शिमला। हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल IGMC शिमला में जांच प्रक्रिया से जुड़ी गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। यहां मरीज के मस्तिष्क से जांच के लिए निकाले गए CSF सैंपल की जगह लैब रिकॉर्ड में यूरिन जांच दर्ज कर दी गई। इतना ही नहीं बाद में उसी आधार पर यूरिन की रिपोर्ट भी जारी कर दी गई।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला बीती 28 सितंबर, सोमवार का बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, मरीज के मस्तिष्क में पानी भरने की स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने आवश्यक चिकित्सकीय प्रक्रिया के तहत CSF सैंपल निकाला था।
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किस विभाग से जुड़ा है मामला?
CSF मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी के आसपास मौजूद द्रव होता है- जिसकी जांच कई चिकित्सकीय स्थितियों में महत्वपूर्ण होती है। डॉक्टरों ने सैंपल को जांच के लिए लैब भेजा था। मामला बाल रोग विभाग से संबंधित है।
CSF का कैसे हुआ URINE टेस्ट?
मामले में सबसे अहम बात यह सामने आई कि सैंपल के साथ भेजे गए मूल रिक्विजिशन फॉर्म में Nature of Specimen के सामने स्पष्ट तौर पर CSF लिखा हुआ था। दस्तावेज में सैंपल लिए जाने का समय भी दोपहर 12:50 बजे दर्ज था। इसके बावजूद लैब की एंट्री प्रक्रिया के दौरान यही सैंपल यूरिन के तौर पर दर्ज हो गया।
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लैब ने कितना बिल थमाया?
रिकॉर्ड के अनुसार दोपहर करीब 1:05 बजे रूटीन यूरिन जांच के नाम पर 23 रुपये का बिल तैयार कर दिया गया। इसके बाद लैब रिकॉर्ड में सैंपल के प्राप्त होने का समय दोपहर 1:30 बजे दर्ज किया गया। इसके बाद जिस जांच की प्रक्रिया अपनाई गई, उसमें यूरिन से संबंधित अलग-अलग मानकों की जांच की गई। रिपोर्ट करीब 2:56 बजे जारी कर दी गई। यानी मूल सैंपल CSF होने के बावजूद रिकॉर्ड और आगे की प्रक्रिया में उसे यूरिन सैंपल के रूप में दर्ज कर दिया गया था।
रिपोर्ट में क्या था?
जारी रिपोर्ट में भी ऐसे पैरामीटर शामिल थे जो सामान्य तौर पर यूरिन की जांच से संबंधित होते हैं। इसमें रंग, पारदर्शिता, पीएच, विशिष्ट गुरुत्व, ग्लूकोज, प्रोटीन, ब्लड, RBC और पस सेल समेत अन्य मानकों का उल्लेख किया गया था। इससे स्पष्ट हुआ कि जिस सैंपल को लैब रिकॉर्ड में यूरिन के रूप में दर्ज किया गया, उसकी जांच भी उसी श्रेणी के अनुसार की गई।
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क्या उठे सवाल?
मामला सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन के स्तर पर यह सवाल उठा कि-
- जब डॉक्टर द्वारा भेजे गए मूल दस्तावेज में सैंपल की प्रकृति स्पष्ट रूप से CSF लिखी गई थी- तो लैब के रिकॉर्ड में इसे यूरिन के तौर पर कैसे दर्ज किया गया?
- सैंपल की पहचान से लेकर रिपोर्ट तैयार करने और उसे सत्यापित करने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं?
- सैंपल लैब में दर्ज होने के दौरान उसकी पहचान और साथ लगे दस्तावेज का मिलान किस स्तर पर किया गया?
- रिपोर्ट जारी होने से पहले उसे सत्यापित करने की प्रक्रिया में भी यह गलती पकड़ में क्यों नहीं आई?
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कर्मचारी से मांगा गया जवाब
मामला सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन ने संबंधित कर्मचारी से पूरे घटनाक्रम को लेकर जवाब मांगा। कर्मचारी से स्पष्टीकरण लेने के बाद प्रशासन ने उसके खिलाफ कार्रवाई करते हुए उसे IGMC से हटा दिया और चमियाणा सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल भेज दिया। इसके अलावा उससे लिखित रूप में माफीनामा भी लिया गया है। प्रशासन की ओर से उसे भविष्य में इस तरह की चूक दोबारा न करने के निर्देश दिए गए हैं।
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सिलसिलेवार पढ़ें पूरी खबर
- IGMC की लैब का कारनामा : IGMC में बाल रोग विभाग के एक मरीज के मस्तिष्क से जांच के लिए निकाले गए CSF (मस्तिष्कमेरु द्रव) सैंपल को लैब रिकॉर्ड में गलती से यूरिन के तौर पर दर्ज कर दिया गया। फिर उसी आधार पर यूरिन की रिपोर्ट जारी कर दी गई।
- रिक्विजिशन फॉर्म पर साफ लिखा था CSF : 28 सितंबर को डॉक्टर ने मरीज का CSF सैंपल जांच के लिए भेजा था। मूल फॉर्म में 'स्पष्ट रूप से CSF लिखा था और सैंपल लेने का समय दोपहर 12:50 बजे दर्ज था।
- लैब ने थमाया यूरिन टेस्ट बिल : लैब रिकॉर्ड में दोपहर 1:05 बजे 23 रुपये का रूटीन यूरिन टेस्ट दर्ज किया गया। सैंपल 1:30 बजे प्राप्त दिखाया गया और रंग, pH, ग्लूकोज, प्रोटीन, RBC व पस सेल जैसे यूरिन पैरामीटर की रिपोर्ट दोपहर 2:56 बजे जारी कर दी गई।
- सैंपल पहचान और रिपोर्ट पर उठे सवाल : CSF के बजाय यूरिन की रिपोर्ट जारी होने से अस्पताल में सैंपल एंट्री, बिलिंग और रिपोर्ट जारी करने से पहले सत्यापन की प्रक्रिया पर सवाल खड़े हुए हैं। खास तौर पर यह जांच का विषय बना कि मूल फॉर्म पर CSF लिखे होने के बावजूद रिकॉर्ड में यूरिन कैसे दर्ज हुआ।
- संबंधित कर्मचारी पर कार्रवाई : मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने निजी लैब में कार्यरत संबंधित कर्मचारी से जवाब मांगा। इसके बाद उसे IGMC से हटाकर सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल चमियाणा भेज दिया गया। साथ ही उससे भविष्य में ऐसी गलती दोबारा न करने का लिखित माफीनामा भी लिया गया।
