाने में करीब तीन दशक से जुटे एक कलाकार के लिए गुरुवार का दिन बेहद खास रहा। 

नई दिल्ली में मिला सम्मान

हिमाचल के प्रसिद्ध लोक कलाकार एवं लोक संस्कृति के संरक्षण के लिए समर्पित डॉ. जोगिंदर हब्बी को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रीय सम्मान से नवाजा। नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति ने डॉ. जोगिंदर हब्बी को लोक नृत्य के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार प्रदान किया।

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तीन दशक से संस्कृति को सहेजने में जुटे

सम्मान मिलने के बाद हिमाचल की लोक संस्कृति से जुड़े कलाकारों और संस्कृति प्रेमियों में खुशी की लहर है। डॉ. जोगिंदर हब्बी पिछले करीब 30 वर्षों से हिमाचल की समृद्ध लेकिन धीरे-धीरे विलुप्त होती लोक सांस्कृतिक विरासत को बचाने के लिए काम कर रहे हैं।

सिरमौर की हाटी संस्कृति

उनके काम का खास केंद्र सिरमौर की हाटी संस्कृति रही है। उन्होंने पारंपरिक लोकगीतों, लोक नृत्यों, वेशभूषा और लोक वाद्य यंत्रों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास किए। उनके नेतृत्व में सिरमौर के लोक कलाकारों ने देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ विदेशों में भी हजारों मंचों पर प्रस्तुतियां दी हैं।

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रीमिक्स के दौर में बचाए रखी लोक संस्कृति

इन कार्यक्रमों के जरिए सिरमौरी संस्कृति और नाटी को व्यापक पहचान मिली। डॉ. हब्बी के प्रयासों की खास बात यह रही कि उन्होंने लोक संस्कृति को आधुनिकता के नाम पर उसके मूल स्वरूप से अलग करने के बजाय पारंपरिक रूप में सहेजने पर जोर दिया।

लोक कलाओं को दिया मंच

उनके साथ जुड़े कलाकारों ने रीमिक्स गीतों और इलेक्ट्रॉनिक वाद्य यंत्रों से दूरी बनाए रखते हुए पारंपरिक लोक वाद्य यंत्रों, वेशभूषा, गीतों और नृत्य शैलियों को प्राथमिकता दी। सिरमौरी नाटी के साथ कई ऐसी पारंपरिक लोक कलाओं को भी मंच दिया गया, जो समय के साथ लोगों की स्मृतियों से दूर होती जा रही थीं।

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नाटी को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में अहम भूमिका

सिरमौरी नाटी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के उनके प्रयासों को विभिन्न अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड में दर्ज उपलब्धियों के जरिए भी मान्यता मिली है। लोक संस्कृति के क्षेत्र में उनके लंबे योगदान के लिए उन्हें विदेश की एक यूनिवर्सिटी से मानद डॉक्टरेट की उपाधि भी मिल चुकी है।

 

कलाकारों ने दी बधाई

संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार मिलने पर पद्मश्री विद्यानंद सरैक, उस्ताद बिस्मिल्लाह खान पुरस्कार प्राप्त लोक कलाकार गोपाल हब्बी समेत हिमाचल के सैकड़ों कलाकारों ने डॉ. जोगिंदर हब्बी को बधाई दी। कलाकारों ने उम्मीद जताई कि यह राष्ट्रीय सम्मान हिमाचल की लोक कलाओं को संरक्षित करने और युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के प्रयासों को और मजबूती देगा।

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समारोह में कई गणमान्य लोग रहे मौजूद

विज्ञान भवन में आयोजित सम्मान समारोह में केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, संस्कृति मंत्रालय के राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह, संस्कृति मंत्रालय के सचिव विवेक अग्रवाल और संगीत नाटक अकादमी की अध्यक्ष डॉ. संध्या पुरेचा समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। समारोह की शुरुआत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दीप प्रज्ज्वलित कर की।

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