कांगड़ा/शिमला। हिमाचल प्रदेश में मजदूरों के अधिकारों और लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर आवाज एक बार फिर बुलंद हो गई है। भारतीय मजदूर संघ (BMS) ने सोमवार को प्रदेशभर में रैलियां निकालकर और धरना-प्रदर्शन कर केंद्र और प्रदेश सरकार के समक्ष श्रमिकों से जुड़े मुद्दे उठाए। कांगड़ा से लेकर शिमला तक मजदूरों ने अपनी मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। संगठन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम ज्ञापन भेजकर मजदूरों के न्यूनतम वेतन से लेकर पेंशन और सामाजिक सुरक्षा तक कई मांगें उठाई हैं।

30 हजार रुपये न्यूनतम वेतन की मांग

भारतीय मजदूर संघ ने केंद्र सरकार से मजदूरों के लिए न्यूनतम वेतन 30 हजार रुपये प्रतिमाह निर्धारित करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि महंगाई लगातार बढ़ रही है, ऐसे में मौजूदा आय में श्रमिकों के लिए परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल होता जा रहा है। मजदूर संघ ने सरकार से न्यूनतम वेतन को मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप बढ़ाने की मांग की है।

 

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कांगड़ा में रामलीला मैदान से एसडीएम कार्यालय तक रैली

कांगड़ा जिला के फतेहपुर में भारतीय मजदूर संघ के प्रदेश अध्यक्ष मदन राणा के नेतृत्व में बड़ी संख्या में श्रमिक रामलीला मैदान में एकत्रित हुए। यहां से मजदूरों ने रैली निकालकर एसडीएम कार्यालय तक मार्च किया। इस दौरान पूरा बाजार मजदूरों के नारों से गूंज उठा। प्रदर्शन के बाद एसडीएम रमण शर्मा के माध्यम से प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन भेजा गया।

ठेकेदारी और आउटसोर्स भर्ती खत्म करने की मांग

मजदूर संघ ने ठेकेदारी प्रथा को समाप्त करने और आउटसोर्स भर्ती पर रोक लगाने की मांग भी उठाई। संगठन का कहना है कि श्रमिकों को लंबे समय तक अस्थायी व्यवस्था में रखने के बजाय उन्हें रोजगार की सुरक्षा और उचित सेवा लाभ दिए जाने चाहिए। इसके साथ ही समान काम के लिए समान वेतन लागू करने की मांग भी ज्ञापन में शामिल की गई।

 

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EPS-95 के तहत 7,500 रुपये पेंशन की मांग

मजदूर संघ ने पेंशनरों से जुड़े मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया। संगठन ने EPS-95 के तहत न्यूनतम पेंशन 7,500 रुपये प्रतिमाह करने की मांग की। इसके अलावा पेंशनरों को महंगाई भत्ता और बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध करवाने की मांग भी सरकार के समक्ष रखी गई।

ESI की वेतन सीमा 42 हजार करने की मांग

भारतीय मजदूर संघ ने कर्मचारी राज्य बीमा योजना यानी ESI की वेतन सीमा को भी बढ़ाने की मांग की। संगठन के अनुसार मौजूदा 21 हजार रुपये की सीमा को बढ़ाकर 42 हजार रुपये किया जाना चाहिए, ताकि अधिक संख्या में श्रमिक इस सामाजिक सुरक्षा योजना के दायरे में आ सकें।

 

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PF, बोनस और ग्रेच्युटी को लेकर भी उठी आवाज

मजदूर संघ ने भविष्य निधि यानी PF और बोनस की सीमा बढ़ाने की मांग की। इसके अलावा ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा को बढ़ाकर 40 लाख रुपये करने की मांग भी रखी गई। संगठन का कहना है कि लंबे समय तक सेवाएं देने वाले कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद बेहतर आर्थिक सुरक्षा मिलनी चाहिए।

योजना कर्मियों को नियमित करने की मांग

आशा वर्कर, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, मिड-डे मील कर्मी और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन से जुड़े कर्मचारियों सहित विभिन्न योजना कर्मियों के मुद्दे भी प्रदर्शन में उठाए गए। भारतीय मजदूर संघ ने इन कर्मचारियों को नियमित करने के साथ सामाजिक सुरक्षा का लाभ देने की मांग की।

 

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शिमला में भी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन

मजदूरों की मांगों को लेकर राजधानी शिमला में भी भारतीय मजदूर संघ ने जोरदार प्रदर्शन किया। उपायुक्त कार्यालय के बाहर बीएमएस कार्यकर्ताओं ने धरना दिया और केंद्र तथा प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। संगठन ने स्पष्ट किया कि मजदूरों से जुड़े मुद्दों को लेकर आंदोलन को प्रदेश स्तर पर और तेज किया जाएगा।

केंद्र को 11 और प्रदेश सरकार को 24 सूत्रीय मांगपत्र

भारतीय मजदूर संघ ने केंद्र सरकार के समक्ष 11 सूत्रीय और हिमाचल प्रदेश सरकार के समक्ष 24 सूत्रीय मांगपत्र रखने की बात कही है। संगठन का कहना है कि श्रमिकों की समस्याओं को केवल आश्वासनों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि उन पर समयबद्ध तरीके से निर्णय लिया जाना चाहिए।

 

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मांगें नहीं मानीं तो आंदोलन तेज करने की चेतावनी

बीएमएस प्रदेश अध्यक्ष मदन राणा ने कहा कि यदि मजदूरों की मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो संगठन आंदोलन को और व्यापक करेगा। उन्होंने कहा कि मजदूरों के वेतन, पेंशन, रोजगार सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर संगठन लगातार संघर्ष करता रहेगा। प्रदेशभर में हुए इन प्रदर्शनों के जरिए भारतीय मजदूर संघ ने केंद्र की मोदी सरकार और प्रदेश सरकार तक श्रमिकों की आवाज पहुंचाने का प्रयास किया है। अब देखना होगा कि सरकार की ओर से मजदूर संघ की इन प्रमुख मांगों पर क्या रुख अपनाया जाता है।

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