ऊना। जिस घर में कुछ ही समय बाद बच्चे की किलकारियां गूंजने वाली थीं, वहां अचानक मातम पसर गया। जिस परिवार को नन्हे मेहमान के आने का इंतजार था, उसकी खुशियां पलभर में दुख में बदल गईं। मामला हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले का है, जहां प्रसव के दौरान 33 वर्षीय महिला और उसके गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों ने डॉक्टरों पर इलाज में लापरवाही बरतने के आरोप लगाए और अस्पताल के मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य (MCH) परिसर में हंगामा किया।
प्रसव पीड़ा बढ़ने पर ऑपरेशन थिएटर ले गए डॉक्टर
जानकारी के अनुसार, रीना पत्नी राजीव कुमार, निवासी अपर अरनियाला, को प्रसव पीड़ा होने पर क्षेत्रीय अस्पताल ऊना में भर्ती करवाया गया था। परिजनों का कहना है कि वह करीब तीन दिन से अस्पताल में भर्ती थी और उसका इलाज चल रहा था।
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परिजनों का कहना है कि डॉक्टरों ने महिला के जो भी टेस्ट करवाने को कहे थे, परिवार ने सभी टेस्ट करवाए। परिवार के मुताबिक, गर्भ में पल रहे बच्चे की दिल की धड़कन भी समय-समय पर चेक की जा रही थी, लेकिन किसी तरह की कोई परेशानी नहीं बताई।
सुबह बिगड़ी महिला की हालत
परिवार का आरोप है कि सुबह डॉक्टरों ने महिला को अस्पताल के बाहर चक्कर लगाने के लिए कहा। इसी दौरान महिला को प्रसव पीड़ा शुरू हो गई।
जब उसकी प्रसव पीड़ा बढ़ी तो डॉक्टर उसे MCH परिसर के ऑपरेशन थिएटर में ले गए। डॉक्टरों ने महिला और बच्चे को बचाने की पूरी कोशिश की लेकिन अनकी जान नहीं बच पाई। महिला और उसके गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत की खबर सुनते ही परिवार के लोग सदमे में आ गए और अस्पताल में हंगामा शुरू हो गया।
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डॉक्टरों पर लापरवाही के आरोप
परिजनों का आरोप है कि अगर महिला की हालत गंभीर थी और अस्पताल में उसका सही इलाज संभव नहीं था, तो उसे किसी दूसरे बड़े अस्पताल में रेफर कर देना चाहिए था। परिवार का सवाल है कि जब डॉक्टर बेहतर इलाज नहीं कर सकते थे, तो महिला को तीन दिनों तक अस्पताल में क्यों रखा गया।
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परिजनों ने महिला डॉक्टर पर भी सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि डॉक्टर के खिलाफ पहले भी मामले सामने आ चुके हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
निष्पक्ष जांच की मांग
महिला और उसके गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत के बाद परिवार ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। परिजनों का कहना है कि अगर इलाज में लापरवाही हुई है, तो इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। फिलहाल, मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि और मौत के वास्तविक कारणों को लेकर आधिकारिक जानकारी सामने आना जरूरी है। मृतक महिला का पांस साल का बच्चा है जिसके सर से मां का साया हमेशा के लिए उठ गया है।
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हंगामे के बाद मौके पर पहुंची पुलिस
घटना के बाद अस्पताल में तनाव का माहौल बन गया। वहां मौजूद लोगों के बीच भी इस मामले को लेकर चर्चा होने लगी। स्थिति को संभालने के लिए पुलिस थाना ऊना की टीम मौके पर पहुंची और हालात को नियंत्रित करने का प्रयास किया।
अस्पताल प्रबंधन ने शुरू की जांच
घटना के बाद अस्पताल प्रबंधन ने मामले की जानकारी जुटानी शुरू कर दी है। संबंधित लोगों से पूछताछ की जा रही है, ताकि पता चल सके कि आखिर क्या हुआ था। फिलहाल डॉक्टरों पर लगाए गए लापरवाही के आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है। महिला और उसके बच्चे की मौत के असली कारणों का पता जांच पूरी होने के बाद ही चल पाएगा।
