शिमला। हिमाचल प्रदेश में शिक्षा सुधार का दावा करने वाली सुक्खू सरकार के पास टीचरों को सैलरी देने के भी पैसे नहीं है। शिमला स्थित हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी (HPU) के टीचरों और नॉन टीचिंग स्टाफ ने सोमवार को अभी तक सैलरी नहीं मिलने के कारण कैंपस के बाहर प्रदर्शन कर गुस्सा जाहिर किया।

पहले भी कर चुके प्रदर्शन

इससे पहले भी टाइम पर सैलरी न मिलने से टीचर्स और नॉन टीचिंग स्टाफ धरना-प्रदर्शन कर चुका है। कुलपति के चेंबर के सामने प्रदर्शन करने वाले टीचरों का कहना था कि यूनिवर्सिटी बार-बार सैलरी देने में देरी कर रही है। उनकी मांग थी कि यूनिवर्सिटी के सभी टीचिंग और नॉन टीचिंग स्टाफ को हर महीने की पहली तारीख को सैलरी दी जाए। इसके अलावा अप्रैल महीने की सैलरी भी जल्दी दी जाए।

 

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आंदोलन की धमकी

कर्मचारियों ने मांगें न मानने पर आंदोलन करने की धमकी दी है। टीचरों के एसोसिएशन का दावा है कि सैलरी देने में देरी के लिए शिक्षा सचिव और उच्च शिक्षा निदेशक जिम्मेदार हैं, जिन्होंने पिछले 10 दिन से सैलरी की फाइल रोककर रखी हुई है। जब तक दोनों इस फाइल पर दस्तखत नहीं कर देते, कर्मचारियों को सैलरी नहीं मिल सकती।

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एसोसिएशन का दावा है कि ऐसा तकरीबन हर महीने ही हो रहा है। इससे कर्मचारी गुस्साए हुए हैं। विश्वविद्यालय में 1,000 से ज्यादा शिक्षण कर्मचारी (फैकल्टी) कार्यरत हैं। नॉन टीचिंग स्टाफ की संख्या लगभग 623 है। HPU शिमला का वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए वार्षिक बजट 80 लाख रुपए निर्धारित किया गया है। संस्थान को 2023-24 में 35 करोड़ रुपए का घाटा हुआ था।

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