शिमला। हिमाचल प्रदेश में महिला पुलिस कांस्टेबलों की भर्ती अब कानूनी विवाद में घिर गई है। भर्ती प्रक्रिया के तहत मेरिट सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर एक महिला अभ्यर्थी ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। शिमला की प्रियंका शर्मा ने आरोप लगाया है कि अन्यों से अधिक अंक हासिल करने के बावजूद उन्हें चयन प्रक्रिया के अगले चरण में शामिल नहीं किया गया, जबकि उनसे कम अंक प्राप्त करने वाली अभ्यर्थियों को मेडिकल जांच और डोप टेस्ट के लिए बुला लिया गया। इस शिकायत ने भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और मेरिट के आधार पर चयन को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
महिला अभ्यर्थी ने हाईकोर्ट से की ये मांग
याचिकाकर्ता ने अदालत से भर्ती की संशोधित अतिरिक्त मेरिट सूची की वैधता की जांच करने और उनकी उम्मीदवारी पर दोबारा विचार करने के निर्देश देने की मांग की है। साथ ही, उन्होंने मामले का निपटारा होने तक आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) श्रेणी में महिला कांस्टेबल का एक पद रिक्त रखने का अनुरोध भी किया है। मामले की सुनवाई 13 अक्टूबर को होनी है। हालांकि, भर्ती प्रक्रिया में किसी गड़बड़ी की पुष्टि होना अभी बाकी है और इस संबंध में अदालत के फैसले के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
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63.50 अंक के बावजूद चयन प्रक्रिया से रखा बाहर
प्रियंका शर्मा के अनुसार, हिमाचल प्रदेश पुलिस विभाग ने 4 अक्टूबर 2024 को 380 महिला कांस्टेबलों की भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था। उन्होंने भर्ती में आवेदन किया और शारीरिक दक्षता परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद 15 जून 2025 को लिखित परीक्षा में भाग लिया। इसके बाद उन्हें दस्तावेजों की जांच के लिए भी बुलाया गया था।
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याचिका में कहा गया है कि लिखित परीक्षा के एक प्रश्न के सही उत्तर को लेकर विवाद के बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा था। इसके बाद मेरिट सूची में संशोधन किया गया। संशोधित सूची में प्रियंका शर्मा को 63.50 अंक मिले और संयुक्त मेरिट सूची में उनका स्थान 330वां रहा। हालांकि, EWS श्रेणी की कटऑफ 64 अंक होने के कारण उनका अंतिम चयन नहीं हो सका।
संशोधित अतिरिक्त मेरिट सूची ने बढ़ाया विवाद
याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि बाद में विभाग की ओर से अतिरिक्त मेरिट सूची जारी की गई, जिसके आधार पर उन्हें दस्तावेज सत्यापन के लिए बुलाया गया था। 3 जुलाई 2026 को जारी निर्देशों के अनुसार, उन्हें 6 जुलाई को आईजी, दक्षिणी रेंज, शिमला के कार्यालय में उपस्थित होना था। प्रियंका शर्मा का दावा है कि वह निर्धारित तारीख पर अपने सभी मूल दस्तावेज लेकर पहुंचीं, लेकिन दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया स्थगित कर दी गई।
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इसके बाद उन्हें न तो सत्यापन के लिए कोई नई तारीख दी गई और न ही आगे की प्रक्रिया के बारे में स्पष्ट जानकारी मिली। याचिका के मुताबिक, इस घटनाक्रम के बाद 17 जुलाई 2026 को संशोधित अतिरिक्त मेरिट सूची जारी की गई, लेकिन उसमें उनका नाम शामिल नहीं था। इसी के बाद उन्होंने चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कानूनी कार्रवाई का रास्ता अपनाया।
कम अंक पाने वाली अभ्यर्थियों को मौका देने पर आपत्ति
इस पूरे विवाद में सबसे अहम सवाल उन अभ्यर्थियों को लेकर उठाया गया है, जिन्हें प्रियंका शर्मा से कम अंक मिलने के बावजूद चयन प्रक्रिया के अगले चरण में बुलाए जाने का दावा किया गया है। याचिका के अनुसार, एक अभ्यर्थी को 63.25 अंक मिले थे, जबकि दो अन्य अभ्यर्थियों के अंक 62.75-62.75 थे। प्रियंका शर्मा का आरोप है कि इन अभ्यर्थियों को मेडिकल जांच और डोप टेस्ट के लिए बुलाया गया, जबकि 63.50 अंक हासिल करने के बावजूद उन्हें इस प्रक्रिया से बाहर रखा गया।
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याचिकाकर्ता ने इसी आधार पर मेरिट सूची तैयार करने और अभ्यर्थियों को अगले चरण में शामिल करने के मानदंडों पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि कम अंक पाने वाले उम्मीदवारों को आगे बढ़ने का अवसर दिया गया है, तो उनकी उम्मीदवारी पर भी नियमानुसार विचार किया जाना चाहिए। हालांकि, किन श्रेणियों, पात्रता मानदंडों और भर्ती नियमों के तहत संबंधित अभ्यर्थियों को बुलाया गया, इसका अंतिम निर्धारण आधिकारिक रिकॉर्ड और न्यायिक सुनवाई के आधार पर ही हो सकेगा।
अधिकारियों को शिकायत देने के बाद अदालत पहुंचीं अभ्यर्थी
प्रियंका शर्मा ने याचिका में बताया है कि उन्होंने 16 जुलाई 2026 को संबंधित अधिकारियों के समक्ष अभ्यावेदन देकर अपनी उम्मीदवारी पर दोबारा विचार करने की मांग की थी। उनका आरोप है कि इस शिकायत पर उन्हें संतोषजनक राहत नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने 19 जुलाई 2026 को हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
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याचिका में अधिकारियों की कार्रवाई को मनमाना और भेदभावपूर्ण बताते हुए भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि चयन में मेरिट और निर्धारित भर्ती नियमों का समान रूप से पालन होना चाहिए, ताकि किसी भी योग्य अभ्यर्थी के साथ अन्याय न हो।
EWS श्रेणी की एक सीट खाली रखने की मांग
हाईकोर्ट में दायर याचिका में प्रियंका शर्मा ने संशोधित अतिरिक्त मेरिट सूची की वैधता की जांच करने और उनकी उम्मीदवारी पर नियमों के अनुसार दोबारा विचार करने का अनुरोध किया है। उन्होंने यह भी मांग की है कि मामले का अंतिम फैसला आने तक EWS श्रेणी में महिला कांस्टेबल का एक पद रिक्त रखा जाए। याचिकाकर्ता की दलील है कि यदि सुनवाई पूरी होने से पहले संबंधित पद पर नियुक्ति कर दी जाती है, तो बाद में अदालत से राहत मिलने की स्थिति में उनके हित प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में वह चाहती हैं कि अदालत मामले के अंतिम निपटारे तक पद को सुरक्षित रखने पर विचार करे।
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13 अक्टूबर को होगी सुनवाई, फैसले पर टिकी नजरें
अब 13 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई में मामले से जुड़े तथ्यों और याचिकाकर्ता की मांगों पर आगे की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। फिलहाल, याचिका में लगाए गए आरोपों को अदालत की ओर से सही ठहराया जाना बाकी है। अंतिम तस्वीर न्यायिक कार्यवाही और संबंधित भर्ती रिकॉर्ड के आधार पर ही सामने आएगी।
