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August 21, 2026
हिमाचल में अगले 48 घंटे बारिश- फिर लगातार 5 दिन साफ रहेगा मौसम, पहाड़ों पर खिलेगी धूप
इस मानसून सीजन बारिश कम हुई, संपत्ति को 1108 करोड़ का नुकसान
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में मानसून का असर अगले 48 घंटे तक बना रहने की संभावना है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार शुक्रवार और शनिवार को प्रदेश के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है, जबकि कुछ जिलों में तेज बारिश की भी चेतावनी जारी की गई है।
इसके बाद प्रदेश में मानसून की गतिविधियां कमजोर पड़ सकती हैं और 23 अगस्त से 27 अगस्त तक मौसम के अपेक्षाकृत साफ रहने का अनुमान है। मौसम विभाग ने 21 अगस्त को कांगड़ा जिले के लिए तेज बारिश का यलो अलर्ट जारी किया है।
इसके अलावा कुल्लू, मंडी, शिमला और सोलन जिलों के कुछ क्षेत्रों में भी तेज बारिश होने की संभावना जताई गई है। हालांकि प्रदेश के अन्य जिलों के लिए फिलहाल किसी तरह का विशेष मौसम अलर्ट जारी नहीं किया गया है।
मानसून के सक्रिय रहने के चलते कांगड़ा जिले में तेज बारिश को लेकर यलो अलर्ट जारी किया गया है। पहाड़ी इलाकों में लगातार या तेज बारिश होने की स्थिति में भूस्खलन, सड़क बाधित होने और नालों-खड्डों में जलस्तर बढ़ने का खतरा बना रह सकता है।
कुल्लू, मंडी, शिमला और सोलन जिलों में भी कुछ स्थानों पर तेज बारिश की संभावना है। ऐसे में लोगों को नदी-नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों के आसपास सतर्क रहने की जरूरत है। खासकर पहाड़ी सड़कों पर यात्रा करने वाले लोगों को मौसम की स्थिति को देखते हुए सावधानी बरतनी होगी।
मौसम विभाग के अनुसार अगले दो दिन बारिश की गतिविधियां बनी रहने के बाद प्रदेश में मानसून कमजोर पड़ने की संभावना है। 23 अगस्त से 27 अगस्त तक हिमाचल प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मौसम साफ रहने का पूर्वानुमान जताया गया है।
अगर मौसम विभाग का अनुमान सही रहता है तो लगातार बारिश से प्रभावित क्षेत्रों को राहत मिल सकती है। बारिश कम होने से बंद सड़कों को बहाल करने, मलबा हटाने और अन्य राहत व पुनर्निर्माण कार्यों में भी तेजी आने की उम्मीद है।
हिमाचल प्रदेश में इस मानसून सीजन के दौरान अब तक सामान्य से 7 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। यानी प्रदेश में कुल बारिश सामान्य औसत से कम रही है, लेकिन इसके बावजूद कई स्थानों पर कम समय में हुई तेज बारिश ने भारी नुकसान पहुंचाया है।
यही कारण है कि प्रदेश में कुल मानसूनी बारिश सामान्य से कम होने के बावजूद आपदा से जुड़ी घटनाओं और सरकारी व निजी संपत्ति को हुए नुकसान का आंकड़ा काफी बड़ा है। कई क्षेत्रों में तेज बारिश, भूस्खलन और अन्य प्राकृतिक घटनाओं के कारण जनजीवन प्रभावित हुआ है।
इस मानसून सीजन में अब तक हिमाचल प्रदेश में सरकारी और निजी संपत्ति को करीब **1,108 करोड़ रुपए का नुकसान** हुआ है। सबसे अधिक नुकसान लोक निर्माण विभाग को हुआ है। सड़कों, पुलों और अन्य बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान के चलते अकेले **PWD को करीब 825 करोड़ रुपए का नुकसान** बताया गया है।
प्रदेश में बरसात के दौरान कई सड़कें भूस्खलन और मलबा आने से प्रभावित हुई हैं। कई स्थानों पर सड़कें क्षतिग्रस्त होने के कारण यातायात व्यवस्था भी बाधित हुई। लोक निर्माण विभाग को सड़कों की बहाली और क्षतिग्रस्त ढांचे की मरम्मत के लिए लगातार काम करना पड़ रहा है।
बारिश और मानसून से जुड़ी विभिन्न घटनाओं में अब तक प्रदेश में 219 लोगों की जान जा चुकी है। इनमें सबसे ज्यादा 131 मौतें सड़क हादसों में हुई हैं। पहाड़ी प्रदेश में बारिश के दौरान सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है, क्योंकि कई क्षेत्रों में भूस्खलन, मलबा और खराब सड़कों के कारण यातायात प्रभावित होता है।
इसके अलावा मानसून के दौरान भूस्खलन की घटनाओं में 17 लोगों की मौत हो चुकी है। भारी बारिश के बाद पहाड़ों से मलबा और पत्थर गिरने की घटनाएं कई इलाकों में खतरा पैदा करती रही हैं। वहीं फ्लैश फ्लड की घटना में एक व्यक्ति की जान गई है। पहाड़ी क्षेत्रों में अचानक आने वाली बाढ़ और नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ना लोगों के लिए खतरा बन सकता है।
हालांकि 23 अगस्त के बाद मौसम साफ होने की संभावना जताई गई है, लेकिन उससे पहले अगले 48 घंटे प्रदेश के कुछ इलाकों के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे। जिन जिलों में तेज बारिश की चेतावनी जारी की गई है, वहां स्थानीय लोगों और पर्यटकों को मौसम की स्थिति को ध्यान में रखते हुए सतर्क रहने की जरूरत होगी।
विशेषकर कांगड़ा, कुल्लू, मंडी, शिमला और सोलन के पहाड़ी तथा भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में बारिश के दौरान अतिरिक्त सावधानी जरूरी होगी। लगातार बारिश होने की स्थिति में सड़कें बाधित हो सकती हैं और नदी-नालों का जलस्तर भी बढ़ सकता है।