शिमला। हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (IGMC) शिमला से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने अस्पताल की कार्यप्रणाली और व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां सर्जरी के बाद 12 वर्षीय बच्ची की मौत हो गई। बच्ची की मौत के बाद परिजनों ने डॉक्टरों पर इलाज में लापरवाही का गंभीर आरोप लगाते हुए अस्पताल में जमकर हंगामा किया। परिवार का आरोप है कि उनकी बेटी की हालत ऑपरेशन के बाद बिगड़ी और आखिरकार उसने दम तोड़ दिया।
मृतका की पहचान हिमांशी के रूप में हुई है, जो हमीरपुर जिले के समीरपुर के समीप पजोत गांव की रहने वाली थी। बेटी की मौत से परिवार सदमे में है। वहीं, मौत के बाद पोस्टमार्टम की प्रक्रिया को लेकर भी परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर अव्यवस्थाओं के आरोप लगाए हैं।
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सर्जरी के बाद बिगड़ी बच्ची की हालत
मृतका की मां सीमा शर्मा के अनुसार उनकी बेटी ऑपरेशन से पहले सामान्य थी और खाना-पीना भी ठीक से कर रही थी। परिवार का आरोप है कि सर्जरी के बाद अचानक उसकी हालत बिगड़ गई। बच्ची को पाइपें लगाकर वेंटिलेटर पर रखा गया, लेकिन उसकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ। मां के मुताबिक गुरुवार तड़के करीब 4:59 बजे हिमांशी ने दम तोड़ दिया। बेटी की मौत के बाद मां ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है।
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चार महीने पहले आग से झुलसी थी हिमांशी
IGMC के सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. पुनीत महाजन ने परिवार के लापरवाही के आरोपों पर अस्पताल का पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि बच्ची करीब चार महीने पहले आग से झुलस गई थी। उपचार के बाद उसकी स्थिति में सुधार हुआ था, लेकिन जलने के कारण उसकी गर्दन आपस में जुड़ गई थी। डॉक्टर के अनुसार इसी जटिल स्थिति को ठीक करने के लिए सर्जरी की जा रही थी। गर्दन के जुड़ जाने के कारण बच्ची को एनेस्थीसिया देने में भी चुनौती थी। उन्होंने बताया कि इस जटिल ऑपरेशन में चार वरिष्ठ चिकित्सकों सहित कुल छह डॉक्टर शामिल थे।
सरहद पर तैनात पिता
इस घटना ने परिवार की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। हिमांशी के पिता भारतीय सेना में सेवाएं दे रहे हैं और वर्तमान में देश की सीमा पर तैनात हैं। ऐसे में बेटी की मौत के बाद अस्पताल में उसकी मां और नाबालिग भाई ही मौजूद हैं। एक तरफ मां अपनी बेटी को खोने के सदमे में है, वहीं दूसरी ओर परिवार के मुखिया के मौके पर मौजूद न होने से इस कठिन समय में परिवार की परेशानी और बढ़ गई है।
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पोस्टमार्टम के लिए भी भटकने का आरोप
मामला बच्ची की मौत तक ही सीमित नहीं रहा। परिजनों ने पोस्टमार्टम की प्रक्रिया को लेकर भी अस्पताल में भारी अव्यवस्था और देरी के आरोप लगाए हैं। मां सीमा शर्मा का दावा है कि बच्ची की मौत सुबह 4:59 बजे हो गई थी, लेकिन हमीरपुर पुलिस को सूचना काफी देर बाद दी गई। परिवार का कहना है कि जब वे पोस्टमार्टम के लिए फोरेंसिक मेडिसिन विभाग पहुंचे तो वहां ताला लगा हुआ था।
परिजनों के इन आरोपों ने अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उनका कहना है कि बेटी की मौत के बाद उन्हें जिस मानसिक पीड़ा से गुजरना पड़ा, उसके बीच पोस्टमार्टम के लिए भी उन्हें इधर-उधर भटकना पड़ा।
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अस्पताल प्रशासन ने पुलिस की देरी को बताया वजह
दूसरी ओर, अस्पताल प्रशासन ने पोस्टमार्टम में हुई देरी के लिए पुलिस की ओर से जांच अधिकारी के समय पर नहीं पहुंचने को जिम्मेदार बताया है। IGMC के फोरेंसिक मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. राहुल गुप्ता ने कहा कि उनकी टीम ने सोलन से आए एक अन्य शव का पोस्टमार्टम किया था। उन्होंने बताया कि विभाग का कामकाज शाम चार बजे तक रहता है, लेकिन टीम इसके बावजूद करीब 15-20 मिनट अतिरिक्त रुकी रही। उनके अनुसार बच्ची के पोस्टमार्टम के लिए उस दौरान कोई नहीं पहुंचा।
