शिमला। हिमाचल प्रदेश की बहुचर्चित स्वास्थ्य योजना हिम केय स्कीम में कथित फर्जीवाड़े की जांच अब और तेज हो गई है। शिमला में विजिलेंस टीम साइबर एक्सपर्ट की मदद से अस्पतालों के डिजिटल रिकॉर्ड, क्लेम डाटा और बिलिंग सिस्टम की फोरेंसिक जांच में जुट गई है।
हिमकेयर घोटाले की जांच तेज
जांच एजेंसियों का मानना है कि जैसे-जैसे डाटा रिकवर होगा- इस पूरे नेटवर्क से जुड़े कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं। विजिलेंस की इस कार्रवाई के बाद अस्पतालों में हड़कंप मचा हुआ है।
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कई अस्पताल रडार पर
प्रारंभिक जांच में चौंकाने वाले संकेत मिले हैं। नौ जिलों के निजी अस्पताल जांच के घेरे में आ चुके हैं। एजेंसियों के अनुसार, किन्नौर, चंबा और लाहौल-स्पीति को छोड़कर लगभग पूरा प्रदेश इस मामले की जद में आ सकता है।
60 फीसदी निजी अस्पताल
शुरुआती पड़ताल में ही करीब 60 फीसदी निजी अस्पतालों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। जांच में सामने आया है कि ऊना, कांगड़ा, मंडी और बिलासपुर जिलों के कई निजी अस्पताल इस घोटाले के केंद्र में हैं।
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पैसों के लिए बड़ी हेराफेरी
रिकॉर्ड की जांच में ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां कागजों में इलाज दिखाया गया। मगर वास्तविकता में मरीजों को कोई सेवा नहीं दी गई। इससे संकेत मिलते हैं कि यह फर्जीवाड़ा सुनियोजित तरीके से किया गया।
सख्त कार्रवाई करने की तैयारी
जांच एजेंसियां अब संदिग्ध अस्पतालों और इससे जुड़े लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी में हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
