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August 6, 2026

हिमाचल : परिवार संग नयना देवी के मंदिर आया था पंजाबी, बंदर के डर से गिरा- थमीं सांसें

दर्शन करने आया था परिवार, देह लेकर लौटा घर

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बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश के विश्व प्रसिद्ध शक्तिपीठ श्री नयना देवी मंदिर में बुधवार शाम एक दुखद हादसे में पंजाब के जालंधर से दर्शन के लिए आए एक श्रद्धालु की जान चली गई। मंदिर परिसर में बंदर के अचानक सामने आने से बचने की कोशिश के दौरान उनका संतुलन बिगड़ गया और गिरने से उन्हें गंभीर चोटें आईं।

नैना देवी मंदिर में श्रद्धालु की मौत

अस्पताल ले जाने पर चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस घटना के बाद मंदिर परिसर में बंदरों की बढ़ती समस्या और श्रद्धालुओं की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर फिर चर्चा शुरू हो गई है।

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परिवार संग आया था श्रद्धालु

मृतक की पहचान विजय गुप्ता के रूप में हुई है- जो पंजाब के जालंधर का रहने वाला था। विजय गुप्ता कपड़े का कारोबार करता था। वह अपने परिवार के साथ धार्मिक यात्रा पर श्री नयना देवी मंदिर पहुंचा था। दर्शन के दौरान सब कुछ सामान्य था, लेकिन कुछ ही पलों में एक अप्रत्याशित घटना ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया।

बंदर से बचने के प्रयास में हुआ हादसा

जानकारी के अनुसार, मंदिर परिसर में एक बंदर अचानक उसकी ओर बढ़ा। उससे बचने के प्रयास में उसका संतुलन बिगड़ गया और वे गिर गया। गिरने के दौरान उसके सिर और चेहरे पर गंभीर चोटें आईं। आसपास मौजूद लोगों और परिजनों ने तुरंत उसे उठाया और उपचार के लिए घवांडल स्थित सिविल अस्पताल पहुंचाया, लेकिन चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।

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पुलिस ने शुरू की कानूनी प्रक्रिया

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस अस्पताल पहुंची और आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी करते हुए शव को अपने कब्जे में लिया। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंपा जाएगा। पुलिस मामले से जुड़े सभी तथ्यों का रिकॉर्ड तैयार कर रही है।

मंदिर परिसर में बंदरों की बढ़ती संख्या

इस हादसे के बाद मंदिर परिसर में बंदरों की बढ़ती संख्या को लेकर श्रद्धालुओं की चिंता एक बार फिर सामने आई है। बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं को अक्सर बंदरों की वजह से परेशानी का सामना करना पड़ता है।

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लोगों का सामान छीन लेते हैं बंदर

कई बार बंदर प्रसाद, बैग, मोबाइल फोन और अन्य सामान छीन लेते हैं। कुछ मामलों में वे लोगों की ओर आक्रामक तरीके से बढ़ते भी हैं, जिससे विशेषकर बुजुर्ग, महिलाएं और छोटे बच्चे असहज महसूस करते हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बंदरों की समस्या का स्थायी समाधान निकालना जरूरी है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

अस्पताल की सुविधाओं पर भी उठे सवाल

इस घटना ने घवांडल स्थित सिविल अस्पताल की आधारभूत सुविधाओं को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। उत्तर भारत के प्रमुख शक्तिपीठों में शामिल श्री नयना देवी मंदिर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं, लेकिन निकटतम सरकारी अस्पताल में अब भी शवगृह जैसी मूलभूत सुविधा उपलब्ध नहीं है।

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