कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश में विकास कार्यों और आधुनिक सड़क.पुल निर्माण को लेकर बड़े.बड़े दावे किए जाते रहे हैं। प्रदेश के लोक निर्माण विभाग मंत्री विक्रमादित्य सिंह भी अक्सर सोशल मीडिया पर नई सड़कों, पुलों और विकास परियोजनाओं की तस्वीरें साझा कर निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और तेज गति का जिक्र करते नजर आते हैं। लेकिन धरातल पर इन दावों की असली तस्वीर अब कांगड़ा जिला के शाहपुर क्षेत्र से सामने आई है, जहां करोड़ों रुपये की लागत से बन रहा एक निर्माणाधीन पुल अपने अंतिम चरण में ही भरभराकर ढह गया। इस घटना ने ठेकेदार के निर्माण कार्य के साथ.साथ लोक निर्माण विभाग की निगरानी और तकनीकी सुपरविजन पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
करोड़ों की लागत से बन रहा पुल अंतिम चरण में गिरा
जानकारी के अनुसार शाहपुर विधानसभा क्षेत्र के तहत धनोटू.ललेटा.बनुमहादेव सड़क पर चंबी खड्ड के ऊपर करोड़ों रुपए की लागत से एक पुल का निर्माण किया जा रहा था। क्षेत्र की जनता लंबे समय से इस पुल के निर्माण का इंतजार कर रही थी, क्योंकि इसके बनने से कई गांवों की आवाजाही आसान होने वाली थी।
यह भी पढ़ें : BREAKING: NEET UG 2026 परीक्षा हुई रद्द: पेपर लीक की आशंका - CBI जांच करेगी
बताया जा रहा है कि पुल निर्माण कार्य लगभग अंतिम चरण में पहुंच चुका था और जल्द ही इसे जनता के लिए समर्पित किया जाना था। लेकिन इसी बीच अचानक पुल भर भरा कर गिर गया और पूरा निर्माण कार्य मलबे में तब्दील हो गया। गनीमत यह रही कि हादसे के समय कोई बड़ा जानमाल का नुकसान नहीं हुआ, अन्यथा स्थिति भयावह हो सकती थी।
पुल का अचानक भरभराकर गिरना यह स्पष्ट करता है कि निर्माण के दौरान न तो तकनीकी मानकों का ध्यान रखा गया और न ही सामग्री की गुणवत्ता की कोई परवाह की गई। जो पुल सालों तक जनता का भार उठाने के लिए बनाया जा रहा था, वह अपना ही वजन नहीं सह पाया।
यह भी पढ़ें : नशे के खिलाफ सुक्खू सरकार का सबसे बड़ा फैसला- अब सरकारी नौकरी से पहले होगा चिट्टा टेस्ट
निर्माण सामग्री और तकनीकी निगरानी पर सवाल
घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल पुल के डिजाइन, निर्माण सामग्री की गुणवत्ता और विभागीय निगरानी को लेकर उठ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि करोड़ों रुपये की लागत से बन रहा पुल उद्घाटन से पहले ही गिर जाए, तो इससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर संदेह होना स्वाभाविक है।
यह भी पढ़ें : हिमाचल में स्मार्ट मीटर की आरती उतारकर जताया विरोध: बंद पड़ी दुकान का आया 22 हजार बिल, विभाग मौन
अब यह चर्चा भी तेज हो गई है कि क्या निर्माण में तकनीकी मानकों की अनदेखी की गई थी या फिर निर्माण सामग्री की गुणवत्ता में कमी छोड़ी गई। साथ ही यह सवाल भी उठ रहे हैं कि निर्माण के दौरान संबंधित विभाग के अधिकारियों द्वारा समय-समय पर निरीक्षण और सुपरविजन कितनी गंभीरता से किया गया।
विधायक ने लिया संज्ञान, जांच के आदेश
घटना के बाद शाहपुर के विधायक एवं उप मुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया ने मामले का तुरंत संज्ञान लिया। सूचना मिलते ही उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों और लोक निर्माण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मौके का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया।
यह भी पढ़ें : शादी में बाराती बन गया था पुलिस कांस्टेबल, अचानक थम गई सांसें; दो मासूम बेटियों का था पिता
विधायक ने स्पष्ट कहा कि पुल गिरने की घटना अत्यंत गंभीर है और इसकी उच्चस्तरीय जांच करवाई जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी ठेकेदार, इंजीनियर या अधिकारी की लापरवाही सामने आती है, तो उनके खिलाफ कड़ी कानूनी एवं विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
दोषियों पर गिरेगी कार्रवाई की गाज
निरीक्षण के दौरान एसडीएम शाहपुर गणेश ठाकुर सहित लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता बीएम ठाकुर और नीरज जसवाल जैसे वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। विधायक ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि निर्माण सामग्री की जांच से लेकर डिजाइन की कमियों तकए हर पहलू की बारीकी से रिपोर्ट तैयार की जाए।
यह भी पढ़ें : हिमाचल BREAKING: गहरी खाई में पलटा पर्यटकों से भरा वाहन- 6 की मौके पर मौत, 4 गंभीर
प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि रिपोर्ट सामने आते ही संबंधित ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने के साथ.साथ लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी और विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। फिलहाल, इस हादसे ने सरकार के विकास मॉडल पर एक ऐसा दाग लगा दिया है, जिसका जवाब देना विभाग के लिए टेढ़ी खीर साबित होगा।
