सिरमौर। कहते हैं कि अगर मन में कुछ कर गुजरने का इरादा हो, तो कोई भी कठिनाई, कोई भी बाधा आपको रोक नहीं सकती है। पर्वत चाहे जितने ऊंचे हों, रास्ता चाहे जितना कठिन क्यों न हो, अगर इरादा पक्का हो और हौसला बुलंद हो, तो इंसान हर मुकाम हासिल कर सकता है।

पहाड़ों से भरी बड़ी उड़ान

ऐसा ही कुछ कर दिखाया है सिरमौर जिले के बेटे आशीष राणा ने। आशीष ने GATE का पेपर क्रैक कर भारत के सर्वोच्च शिक्षण संस्थान IISc, बेंगलुरु में मास्टर ऑफ टेक्नोलॉजी में एडमिशन पाने में सफलता हासलि की है।

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पूरे गांव के लिए गर्व की बात

आशीष राणा हरिपुरधार क्षेत्र के एक छोटे से गांव डसाकना (कोरग) के रहने वाले हैं। साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाले आशीष राणा ने ऐसा कीर्तिमान स्थापित किया है, जो न केवल उनके माता-पिता बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गया है।

कैसे शुरू हुआ सफलता का सफर?

आशीष की शुरुआती शिक्षा अरिहंत इंटरनेशनल स्कूल, नाहन से हुई। पढ़ाई में शुरू से अव्वल रहे आशीष ने जेईई मेन में शानदार रैंक हासिल कर राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) हमीरपुर में इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग (ECE) में दाखिला लिया। यहां भी उन्होंने अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन से सभी को प्रभावित किया। लेकिन उनका सपना इससे भी ऊँचा था।

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IISc तक पहुंचा संघर्ष का सफर

GATE परीक्षा में AIR लाकर आशीष ने कई शीर्ष संस्थानों जैसे IIT दिल्ली, IIT बॉम्बे, IIT मद्रास से आमंत्रण प्राप्त किए, लेकिन उन्होंने IISc बेंगलुरु को चुना। यह वही संस्थान है जिसे भारत में शोध और तकनीकी शिक्षा का सर्वोच्च शिखर माना जाता है। एक छोटे से गांव से निकलकर देश के इस शीर्ष संस्थान तक पहुंचना किसी असाधारण उपलब्धि से कम नहीं है।

छोटे भाई अवनीश भी पीछे नहीं

आशीष के छोटे भाई अवनीश राणा भी सफलता की उसी राह पर चल रहे हैं। उन्होंने करियर अकादमी से 12वीं की पढ़ाई पूरी की और JEE मेन में 96.9 परसेंटाइल स्कोर कर वीआईटी चेन्नई में सिविल इंजीनियरिंग में दाखिला प्राप्त किया। पढ़ाई पूरी होते ही वे एक प्रतिष्ठित कंपनी में इंजीनियरिंग टीम लीडर के पद पर कार्यरत हैं और वर्तमान में गुजरात में सेवाएं दे रहे हैं।

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माता-पिता की भूमिका रही निर्णायक

इस सफलता की नींव उस मजबूत धैर्य और समर्पण में है, जो इनके माता-पिता ने अपने बेटों के लिए दिखाया। पिता वीरेंद्र सिंह राणा, जो पशुपालन विभाग में फार्मासिस्ट के पद पर कार्यरत हैं, खुद भी पशुओं की जटिल सर्जरी में विशेषज्ञता के लिए चर्चा में रहे हैं। मां सुनीता राणा ने भी हर मोड़ पर अपने बेटों का हौसला बढ़ाया और उन्हें हर तरह से संबल प्रदान किया।

प्रेरणा बना यह परिवार

आज आशीष और अवनीश की सफलता हिमाचल के हजारों युवाओं को यह संदेश दे रही है कि अगर संकल्प मजबूत हो, तो पर्वतीय क्षेत्र की सीमाएं भी युवा प्रतिभाओं को रोक नहीं सकतीं। यह परिवार न केवल शिक्षा के महत्व को दर्शाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि संघर्ष से निकली सफलता सिर्फ मुकाम नहीं, मिसाल बन जाती है।

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