मंडी। हिमाचल प्रदेश में सरकारी स्कूलों की व्यवस्था और विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर सरकार के दावों के बीच मंडी जिला से एक ऐसा मामला सामने आया है, जो कई गंभीर सवाल खड़े करता है। द्रंग क्षेत्र के हटौण स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला का दो मंजिला भवन लंबे समय से जर्जर हालत में है। भवन की दीवारों और कमरों में जगह-जगह बड़ी दरारें पड़ चुकी हैं, लेकिन इसी स्कूल परिसर में आज भी नन्हे-मुन्ने बच्चों से लेकर 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। 

 

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब भवन की हालत चिंताजनक बताई जा रही है तो बच्चों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम कब उठाया जाएगा? क्या प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है? यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब प्रदेश सरकार सरकारी स्कूलों में बेहतर सुविधाएं और सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध करवाने की बात करती है। लेकिन हटौण स्कूल की तस्वीर जमीनी हकीकत को लेकर सवाल खड़े कर रही है।

 

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2023 की आपदा में हिला भवन

हटौण स्कूल परिसर में दो भवन हैं। इनमें से एक भवन को फिलहाल सुरक्षित बताया जा रहा है, जबकि दूसरा दो मंजिला भवन चिंता का कारण बना हुआ है। स्थानीय लोगों के मुताबिक वर्ष 2023 में आई आपदा के दौरान इस भवन को नुकसान पहुंचा था। इसके बाद वर्ष 2025 में भवन के अलग-अलग हिस्सों में फिर से बड़ी दरारें दिखाई देने लगीं। समय बीतता गया, लेकिन जर्जर भवन को हटाने की प्रक्रिया अभी तक अंतिम मुकाम तक नहीं पहुंच पाई है।

दरारों के साये में पढ़ाई

स्कूल में नर्सरी से लेकर जमा दो तक की कक्षाएं चलती हैं। यानी यहां पढ़ने वाले कई बच्चे ऐसे हैं, जिन्हें जर्जर भवन की तकनीकी स्थिति का अंदाजा तक नहीं होता। अभिभावकों के लिए सबसे बड़ी चिंता यही है कि वे अपने बच्चों को सुरक्षित माहौल में पढ़ने के लिए स्कूल भेजते हैं, लेकिन अगर स्कूल परिसर में ही कोई भवन खतरे की स्थिति में हो तो उनकी चिंता बढ़ना स्वाभाविक है।

 

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लोगों ने कहा—हादसे का इंतजार क्यों?

स्थानीय निवासी दीनानाथ, सोनू, मीरा देवी और उत्तम चंद ने प्रशासन और सरकार से मामले में जल्द कार्रवाई करने की मांग की है। उनका कहना है कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा मामला होने के कारण इसे प्राथमिकता के आधार पर लिया जाना चाहिए। स्थानीय लोगों ने स्कूल परिसर में चारदीवारी बनाने की मांग भी उठाई है। उनका कहना है कि भवन की मौजूदा स्थिति को देखते हुए किसी दुर्घटना का इंतजार करना उचित नहीं होगा।

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सिर्फ भवन नहीं, जमीन का मामला भी अटका

हटौण स्कूल की समस्या केवल जर्जर भवन तक सीमित नहीं है। स्थानीय लोगों के अनुसार जिस भूमि पर स्कूल का भवन बना हुआ है, उसका नामांतरण अभी शिक्षा विभाग के नाम नहीं हुआ है। इससे पहले भूमि से संबंधित एफसीए यानी वन संरक्षण अधिनियम का मामला तैयार किया गया था, लेकिन उसे मंजूरी नहीं मिल पाई। अब दोबारा एफसीए से संबंधित प्रक्रिया शुरू करने की बात कही जा रही है।

15 मई को अधिकारियों ने किया निरीक्षण

भवन की स्थिति को देखते हुए 15 मई को शिक्षा विभाग और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने स्कूल परिसर का संयुक्त निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान जर्जर भवन को गिराने से संबंधित स्थिति का जायजा लिया गया। उपनिदेशक शिक्षा यशवीर पठानिया के अनुसार, भवन को गिराने के संबंध में लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के साथ संयुक्त निरीक्षण करवाया गया है। अब विभाग को एस्टीमेट रिपोर्ट का इंतजार है। रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद नियमानुसार आगामी कार्रवाई की जाएगी। वहीं लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता दुष्यंत पाल ने बताया कि स्कूल भवन का निरीक्षण करने के बाद रिपोर्ट तैयार की जा रही है और इसे जल्द स्कूल को उपलब्ध करवाया जाएगा।

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सुक्खू सरकार के सामने भी व्यवस्था पर सवाल

हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार लगातार शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और सरकारी स्कूलों में सुविधाएं बढ़ाने पर जोर देती रही है। ऐसे में मंडी के हटौण स्कूल का मामला सरकार के लिए भी एक परीक्षा की तरह देखा जा सकता है।

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