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May 15, 2026

गिरने की कगार पर पहुंचा सतलुज पर बना पुल, आंखे मूंद सो रहा विक्रमादित्य का विभाग, लोगों में आक्रोश

रामपुर में सतलुज पर बना पुल एक तरफ झुका, जान जोखिम में डाल सफर कर रहे लोग

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Rampur Damaged Bridge

रामपुर (शिमला)। हिमाचल प्रदेश में लोक निर्माण विभाग का जिम्मा संभाल रहे कैबिनेट मंत्री विक्रमादित्य सिंह प्रदेश के कोने-कोने में सड़कों का जाल बिछाने और आधुनिक पुलों के निर्माण के बड़े-बड़े दावे करते नहीं थकते] लेकिन उनके अपने ही जिला शिमला के रामपुर उपमंडल में विकास के इन दावों की कलई खुलती नजर आ रही है। रामपुर की ग्राम पंचायत क्याव में सतलुज नदी की लहरों पर टिका लोक निर्माण विभाग का पुल आज विभाग की अनदेखी और प्रशासनिक बेरुखी के कारण डेथ ट्रैप में तब्दील हो चुका है। वर्षों पहले आई भीषण बाढ़ की मार झेलने के बाद इस पुल की नींव दरक चुकी है] लेकिन सरकार और विभाग इस खतरे से आंखें मूंदे बैठे हैं।

नींव छोड़ चुकी है जमीन, एक तरफ झुका पुल

ग्रामीणों के अनुसार कई वर्ष पहले सतलुज नदी में आई भीषण बाढ़ के दौरान पुल को भारी नुकसान पहुंचा था। नदी के तेज बहाव और कटाव ने पुल की नींव को कमजोर कर दिया था। उस समय अस्थायी मरम्मत कर पुल को किसी तरह चालू तो कर दिया गया] लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में कभी गंभीर प्रयास नहीं हुए।

 

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समय बीतने के साथ पुल की स्थिति और खराब होती गई। अब हालत यह है कि पुल एक ओर झुक चुका है और इसके नीचे की संरचना में भी दरारें दिखाई देने लगी हैं। बरसात के मौसम में यह खतरा और बढ़ जाता है। ग्रामीणों को हर पल डर सताता रहता है कि कहीं यह पुल किसी बड़े हादसे का कारण न बन जाए।

सड़क पर सुरक्षा नहीं, हर सफर बन रहा जोखिम

गानवी-क्याव-कूट प्रधानमंत्री सड़क पर सुरक्षा इंतजामों की भी भारी कमी बताई जा रही है। सड़क कई स्थानों पर बेहद संकरी है और जगह-जगह क्रैश बैरियर भी नहीं लगाए गए हैं। हाल ही में हुए एक सड़क हादसे में युवा शिशु पालन की मौत के बाद लोगों में भारी आक्रोश है। स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में लगातार दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है] लेकिन विभाग ने कभी सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई। उनका आरोप है कि यदि समय रहते सड़क और पुल की स्थिति सुधारी जाती तो कई हादसों को रोका जा सकता था।

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जान हथेली पर रखकर गुजर रहे मासूम और ग्रामीण

बड़बोन, पा, अन्ना, कूट, सुरू और आसपास के कई गांवों के लोग रोजाना इसी पुल से आवाजाही करते हैं। स्कूली बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं और पशुपालकों के लिए यह पुल जीवनरेखा बना हुआ है। बरसात के दिनों में जब अन्य संपर्क सड़कें बंद हो जाती हैं, तब लोगों के पास इसी खतरनाक पुल से गुजरने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। ग्रामीण बताते हैं कि कई बार पशुओं को लेकर गुजरते समय पुल पर कंपन महसूस होता है, जिससे लोगों में भय का माहौल बना रहता है।

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विभाग के कई बार काटे चक्कर पर नहीं हुई सुनवाई

ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि पुल की जर्जर स्थिति को लेकर कई बार लोक निर्माण विभाग को पत्र लिखे गए, अधिकारियों से मुलाकात की गई और प्रतिनिधिमंडल भी भेजे गए, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। लोगों का आरोप है कि विभाग हर बार आश्वासन देकर मामले को टाल देता है। कई बार ग्रामीणों ने स्वयं चंदा एकत्र कर अस्थायी मरम्मत कर पुल को बचाने का प्रयास किया, लेकिन अब हालात नियंत्रण से बाहर होते जा रहे हैं।

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तकनीकी जांच और पुनर्निर्माण की मांग तेज

क्षेत्र के लोगों ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि पुल के फाउंडेशन की तत्काल तकनीकी जांच करवाई जाए और इसके पुनर्निर्माण का काम प्राथमिकता के आधार पर शुरू किया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा हो सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग और प्रशासन की होगी।

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ग्रामीणों ने दी चेतावनी

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो क्षेत्र के लोग जनसंघर्ष और आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। इस मांग को उठाने वालों में विजय महाटेट, मोहन मेहता, राजेश मेहता, रत्न डोगरा, एस.पी. नेगी, अश्वनी कुमार, विकी बोर्स नेगी, दिवान सिंह, छतर सिंह चौहान, फकीर चंद, राम स्वरूप और मनीराम खुराना सहित बड़ी संख्या में स्थानीय लोग शामिल हैं।

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