#अव्यवस्था
May 12, 2026
HRTC कर्मचारियों का सुक्खू सरकार को अल्टीमेटम- 5 बजे तक नहीं आई सैलरी तो कल से होगी हड़ताल
वेतन में देरी होने पर सुक्खू सरकार पर भड़के HRTC कर्मचारी
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में वेतन को लेकर एक बार फिर हिमाचल पथ परिवहन निगम के कर्मचारियों और प्रदेश सरकार के बीच टकराव की स्थिति बन गई है। महीने की 12 तारीख गुजर जाने के बावजूद वेतन जारी न होने से नाराज HRTC कर्मचारियों ने अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है।
यूनियन ने सरकार को साफ चेतावनी दी है कि अगर आज शाम 5 बजे तक कर्मचारियों के खातों में सैलरी नहीं पहुंची तो कल सुबह 10 बजे से प्रदेशभर में बसों के पहिए थम सकते हैं।
HRTC ड्राइवर यूनियन के अध्यक्ष मानसिंह ने कहा कि पिछले कई महीनों से कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिल रहा है, जिससे उन्हें भारी आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार हर महीने कर्मचारियों को वेतन के लिए इंतजार करवाती है, जबकि कर्मचारी हर परिस्थिति में अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि बीते महीने भी कर्मचारियों को 11 तारीख के बाद वेतन मिला था और पिछले छह महीनों से यही स्थिति लगातार बनी हुई है।
तारा देवी में आयोजित गेट मीटिंग के दौरान यूनियन ने सर्वसम्मति से फैसला लिया कि अगर तय समय तक वेतन जारी नहीं होता तो ड्राइवर, कंडक्टर और तकनीकी कर्मचारी बसों को डिपो में खड़ा कर हड़ताल पर चले जाएंगे। यूनियन नेताओं का कहना है कि कर्मचारियों के पास अब आंदोलन के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है।
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कर्मचारियों ने कहा कि घर की किश्तें, बच्चों की फीस, राशन और अन्य जरूरी खर्च पूरी तरह वेतन पर निर्भर करते हैं। लगातार देरी से कर्मचारियों के परिवार आर्थिक और मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं। यूनियन का कहना है कि कर्मचारी हर मौसम और कठिन हालात में यात्रियों को सेवाएं देते हैं, लेकिन बदले में उन्हें समय पर वेतन तक नहीं मिल पा रहा।
मानसिंह ने सरकार को उसके पुराने वादे भी याद दिलाए। उन्होंने कहा कि 12 अक्टूबर, 2025 को उपमुख्यमंत्री एवं परिवहन मंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने घोषणा की थी कि सभी कर्मचारियों और पेंशनरों को हर महीने की 2 तारीख तक वेतन और पेंशन जारी कर दी जाएगी।
बावजूद इसके न तो नियमित रूप से वेतन मिल रहा है और न ही पेंशनरों को समय पर पेंशन दी जा रही है। उन्होंने बताया कि निगम में करीब 11 हजार कर्मचारी और लगभग 8500 पेंशनर हैं, जो इस स्थिति से प्रभावित हो रहे हैं।
उधर, कर्मचारी महासंघ इंटक ट्रांसपोर्ट के प्रदेश अध्यक्ष समर चौहान ने भी सरकार और निगम प्रबंधन को चेतावनी देते हुए कहा कि कर्मचारियों के लंबित वेतन का तुरंत भुगतान किया जाए। उन्होंने मांग की कि भविष्य में वेतन और पेंशन समय पर जारी करने के लिए स्थायी व्यवस्था बनाई जाए।
उन्होंने कहा कि अगर जल्द समाधान नहीं निकला तो कर्मचारी संगठन आगामी आंदोलन की रणनीति तय करने के लिए मजबूर होंगे। अगर कर्मचारियों की हड़ताल होती है तो इसका सीधा असर प्रदेशभर में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर पड़ सकता है और हजारों यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।