रामपुर (शिमला)। हिमाचल प्रदेश के शिमला जिला के रामपुर स्थित एक सरकारी नर्सिंग संस्थान से चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक साथ 17 प्रशिक्षु नर्सों के टीबी संक्रमित पाए जाने के बाद पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। इस घटना ने न केवल स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि संस्थान की कार्यप्रणाली को भी कटघरे में ला खड़ा किया है।
मामला सामने आते ही मचा बवाल
जैसे ही यह मामला सार्वजनिक हुआ, संस्थान परिसर में भारी हंगामा देखने को मिला। प्रभावित छात्राओं के अभिभावक मौके पर पहुंचे और प्रबंधन के खिलाफ कड़ी नाराजगी जताई। उनका आरोप है कि इतने गंभीर मामले को लंबे समय तक दबाने की कोशिश की गई और उन्हें समय पर जानकारी तक नहीं दी गई।
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प्रबंधन पर लापरवाही के आरोप
परिजनों का कहना है कि उनकी बेटियां पिछले कई महीनों से बीमार थीं, लेकिन संस्थान की ओर से न तो उचित चिकित्सा सुविधा दी गई और न ही उन्हें सूचित किया गया। आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि छात्राओं को न तो पर्याप्त पोषण मिल रहा था और न ही रहने-खाने की संतोषजनक व्यवस्था थी।
जांच में सामने आईं अनियमितताएं
एसडीएम स्तर की प्रारंभिक जांच में संस्थान की कार्यप्रणाली में कई खामियां सामने आई हैं। बताया जा रहा है कि यहां बुनियादी सुविधाओं की कमी, अव्यवस्थित प्रबंधन और निगरानी की कमी जैसे गंभीर मुद्दे उजागर हुए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए संस्थान के प्रिंसिपल को हटा दिया गया है और आगे की जांच जारी है।
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सियासी सरगर्मी और सरकार पर हमला
इस संवेदनशील मुद्दे ने अब राजनीतिक रूप ले लिया है। पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने सुक्खू सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि नर्सिंग छात्राओं का संक्रमित होना प्रदेश में 'टीबी उन्मूलन अभियान' की विफलता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से भरपूर सहयोग मिलने के बावजूद प्रदेश सरकार की उदासीनता निंदनीय है। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस मामले में तुरंत संज्ञान लेने और कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
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वर्तमान स्थिति और स्वास्थ्य विभाग का पक्ष
अस्पताल प्रभारी डॉ. रोशन कौंडल ने पुष्टि की है कि 17 प्रशिक्षु नर्सें टीबी से संक्रमित हैं और वर्तमान में उनका उपचार किया जा रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संस्थान में अन्य जांचें जारी हैं और प्रिंसिपल को पदमुक्त कर दिया गया है। फिलहाल, प्रभावित छात्राओं के परिजन रामपुर पहुँच चुके हैं और संस्थान की लापरवाही के खिलाफ उनका विरोध जारी है।
