चंबा। हिमाचल प्रदेश के लिए एक गर्व की खबर सामने आई है। जिला चंबा के रहने वाले केवल की NIMAS टीम ने लद्दाख में 6,000 मीटर से ज्यादा ऊंची 20 चोटियों पर चढ़ाई कर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। खास बात यह है कि इन चोटियों पर पहले किसी के चढ़ने का रिकॉर्ड नहीं था। टीम ने 23 दिनों में यह अभियान पूरा किया। इस काम के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने टीम से मुलाकात की और सभी पर्वतारोहियों की जमकर तारीफ की।
कई मुश्किल चोटियों पर फहरा चुके हैं तिरंगा
बता दें कि, केवल अब तक माऊंट नन, माऊंट कुन और माऊंट कामेट जैसी कठिन चोटियों पर सफल चढ़ाई कर चुके हैं। साल 2025 में उन्होंने दुनिया की तीसरी सबसे ऊंची चोटी कंचनजंगा का भी सफलतापूर्वक आरोहण किया। इन अभियानों के दौरान उन्हें कई तरह की मुश्किल परिस्थितियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी।
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23 दिन में 20 अछूती चोटियों पहुंची टीम
हाल ही में NIMAS की ओर से लद्दाख में एक विशेष अभियान चलाया गया। इस अभियान में केवल ने अपनी टीम के साथ सिर्फ 23 दिनों में 6,000 मीटर से ज्यादा ऊंचाई वाली 20 ऐसी चोटियों पर चढ़ाई की, जिन पर पहले कोई सफलतापूर्वक नहीं चढ़ा था। इस उपलब्धि ने उनके पर्वतारोहण करियर में एक और बड़ी उपलब्धि जोड़ दी।
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केवल का कहना है कि पर्वतारोहण सिर्फ पहाड़ की चोटी तक पहुंचने का नाम नहीं है। इसमें साहस, अनुशासन, धैर्य और देश के प्रति समर्पण की भी परीक्षा होती है। पहाड़ों की कठिन परिस्थितियां इंसान को मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत बनाती हैं।
1,640 किलोमीटर का रहा लंबा स्की अभियान
केवल के करियर में 1,640 किलोमीटर लंबा स्की अभियान भी बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। यह अभियान काराकोरम से शुरू होकर लिपुलेख पास तक चला। इस दौरान उन्होंने अपनी टीम के साथ बेहद कठिन और बर्फ से ढके इलाकों को पार किया।
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अभियान के दौरान टीम ने 6,000 मीटर की श्रेणी वाले तीन पर्वतों पर चढ़ाई की। इसके साथ ही 25 हाई एल्टीच्यूड दर्रों को भी सफलतापूर्वक पार किया गया। यह अभियान केवल के लिए शारीरिक ताकत के साथ-साथ धैर्य और टीमवर्क की भी बड़ी परीक्षा रहा।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से सम्मान मिलना बना खास पल
अपनी इन उपलब्धियों के बाद केवल को देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मिलने और उनसे व्यक्तिगत रूप से सम्मान पाने का मौका भी मिला। केवल के लिए यह उनके जीवन के सबसे खास और गौरवपूर्ण पलों में से एक रहा।
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केवल अपनी सफलता का श्रेय अपनी पूरी टीम, वरिष्ठ अधिकारियों, प्रशिक्षकों और साथियों को देते हैं। उनका कहना है कि टीम के सहयोग के बिना इतने मुश्किल अभियानों को पूरा करना संभव नहीं था।
तिरंगे को दुनिया की ऊंचाइयों तक पहुंचाना है लक्ष्य
केवल के लिए पर्वतारोहण सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि देश के तिरंगे को दुनिया की ऊंचाइयों तक पहुंचाने का जुनून है। अपनी मेहनत और लगातार प्रयासों से वह चुराह के साथ-साथ पूरे हिमाचल का नाम देशभर में रोशन कर रहे हैं।
