शिमला। हिमाचल प्रदेश में स्वाइन फ्लू ने अब चिंता बढ़ानी शुरू कर दी है। एक ही दिन में स्वाइन फ्लू से दो मरीजों की मौत होने से स्वास्थ्य विभाग भी सतर्क हो गया है। पहले मंडी जिले में 70 वर्षीय बुजुर्ग की मौत हुई और अब आईजीएमसी शिमला में उपचाराधीन बिलासपुर निवासी 64 वर्षीय व्यक्ति ने दम तोड़ दिया। प्रदेश में स्वाइन फ्लू के कुल मरीजों की संख्या अब 8 हो गई है।
स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रशासन ने लोगों से इन्फ्लुएंजा और स्वाइन फ्लू के लक्षणों को लेकर विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। हालांकि, आईजीएमसी में हुई मौत के मामले में अस्पताल प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मरीज पहले से ही फेफड़ों की गंभीर बीमारी और निमोनिया सहित कई स्वास्थ्य जटिलताओं से पीड़ित था। ऐसे में मौत को केवल स्वाइन फ्लू संक्रमण से जोड़कर नहीं देखा जा सकता।
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मंडी के बाद अब बिलासपुर के मरीज की मौत
आईजीएमसी शिमला में उपचार के दौरान जान गंवाने वाले मरीज की पहचान रामाशीष राम, निवासी साईं डोभा, डाकघर बिलासपुर सदर के रूप में हुई है। मरीज को गंभीर हालत में 13 अगस्त को अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक उपचार के दौरान 29 अगस्त को मरीज की स्वाइन फ्लू जांच पॉजिटिव आई। इसके बाद चिकित्सकों की निगरानी में उनका उपचार किया जा रहा था, लेकिन उनकी हालत में अपेक्षित सुधार नहीं हो सका। रविवार सुबह करीब 6:46 बजे उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई।
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पहले से गंभीर फेफड़ों की बीमारी से जूझ रहे थे
आईजीएमसी प्रशासन के अनुसार मृतक पहले से ही इंटरस्टिशियल लंग डिजीज और लोअर लोब निमोनिया जैसी गंभीर श्वसन संबंधी बीमारियों से पीड़ित थे। इसके अलावा भी उनके स्वास्थ्य से जुड़ी कई जटिलताएं थीं। ऐसे में चिकित्सकों के अनुसार मरीज की गंभीर पूर्ववर्ती बीमारियां भी उनकी स्थिति बिगड़ने का बड़ा कारण थीं। अस्पताल प्रशासन ने साफ किया है कि उनकी मौत को सिर्फ स्वाइन फ्लू संक्रमण के कारण हुई मौत के तौर पर देखना उचित नहीं होगा।
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मंडी में भी गई थी बुजुर्ग की जान
इससे पहले मंडी जिले में स्वाइन फ्लू से संक्रमित 70 वर्षीय महेंद्र की उपचार के दौरान मौत हुई थी। वह सुंदरनगर के डडयाल गांव के रहने वाले थे और पहले से कैंसर से पीड़ित थे। जानकारी के मुताबिक महेंद्र 11 अगस्त को कीमोथेरेपी के लिए चंडीगढ़ के एक निजी अस्पताल गए थे। कैंसर के उपचार के चलते उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता काफी कमजोर थी। इसी दौरान वह H1N1 संक्रमण की चपेट में आ गए और उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। उनका अंतिम संस्कार शुक्रवार को गांव में किया गया, जबकि स्वास्थ्य विभाग को शनिवार को स्वाइन फ्लू से मौत की सूचना मिली।
सूचना मिलते ही गांव पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम
मौत की जानकारी मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम डडयाल गांव पहुंची। टीम ने परिवार के सदस्यों की स्क्रीनिंग की और उन्हें संक्रमण से बचाव के लिए आवश्यक सावधानियां बरतने की जानकारी दी। मंडी में हुई मौत और इसके बाद आईजीएमसी शिमला में बिलासपुर निवासी मरीज की मौत ने प्रदेश में स्वाइन फ्लू को लेकर चिंता बढ़ा दी है। खासकर बुजुर्गों और पहले से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों को संक्रमण से बचाने को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरतने की जरूरत है।
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इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें
स्वाइन फ्लू और इन्फ्लुएंजा के दौरान तेज बुखार, खांसी, गले में खराश, कमजोरी और सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण सामने आ सकते हैं। सांस लेने में दिक्कत या लक्षण गंभीर होने पर बिना देरी किए चिकित्सकीय सलाह लेने की जरूरत है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार बुजुर्गों, फेफड़ों की बीमारी, कैंसर या अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने के कारण संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है।
