शिमला। साल 2026 का आधे से ज्यादा सफर पूरा हो चुका है, लेकिन महंगाई से राहत की उम्मीद लगाए बैठे आम लोगों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। हिमाचल प्रदेश में भी जनता पर एक के बाद एक महंगाई के झटके पड़ रहे हैं। पहले ईरान-इजरायल तनाव और होर्मुज क्षेत्र में बढ़ी भू-राजनीतिक हलचल के बीच एलपीजी के दामों में उछाल आया, फिर पेट्रोल और डीजल की कीमतों ने घरेलू बजट पर दबाव बढ़ाया। सोने-चांदी की ऊंची कीमतों ने पहले ही आम परिवारों के लिए त्योहारों की खरीदारी मुश्किल कर दी है और अब रसोई में रोज इस्तेमाल होने वाली चीनी और प्याज के दाम बढ़ने से महंगाई का असर सीधे खाने की थाली तक पहुंच गया है।
त्योहारों से पहले जनता पर फूटा महंगाई का बम
त्योहारों का सीजन शुरू होने से पहले चीनी की बढ़ती कीमतों ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है। कुछ समय पहले तक करीब 47 से 48 रुपये किलो मिलने वाली चीनी अब कई परचून दुकानों में 65 से 70 रुपये किलो तक पहुंच गई है। यानी कुछ ही दिनों में कीमत में करीब 18 से 20 रुपये प्रति किलो तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। चीनी के दाम बढ़ने का असर केवल चाय की प्याली तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि त्योहारों के दौरान बनने वाली मिठाइयों, हलवे, खीर, बेकरी उत्पादों और घर में तैयार होने वाले विभिन्न पकवानों की लागत भी बढ़ सकती है।
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क्या है चीनी के दाम बढ़ने के कारण
चीनी की कीमतों में तेजी के पीछे कम उत्पादन, मौसम से जुड़ी परिस्थितियों और बाजार में मांग बढ़ने को प्रमुख वजह माना जा रहा है। वहीं इथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने के इस्तेमाल को भी चीनी की उपलब्धता से जोड़कर चर्चा हो रही है, हालांकि सरकार इस वजह को पूरी तरह जिम्मेदार मानने से इनकार कर रही है।
चीनी के बाद प्याज भी लगा रूलाने
चीनी के बाद प्याज ने भी रसोई का जायका बिगाड़ना शुरू कर दिया है। कुछ ही दिनों में प्याज के दाम करीब 30 रुपये किलो से बढ़कर 60 रुपये किलो के आसपास पहुंचने से उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ गई है। प्याज भारतीय रसोई की ऐसी जरूरी सब्जी है जिसका इस्तेमाल रोजाना होने वाले अधिकांश भोजन में होता है। इसलिए इसके दाम में तेजी का असर सीधे परिवारों के खाने के बजट पर पड़ता है।
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क्या कहती है केंद्र की मोदी सरकार
बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण के लिए केंद्र सरकार की ओर से चीनी की उपलब्धता बढ़ाने और जमाखोरी पर अंकुश लगाने के प्रयास किए जा रहे हैं। बाजार में आपूर्ति बढ़ाने के लिए 31 अक्टूबर तक ड्यूटी फ्री 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी के आयात को मंजूरी दी गई है। इसके साथ ही जमाखोरी रोकने के लिए चीनी के स्टॉक पर सीमा तय की जा रही है, जिसके तहत 1 सितंबर से कारोबारी निर्धारित सीमा से अधिक स्टॉक नहीं रख सकेंगे। प्याज की कीमतों पर लगाम लगाने के लिए भी सरकार बफर स्टॉक का इस्तेमाल करने की तैयारी कर सकती है।
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चाय मिठाई से घर की थाली तक पड़ा असर
कुल मिलाकर वर्ष के शुरुआती महीनों से ही महंगाई के अलग-अलग मोर्चों पर दबाव झेल रही हिमाचल की जनता के लिए त्योहारों से पहले चीनी और प्याज की बढ़ती कीमतें नई चिंता बनकर सामने आई हैं। आमदनी में खास बढ़ोतरी के बिना जरूरी वस्तुओं के लगातार महंगा होने से परिवारों को अपने खर्चों में कटौती और बजट में बदलाव करना पड़ रहा है। यदि समय रहते चीनी और प्याज के दाम काबू में नहीं आए तो त्योहारों के दौरान चाय से लेकर मिठाई और रसोई से लेकर रोजमर्रा की थाली तक, महंगाई का असर हिमाचल के आम परिवारों की जेब पर और साफ दिखाई दे सकता है।
