शिमला। हिमाचल प्रदेश में मई की शुरुआत इस बार किसानों और बागवानों के लिए चिंता और उम्मीद दोनों साथ लेकर आई है। प्रदेश के कई हिस्सों में लगातार खराब मौसम और सामान्य से ज्यादा बारिश ने खेती-बाड़ी के कामकाज को प्रभावित करना शुरू कर दिया है।
पहले के ज्यादा हुई बारिश
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 1 से 6 मई के बीच 13.9 मिलीमीटर के सामान्य औसत के मुकाबले 17.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। यानी करीब 28 फीसदी अधिक वर्षा हुई है।
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कई जिलों में मौसम की मार
जिलावार स्थिति देखें तो बिलासपुर, सिरमौर, ऊना, सोलन और शिमला जैसे जिलों में 300 फीसदी के आसपास या उससे ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। इस असामान्य वर्षा ने खेतों में खड़ी फसलों और बागवानी कार्यों पर असर डालना शुरू कर दिया है।
किसानों-बागवानों को भारी नुकसान...
खासकर सब्जी उत्पादक किसानों को भारी नुकसान की आशंका है, क्योंकि ज्यादा नमी से फसलों में सड़न और रोग फैलने का खतरा बढ़ जाता है। बागवानों की बात करें तो इस समय सेब और अन्य फलदार पौधों पर फल सेट होने का दौर होता है।
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तेज बारिश-ओले, खतरे की घंटी
लगातार बारिश और बादलों के कारण धूप की कमी से परागण प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है, जिससे उत्पादन पर असर पड़ने की चिंता बढ़ गई है। इसके अलावा तेज बारिश के साथ ओलावृष्टि की आशंका भी बागवानों के लिए खतरे की घंटी बनी हुई है।
कई इलाकों में कम बारिश
हालांकि, ऊपरी क्षेत्रों जैसे चंबा, किन्नौर, कुल्लू और लाहौल-स्पीति में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है- जो वहां के किसानों के लिए राहत की बात हो सकती है। इन इलाकों में अभी खेतों की तैयारी और बुवाई का काम चल रहा है, जहां अत्यधिक बारिश परेशानी खड़ी कर सकती थी।
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कब साफ होगा मौसम?
राजधानी शिमला में फिलहाल मौसम सुहावना बना हुआ है। मगर किसानों और बागवानों की नजर आने वाले दिनों के पूर्वानुमान पर टिकी हुई है। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, 7 मई यानी कल हल्की बारिश हो सकती है। जबकि, 8 से 10 मई तक मौसम साफ रहने की संभावना है। यह समय किसानों के लिए खेतों में जरूरी काम निपटाने का मौका बन सकता है।
फसलों पर पड़ेगा असर
11 और 12 मई को फिर से बारिश की संभावना जताई गई है, जिससे बागवानों की चिंता एक बार फिर बढ़ सकती है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी की आशंका भी जताई गई है, जिसका असर फलों की फसल और नई पौध पर पड़ सकता है। ऐसे में विशेषज्ञ किसानों और बागवानों को सलाह दे रहे हैं कि वे मौसम के अनुसार अपनी खेती और बागवानी की योजना बनाकर नुकसान को कम करने की कोशिश करें।
