चंबा। हिमाचल प्रदेश के चंबा जिला में हुए दर्दनाक बस हादसे में सात लोगों की असमय मौत हो गई, जबकि 11 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। इस भीषण त्रासदी ने कई परिवारों को जीवन भर का गम दिया है, लेकिन सबसे दर्दनाक दृश्य पंडित जवाहरलाल नेहरू राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल चंबा में देखने को मिला। हादसे में घायल मासूम बेटियों ने जब अस्पताल के वार्ड में आंख खोली तो डॉक्टरों व मेडिकल स्टाफ से एक ही सवाल पूछा— डॉक्टर अंकल हमारी मम्मी कहां हैं?" इस मासूम सवाल के आगे अस्पताल में डॉक्टर ही नहीं बल्कि वहां मौजूद हर इंसान पूरी तरह निशब्द हो गए।
बता दें कि आज शनिवार सुबह चंबा जिला के चुराह क्षेत्र में हुए इस दर्दनाक हादसे में सात लोगों की मौत और 11 लोग घायल हुए हैं। मृतकों में इन चार बच्चियों की मां नीलिमा भी शामिल हैं। हादसे में बच्चियों को चोटें आईं, लेकिन उनकी जिंदगी बच गई। अब अस्पताल के बिस्तर पर उनका इलाज तो चल रहा है, मगर उनकी जिंदगी से मां का साया हमेशा के लिए उठ चुका है।
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मां के साथ ननिहाल जा रही थी चारों बहनें
शनिवार सुबह चुराह के देवीकोठी क्षेत्र से लोग निजी बस में सवार होकर अपने-अपने गंतव्य की ओर निकले थे। चारों बहनें भी अपनी मां नीलिमा के साथ नानी के घर जाने के लिए बस में बैठी थीं। मासूम बच्चियों के मन में ननिहाल पहुंचने की खुशी रही होगी। उन्हें क्या पता था कि यह सफर उनकी जिंदगी का सबसे दर्दनाक सफर बन जाएगा। बैरागढ़ से चंबा की ओर जा रही बस कुछ ही दूरी तय कर पाई थी कि चालुंज मोड़ के पास अचानक अनियंत्रित होकर सड़क से नीचे जा गिरी। बस पलटती हुई नीचे दूसरी सड़क पर जा पहुंची। देखते ही देखते बस के भीतर चीख-पुकार मच गई।
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एक झटके में उजड़ गया मां-बेटियों का संसार
हादसा इतना भयानक था कि बस में सवार कई लोग अंदर ही फंस गए। आसपास के ग्रामीणों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर बचाव कार्य शुरू किया। पुलिस और प्रशासन की टीमें भी घटनास्थल पर पहुंचीं। बस की हालत देखकर बचाव दल के सामने बड़ी चुनौती थी। अंदर फंसे लोगों को निकालने के लिए मशीनों की मदद लेनी पड़ी। लोहे को काटकर और बस को हटाकर घायलों तथा मृतकों को बाहर निकाला गया। इसी हादसे में नीलिमा की जान चली गई, जबकि उनकी चारों बेटियां घायल अवस्था में बचा ली गईं।
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अस्पताल में होश आते ही मां को ढूंढने लगी बेटियां
हादसे के बाद घायल बच्चियों को चंबा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल लाया गया। उपचार के बाद जब उन्हें होश आया तो चारों बहनों की निगाहें अपनी मां को तलाशने लगीं। अस्पताल में मौजूद डॉक्टरों, नर्सों और लोगों से वे बार-बार पूछती रहीं— “हमारी मम्मी कहां हैं?” उनकी मासूम आवाज सुनकर अस्पताल में मौजूद लोगों का दिल भर आया। डॉक्टर उनका इलाज कर रहे थे, उन्हें संभाल रहे थे, लेकिन मां के बारे में पूछे गए उस सवाल का जवाब देना किसी के लिए आसान नहीं था।
बेटियों के सिर से छिन गया मां का सहारा
चारों बच्चियां अपनी मां के साथ बस में सवार हुई थीं। हादसे के बाद बेटियां अस्पताल पहुंच गईं, लेकिन मां का शव शवगृह में पहुंच चुका था। यह दृश्य किसी भी संवेदनशील इंसान को झकझोर देने वाला है—एक तरफ अस्पताल के बिस्तर पर घायल मासूम बेटियां अपनी मां का इंतजार कर रही हैं और दूसरी तरफ उनकी मां हमेशा के लिए उनसे दूर जा चुकी हैं। बच्चियों को अभी शायद यह पूरी तरह एहसास भी नहीं है कि जिस मां को वे अस्पताल के गलियारों में तलाश रही हैं, वह अब उन्हें गोद में उठाने के लिए कभी नहीं आएगी।
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पिता दूर पांगी में, बेटियों का सिर से उठा मां का साया
जानकारी के अनुसार बच्चियों के पिता चंबा के दुर्गम पांगी क्षेत्र में मजदूरी करते हैं। हादसे की सूचना उन्हें दे दी गई है। परिवार के लिए यह खबर किसी पहाड़ टूटने से कम नहीं है। चार मासूम बेटियों के सिर से अचानक मां का साया उठ गया है। जिन बच्चों को मां के आंचल में सुरक्षा मिलती थी, वे अब अस्पताल में अपनी मां की तलाश कर रही हैं।
सात मौतों और 11 घायलों ने पूरे चंबा को हिला दिया
चालुंज मोड़ के पास हुए इस हादसे में कुल सात लोगों की मौत हुई, जबकि 11 यात्री घायल हुए हैं। हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। स्थानीय लोगों ने राहत और बचाव कार्य में पुलिस-प्रशासन का सहयोग किया। गंभीर रूप से घायल यात्रियों को बेहतर उपचार के लिए चंबा मेडिकल कॉलेज भेजा गया, जबकि कुछ घायलों को आगे रेफर किया गया।
मृतकों की सूची
- जगदेव शर्मा (50) पुत्र धर्म सिंह, निवासी गांव बहला, डाकघर देवीकोठी, तहसील चुराह।
- देस राज (35) पुत्र त्रिलोचन, निवासी गांव बहला, डाकघर देवीकोठी, तहसील चुराह।
- तेज सिंह (39) पुत्र प्यारे लाल, परिचालक, निवासी गांव सत्यास, डाकघर तरेला, तहसील चुराह।
- जगदेई (24) पुत्री हरि लाल, निवासी गांव बाहला, डाकघर देवीकोठी, तहसील चुराह।
- हरदेई (43) पत्नी जगदेव, निवासी गांव बाहला, डाकघर देवीकोठी, तहसील चुराह।
- नीलम (34) पत्नी मोती सिंह, निवासी डाकघर देवीकोठी, तहसील चुराह।
- रूप सिंह (35) पुत्र राधा राम, चालक, निवासी गांव चिल्ली, डाकघर थल्ली, तहसील चुराह।
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दो घायलों को टांडा किया गया रेफर
चंबा मेडिकल कॉलेज प्रशासन के अनुसार हादसे के बाद 11 घायल अस्पताल पहुंचे थे। चिकित्सकीय जांच के बाद दो घायलों की स्थिति गंभीर पाए जाने पर उन्हें टांडा मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। कुछ अन्य घायलों को सर्जरी की आवश्यकता बताई गई है, जबकि बच्चों की हालत उपचार के बाद स्थिर बताई गई।
चार बहनों की मासूमियत के सामने हर कोई निशब्द
चंबा बस हादसे ने कई परिवारों से उनके अपने छीन लिए, लेकिन चार बहनों की कहानी इस त्रासदी का सबसे मार्मिक चेहरा बनकर सामने आई है। वे अस्पताल में हैं, उनकी चोटों का इलाज डॉक्टर कर रहे हैं, लेकिन जिस दर्द का इलाज किसी अस्पताल में नहीं है, वह है मां के हमेशा के लिए चले जाने का दर्द। कल तक जो बच्चियां अपनी मां का हाथ पकड़कर ननिहाल जाने के सपने देख रही थीं, आज वही बच्चियां अस्पताल में मां को ढूंढ रही हैं।
