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May 13, 2026

हिमाचल में वृद्धावस्था पेंशन घोटाले पर बड़ा एक्शन: FIR दर्ज, अफसरों समेत 44 पर बैठी जांच

पूरे हिमाचल प्रदेश में पेंशन के मामलों का होगा सत्यापन

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शिमला। हिमाचल प्रदेश के जिला शिमला से एक ऐसा मामला सामने आया है- जिसने सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। तांगणू-जांगलिख पंचायत में सामने आए वृद्धावस्था पेंशन फर्जीवाड़े ने प्रशासन और सामाजिक न्याय विभाग में हड़कंप मचा दिया है।

वृद्धावस्था पेंशन घोटाले पर बड़ा एक्शन

मामले में अब पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में कई दस्तावेज संदिग्ध पाए गए हैं, जिसके बाद जिला कल्याण अधिकारी की शिकायत पर हिमाचल प्रदेश पुलिस ने चिड़गांव थाना में मामला दर्ज किया है। इस मामले में 44 लोगों पर नियमों के विरुद्ध वृद्धावस्था पेंशन लेने का आरोप है।

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कई अधिकारियों सहित 44  पर बैठी जांच

सूत्रों के अनुसार जिन लोगों के नाम सामने आए हैं, उनमें कई ऐसे लोग शामिल हैं जिनकी उम्र 60 वर्ष से काफी कम है, लेकिन फिर भी वे वर्षों से वृद्धावस्था पेंशन का लाभ उठा रहे थे। आरोप है कि 44 से 54 वर्ष आयु वर्ग के लोगों को फर्जी दस्तावेजों और रिकॉर्ड में कथित हेरफेर के जरिए योजना का लाभ दिलाया गया। इनमें 25 पुरुष और 19 महिलाएं शामिल बताई जा रही हैं। तांगणू गांव के 20 और जांगलिख के 24 लोगों के नाम जांच के दायरे में हैं।

 

बताया जा रहा है कि कुछ लोग वर्ष 2018-19 से पेंशन ले रहे थे, जबकि कई नाम 2021 के बाद जोड़े गए। मामला तब उजागर हुआ जब रिकॉर्ड में उम्र संबंधी गड़बड़ियां सामने आईं। ऑनलाइन और ऑफलाइन दस्तावेजों में आयु मेल नहीं खाने के बावजूद सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने पर अब कई सवाल खड़े हो गए हैं।

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4-5 दिन में मिलेगा पूरा रिकॉर्ड

मामले की गंभीरता को देखते हुए विभागीय स्तर पर भी जांच तेज कर दी गई है। दस्तावेजों की दोबारा जांच की जा रही है और जिन रिकॉर्ड में गड़बड़ी मिल रही है- उन्हें पुलिस को सौंपा जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, आने वाले चार-पांच दिनों में पूरा रिकॉर्ड मिलने की संभावना है।

कई अफसर-कर्मचारी जांच घेरे में

जांच के घेरे में अब पंचायत स्तर के कर्मचारी और अधिकारी भी आ गए हैं। विभागीय सूत्रों का कहना है कि पंचायत सचिव की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है। आरोप है कि परिवार रजिस्टर और अन्य दस्तावेजों के सत्यापन में लापरवाही बरती गई या जानबूझकर गलत जानकारी आगे भेजी गई। अगर जांच में यह साबित होता है कि दस्तावेजों में हेरफेर कर पेंशन स्वीकृत करवाई गई, तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी कार्रवाई तय मानी जा रही है।

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प्रदेश सरकार भी सर्तक

मामले के सामने आने के बाद प्रदेश सरकार भी सतर्क हो गई है। सीपी वर्मा ने बताया कि अपात्र लोगों द्वारा ली गई वृद्धावस्था पेंशन के मामले में विभाग ने पुलिस में केस दर्ज करवा दिया है। साथ ही प्रदेश के सभी जिला कल्याण अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि पेंशन मामलों का दोबारा सत्यापन किया जाए। उन्होंने कहा कि यदि विभागीय लापरवाही सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।

गहनता से जांच कर रही टीमें

उधर, गौरव सिंह ने बताया कि पुलिस थाना चिड़गांव की टीम दस्तावेजों, आयु प्रमाण पत्रों और पहचान पत्रों की गहन जांच कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं में फर्जी तरीके से लाभ लेने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा और दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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