मंडी। कहते हैं कि "जहां चाह होती है, वहां राह खुद बन जाती है" यह कहावत हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के बल्ह क्षेत्र के छोटे से गांव कांधी तारापुर के रहने वाले करण की जिंदगी पर बिल्कुल सटीक बैठती है। गरीबी और कठिन परिस्थितियों में पले-बढ़े इस होनहार बेटे ने अपने संघर्ष, मेहनत और अटूट हौसले के दम पर वह मुकाम हासिल कर लिया, जिसका सपना कभी उसकी मां ने देखा था। दर्जी के बेटे करण ने चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) बनकर न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश का नाम रोशन कर इतिहास रच दिया है।
गरीबी में पला-बढ़ा बेटा बना परिवार की उम्मीद
एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाले करण के पिता पेशे से दर्जी हैं] जो दिन-रात मेहनत कर परिवार का पालन-पोषण करते रहे। सीमित संसाधनों और आर्थिक तंगी के बावजूद करण ने कभी अपने सपनों को छोटा नहीं होने दिया। सरकारी स्कूल से पढ़ाई करने वाले इस युवा ने साबित कर दिया कि सफलता महंगे स्कूलों या सुविधाओं की मोहताज नहीं होती] बल्कि मजबूत इरादों से हासिल की जाती है। कड़ी मेहनत और निरंतर प्रयासों के बाद करण ने इंस्टिट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) की कठिन परीक्षा पास कर सीए की प्रतिष्ठित उपाधि हासिल की।
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मां ने देखा था बेटे को सीए बनने का सपना
करण की सफलता की असली कहानी उनकी मां के सपनों से जुड़ी है। उनकी मां हमेशा चाहती थीं कि उनका बेटा एक दिन चार्टर्ड अकाउंटेंट बने और परिवार की जिंदगी बदले। यही सपना करण की सबसे बड़ी प्रेरणा बना रहा। लेकिन जिंदगी ने उस समय सबसे कठिन मोड़ लिया] जब करण सीए इंटरमीडिएट की तैयारी कर रहे थे और उनकी मां का अचानक निधन हो गया। मां के जाने का दर्द इतना गहरा था कि कुछ समय के लिए सब कुछ थम सा गया।
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मां के निधन के बाद भी नहीं टूटा हौसला
इस दुखद घटना ने करण को भीतर से झकझोर दिया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने तय किया कि अब यह संघर्ष केवल उनका नहीं, बल्कि उनकी मां के अधूरे सपने का है। आंसुओं को ताकत बनाकर करण फिर से पढ़ाई में जुट गए और दिन-रात मेहनत कर सफलता की नई इबारत लिख दी। आज जब उन्होंने सीए बनकर सफलता हासिल की, तो यह उपलब्धि उनके लिए सिर्फ एक डिग्री नहीं, बल्कि अपनी मां को दी गई सच्ची श्रद्धांजलि बन गई।
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सफलता मां के नाम, संघर्ष पिता के नाम
अपनी सफलता पर भावुक होते हुए करण ने कहा कि यह उपलब्धि उनकी दिवंगत मां के आशीर्वाद और पिता के अथक संघर्ष का परिणाम है। दर्जी पिता की मेहनत और त्याग ने ही उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दी। संघर्ष भरे इस सफर में करण अकेले नहीं थे। कठिन समय में उनके मित्र युवराज और रिश्तेदारों ने उनका हौसला बनाए रखा।
गांव से देश के प्रतिष्ठित प्रोफेशन तक का सफर
सरकारी स्कूल की साधारण कक्षाओं से शुरू हुआ करण का सफर आज देश के सबसे सम्मानित पेशों में शामिल चार्टर्ड अकाउंटेंसी तक पहुंच चुका है। उनकी सफलता से कांधी तारापुर गांव और पूरे बल्ह क्षेत्र में गर्व और खुशी का माहौल है। करण की यह कहानी आज हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा है कि सपने टूटते नहीं] उन्हें पूरा करने वाले हिम्मत नहीं हारते।
