ऊना। कहते हैं जिन लोगों में कुछ कर दिखाने का जज्बा हो वो लोग अपना लक्ष्या हासिल कर ही लेते हैं। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है हिमाचल प्रदेश के ऊना जिला स्थित बदाऊं गांव के रहने वाले निषाद कुमार ने। बचपन में हुए एक हादसे में अपनी कलाई गंवाने के बाद भी निषाद ने हार नहीं मानी। प्रदेश और देश के लिए यह गर्व की बात है कि अब पेरिस पैरालंपिक में निषाद ने सिल्वर मेडल जीत कर इतिहास रच दिया है।
बैक टू बैक जीता सिल्वर
25 साल के निषाद कुमार ने टोक्यो के बाद पेरिस में भी पैरालंपिक खेलों का सिल्वर मेडल अपने नाम कर लिया है। इसी के साथ निषाद कुमार बैक टू बैक पैरालंपिक खेलों में भारत की चांदी कराने वाले सबसे युवा पारा-एथलीट बन गए हैं। यह भी पढ़ें: ट्यूशन जा रही बच्ची के सामने बदमाशों ने रोकी गाड़ी, कहा- आओ हम छोड़ देते हैंछोटे से गांव से पेरिस तक का सफर
पेरिस पैरालिंपक में देश के लिए सिल्वर मेडल जीत कर लाना निषाद के संघर्ष और मेहनत की कहानी को बयां करती है। एक छोटे से गांव से पेरिस तक का सफर निषाद के लिए बिल्कुल आसान नहीं था।देश के लिए जीता सिल्वर निषाद कुमार ने पेरिस पैरालंपिक के हाई जंप इवेंट में सिल्वर मेडल अपने नाम किया है। निषाद गोल्ड जीतने से सिर्फ 0.4 मीटर से चूके। दरअसल, निषाद ने T47 कैटेगरी के स्पर्धा में भाग लिया था। जिसमें निषाद ने 2.04 मीटर की छलांग के साथ दूसरा स्थान हासिल किया। यह भी पढ़ें: इंजीनियरिंग की पढ़ाई छोड़ वर्दी का चढ़ा जुनून, DSP बना छोटे से गांव का बेटाView this post on Instagram
