शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में सफाई व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतरती नजर आ रही है। सैहब सोसायटी के कर्मचारियों की हड़ताल शनिवार को दूसरे दिन भी जारी रही, जिसके चलते शहर के हजारों घरों, बाजारों और व्यावसायिक संस्थानों से कूड़ा नहीं उठ पाया। शहर के कई इलाकों में कूड़े के ढेर लगने शुरू हो गए हैं, जिससे लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। खास बात यह है कि आवश्यक सेवाएं बनाए रखने के लिए एस्मा लागू होने के बावजूद कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर आंदोलन पर डटे हुए हैं।

भाजपा ने नगर निगम पर साधा निशाना

सफाई व्यवस्था ठप होने के बाद भाजपा ने नगर निगम प्रशासन और कांग्रेस सरकार को आड़े हाथों लिया है। भाजपा जिला शिमला अध्यक्ष केशव चौहान ने आरोप लगाया कि पिछले चार वर्षों से सैहब सोसायटी के कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर निगम अधिकारियों और नेताओं के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान करने के बजाय उन्हें लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है।

 

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उन्होंने कहा कि सुबह पांच बजे से लेकर देर शाम तक शहर की सफाई व्यवस्था संभालने वाले कर्मचारी आज अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठने को मजबूर हैं। भाजपा ने नगर निगम प्रशासन पर मजदूर विरोधी रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि सफाई कर्मियों की जायज मांगों को तुरंत पूरा किया जाना चाहिए।

जनता पर बढ़ाया बोझ] कर्मचारियों को नहीं मिली राहत

केशव चौहान ने आरोप लगाया कि बीते चार वर्षों में नगर निगम ने पानी और कूड़ा शुल्क में भारी बढ़ोतरी कर आम जनता पर आर्थिक बोझ डाला है, लेकिन दूसरी ओर कर्मचारियों को उनका वित्तीय लाभ देने में टालमटोल की जा रही है।

 

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उन्होंने कहा कि शहर की सड़कों की हालत खराब है और कई जगहों पर मरम्मत कार्य अधूरे पड़े हैं। भाजपा नेता ने यह भी आरोप लगाया कि नगर निगम में “चहेते ठेकेदारों” को फायदा पहुंचाया जा रहा है, जबकि जमीनी स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों की अनदेखी हो रही है।

वेतन बढ़ोतरी बहाल करने की मांग पर अड़े कर्मचारी

सैहब सोसायटी के करीब 800 कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। इनमें घर-घर से कूड़ा उठाने वाले कर्मचारी, सड़क सफाई कर्मी, चालक और सुपरवाइजर शामिल हैं। कर्मचारियों की मुख्य मांग नगर निगम द्वारा पहले दी जा रही 10 प्रतिशत वार्षिक वेतन बढ़ोतरी को बहाल करना है।

 

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शनिवार को उपायुक्त कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करते हुए यूनियन नेताओं ने नगर निगम प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। यूनियन का कहना है कि 10 प्रतिशत वेतन वृद्धि की जगह केवल 3 प्रतिशत महंगाई भत्ता देने से कर्मचारियों को हर महीने 700 से 1000 रुपये तक का नुकसान होगा।

मांगें पूरी होने तक जारी रहेगी हड़ताल

सैहब सोसायटी यूनियन के अध्यक्ष जसवंत सिंह ने साफ कहा कि जब तक कर्मचारियों की मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने नगर निगम प्रशासन पर तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाया। कर्मचारियों ने यह भी दावा किया कि नगर निगम ने क्यूआर कोड जैसी योजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च किए, जबकि उसी राशि से नए सफाई कर्मियों की भर्ती कर मौजूदा कर्मचारियों पर काम का बोझ कम किया जा सकता था।

 

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स्वच्छता सर्वेक्षण के बीच बढ़ी निगम की मुश्किलें

राजधानी में चल रहे स्वच्छता सर्वेक्षण के बीच सफाई कर्मियों की हड़ताल ने नगर निगम की चिंता बढ़ा दी है। शहर में लगातार दूसरे दिन कूड़ा न उठने से गंदगी बढ़ने लगी है और लोगों में नाराजगी देखने को मिल रही है। नगर निगम प्रशासन ने हड़ताल को अवैध करार देते हुए कर्मचारियों को तुरंत काम पर लौटने के निर्देश दिए हैं, लेकिन फिलहाल कर्मचारी अपने आंदोलन पर अडिग नजर आ रहे हैं।

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