शिमला। हिमाचल प्रदेश में मानसून की रफ्तार फिलहाल धीमी पड़ गई है। पिछले एक सप्ताह के दौरान राज्य के अधिकांश हिस्सों में बारिश सामान्य से कम दर्ज की गई, जिससे कई इलाकों में मौसम अपेक्षाकृत शांत बना हुआ है। हालांकि कुछ जिलों में बादलों ने जमकर बारिश की और सामान्य से कहीं अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई।

हिमाचल में नहीं थम रही बारिश?

मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले कुछ दिन हल्की गतिविधियों के बाद 10 अगस्त से मानसून एक बार फिर सक्रिय हो सकता है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, बीते एक सप्ताह में प्रदेश में औसतन सामान्य से करीब 19 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई।

यह भी पढ़ें : सुधीर शर्मा की टिप्पणी पर सियासी बवंडर: सड़कों पर उतरे कांग्रेसी; बोले- मांफी मांगे विधायक- नहीं तो...

कहां हुई सबसे ज्यादा बारिश?

राज्य के 12 में से 9 जिलों में वर्षा सामान्य से कम रही, जबकि तीन जिलों में सामान्य से अधिक बारिश हुई। सबसे अधिक वर्षा सिरमौर जिले में दर्ज की गई, जहां सामान्य से 121 प्रतिशत अधिक बारिश रिकॉर्ड हुई। इसके विपरीत लाहौल-स्पीति में बारिश लगभग न के बराबर रही और यहां सामान्य से 94 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई।

कहीं तेज बारिश, कहीं सूखा

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून की यह असमान स्थिति पहाड़ी राज्यों में सामान्य मानी जाती है- जहां भौगोलिक परिस्थितियों के कारण एक ही समय में अलग-अलग क्षेत्रों में बारिश का पैटर्न बदल सकता है। कहीं तेज बारिश होती है तो कुछ स्थान लंबे समय तक सूखे जैसे हालात बने रहते हैं।

यह भी पढ़ें : मोदी सरकार का हिमाचल को बड़ा तोहफा: भारत-तिब्बत सीमा से जुड़े 180 किमी NH की बदलेगी तस्वीर

अगले सप्ताह भी सामान्य से कम बारिश के संकेत

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, अगले एक सप्ताह के दौरान भी हिमाचल प्रदेश के अधिकांश क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। हालांकि बीच-बीच में कुछ जिलों में स्थानीय स्तर पर तेज बारिश के दौर देखने को मिल सकते हैं। ऐसे में लोगों को मौसम के बदलते मिजाज पर नजर रखने की सलाह दी गई है।

आज दो जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

मौसम विभाग ने 7 अगस्त के लिए बिलासपुर और कांगड़ा जिले के कुछ इलाकों में भारी बारिश की संभावना जताते हुए यलो अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में तेज बारिश के साथ कुछ स्थानों पर जलभराव, फिसलन और छोटे नालों में जलस्तर बढ़ने जैसी स्थितियां बन सकती हैं। प्रदेश के अन्य जिलों के लिए फिलहाल कोई विशेष चेतावनी जारी नहीं की गई है।

यह भी पढ़ें : रंग लाई मंत्री विक्रमादित्य की मेहनत : केंद्र से PMGSY के बजट में बड़ा इजाफा- मिलेंगे 2247 करोड़

8 और 9 अगस्त को इन जिलों पर रहेगी नजर

मौसम विभाग के अनुसार, 8 और 9 अगस्त को कांगड़ा और सिरमौर जिलों में भी भारी बारिश की संभावना बनी हुई है। इसी वजह से इन दोनों दिनों के लिए भी यलो अलर्ट जारी किया गया है। प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और मौसम संबंधी ताजा जानकारी पर नजर बनाए रखने की सलाह दी है।

10 अगस्त से फिर सक्रिय हो सकता है मानसून

मौसम विभाग का अनुमान है कि 10 अगस्त से प्रदेश में मानसून दोबारा सक्रिय हो सकता है। इस दौरान राज्य के अधिकांश हिस्सों में अच्छी बारिश होने की संभावना जताई गई है। संभावित भारी वर्षा को देखते हुए कांगड़ा, कुल्लू, मंडी, शिमला, सोलन, सिरमौर और किन्नौर जिलों के लिए यलो अलर्ट जारी किया गया है।

यह भी पढ़ें : हिमाचल में सुधीर - होशियार के बाद अब विजिलेंस के राडार पर एक और भाजपा नेता, गरमाई सियासत

भूस्खलन और मलबे का खतरा

अगर यह पूर्वानुमान सही साबित होता है तो कई इलाकों में तेज बारिश के साथ भूस्खलन, सड़कों पर मलबा आने और पहाड़ी मार्गों पर आवाजाही प्रभावित होने जैसी स्थितियां भी बन सकती हैं। इसलिए यात्रियों और स्थानीय लोगों को मौसम की चेतावनियों का पालन करने की सलाह दी गई है।

12 अगस्त तक बना रह सकता है बारिश का दौर

मौसम विभाग का कहना है कि 10 अगस्त से शुरू होने वाली बारिश की गतिविधियां 12 अगस्त तक जारी रह सकती हैं। इस दौरान अलग-अलग जिलों में हल्की से मध्यम तथा कुछ स्थानों पर भारी बारिश दर्ज होने की संभावना है। बारिश की तीव्रता हर जिले में एक जैसी नहीं रहेगी, लेकिन मौसम लगातार बदलता रहेगा।

यह भी पढ़ें : हिमाचल में यहां धंसने लगा पूरा पहाड़, 150 से अधिक घरों में आई दरारें, डर के साये में ग्रामीण

बारिश के बाद तापमान में आई राहत

बीते 24 घंटे के दौरान प्रदेश के कई हिस्सों में हुई बारिश का असर तापमान पर भी देखने को मिला। दिन के तापमान में गिरावट दर्ज की गई, जिससे लोगों को उमस और गर्मी से कुछ राहत मिली। ऊंचाई वाले इलाकों के साथ-साथ मैदानी क्षेत्रों में भी मौसम पहले की तुलना में अधिक सुहावना हो गया है।

 

मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में यदि बारिश का क्रम बना रहता है तो तापमान में और गिरावट आ सकती है। वहीं किसानों के लिए भी यह बारिश फसलों की स्थिति के अनुसार लाभ और चुनौती दोनों लेकर आ सकती है। इसलिए कृषि कार्यों की योजना स्थानीय मौसम पूर्वानुमान को ध्यान में रखकर बनाने की सलाह दी गई है।

नोट : ऐसी ही तेज़, सटीक और ज़मीनी खबरों से जुड़े रहने के लिए इस लिंक पर क्लिक कर हमारे फेसबुक पेज को फॉलो करें