शिमला। हिमाचल प्रदेश के दो प्रमुख सरकारी अस्पतालों IGMC शिमला और अटल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल सुपरस्पेशियलिटी चमियाना में मरीजों से डिस्चार्ज कार्ड बनवाते समय 25 रुपये फॉलोअप फीस लिए जाने का मामला सामने आया है। ओपीडी में डॉक्टर को दिखाने के लिए पहले ही 10 रुपये की पर्ची बनवानी पड़ती है। ऐसे में इलाज पूरा होने के बाद घर लौटते समय भी मरीजों को अतिरिक्त भुगतान करना पड़ रहा है।
दिन में 100 मरीजों को डिस्चार्ज किए जाने का अनुमान
दरअसल, प्रदेश के दूरदराज के क्षेत्रों से इन अस्पतालों में इलाज करवाने पहुंचने वाले कई मरीजों और उनके परिजनों को रहने, खाने-पीने, यात्रा और दवाइयों पर खर्च करना पड़ता है। ऐसे परिवारों के लिए छोटी रकम भी मायने रखती है, खासकर तब जब उपचार के दौरान पहले ही काफी खर्च हो चुका हो।
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यदि दोनों अस्पतालों में प्रतिदिन कम से कम 100 मरीजों को डिस्चार्ज किए जाने का अनुमान लगाया जाए, तो 25 रुपये प्रति मरीज के हिसाब से रोजाना 2,500 रुपये की राशि बनती है। इस आधार पर महीने में करीब 75 हजार रुपये और सालभर में 9 लाख 12 हजार 500 रुपये एकत्र हो सकते हैं। हालांकि, यह गणना अनुमानित मरीज संख्या पर आधारित है। दोनों अस्पतालों में रोजाना होने वाले वास्तविक डिस्चार्ज और इस शुल्क से सालाना जुटने वाली कुल राशि का आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।
शुल्क के बदले मिलने वाली सुविधा पर सवाल
डिस्चार्ज के समय ली जाने वाली इस फीस को लेकर यह स्पष्ट होना जरूरी है कि राशि किस नियम के तहत वसूली जा रही है और इसके बदले मरीजों को कौन-सी सुविधा मिलती है। उपचार के बाद मरीजों को दोबारा जांच या डॉक्टर से परामर्श के लिए अस्पताल आना पड़ सकता है, इसलिए फॉलोअप व्यवस्था और शुल्क की शर्तों की स्पष्ट जानकारी जरूरी है।
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IGMC के एमएस बोले जानकारी जुटाई जा रही है
IGMC के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. राहुल राव ने कहा कि फॉलोअप चार्ज के संबंध में जानकारी ली जा रही है। उन्होंने बताया कि यह शुल्क चमियाना में लिया जाता है। मरीजों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मामले की पूरी जानकारी जुटाई जाएगी और मरीजों पर आर्थिक बोझ नहीं पड़ने दिया जाएगा।
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अब इस मामले में अस्पताल प्रशासन की ओर से शुल्क के उद्देश्य और उससे जुड़ी सुविधाओं पर स्पष्ट जानकारी आने का इंतजार है। सरकारी अस्पतालों में इलाज करवाने वाले मरीजों के लिए शुल्क की पारदर्शिता और उसकी स्पष्ट जानकारी महत्वपूर्ण है।
