शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला समेत कई इलाकों में इन दिनों रसोई गैस (LPG) का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। इस किल्लत ने ना केवल आम जनता को परेशान किया है बल्कि होटल और ढाबा कारोबारियों की कमर तोड़ दी है। आलम ये है कि गैस ना मिलने के कारण अब लोग पुराने दौर की तरह बिजली और लकड़ी के विकल्पों की ओर लौट रहे हैं।

इंडक्शन हीटर की मांग में भारी उछाल

गैस सिलेंडर ना मिलने की वजह से बिजली से चलने वाले इंडक्शन चूल्हों की डिमांड अचानक कई गुना बढ़ गई है। शिमला के बाजारों में इलेक्ट्रॉनिक सामान बेचने वाले दुकानदारों के चेहरे खिले हुए हैं क्योंकि जो स्टॉक हफ्तों तक रखा रहता था, वो अब घंटों में बिक रहा है।

 

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बिक्री का गणित: मॉल रोड के व्यापारियों के मुताबिक जहां पहले हफ्ते में मुश्किल से 2-3 इंडक्शन बिकते थे, अब वहां रोजाना 10 से 15 इंडक्शन हाथों-हाथ बिक रहे हैं।
मजबूरी की खरीदारी: दुकानदार बताते हैं कि पिछले 2-3 दिनों में ही उन्होंने 35 से ज्यादा यूनिट्स बेच दी हैं। खरीदने वालों में सबसे ज्यादा संख्या होटल और ढाबा मालिकों की है।

होटल और ढाबों पर तालाबंदी का खतरा

शिमला में पिछले करीब एक हफ्ते से कमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई ठप है। इससे पर्यटन उद्योग पर बुरा असर पड़ा है:

  • बंद हो रहे चूल्हे: कई छोटे ढाबों में गैस खत्म होने के कारण ताले लटक गए हैं।
  • सीमित स्टॉक: बड़े होटलों के पास भी केवल 2 से 3 दिन का बैकअप बचा है। अगर सप्लाई जल्द बहाल नहीं हुई तो पर्यटकों को खाना खिलाना मुश्किल हो जाएगा।
  • विकल्प की तलाश: कई कारोबारियों ने चंडीगढ़ से भारी मात्रा में इंडक्शन मंगवाए हैं और मजबूरी में लकड़ी के पारंपरिक चूल्हों का सेटअप भी तैयार कर लिया है।

क्यों पैदा हुआ यह संकट ?

इस किल्लत के पीछे अंतरराष्ट्रीय कारण हैं। खाड़ी देशों (Middle East) में बढ़ते तनाव की वजह से LPG की सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। इसका सीधा असर हिमाचल में भी देखने को मिल रहा है। फिलहाल कमर्शियल सिलेंडर बाजार से गायब हैं और अब डर सता रहा है कि कहीं घरेलू गैस (Domestic LPG) की भी किल्लत ना शुरू हो जाए।

 

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फिलहाल आने वाले कुछ दिनों तक राहत मिलने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। लोग गैस के इंतजार में लंबी कतारों और अनिश्चितता के बीच जी रहे हैं। ऐसे में इंडक्शन हीटर और मिट्टी के चूल्हे ही इस संकट की घड़ी में सबसे बड़े मददगार साबित हो रहे हैं।