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September 26, 2026
हिमाचल पर महंगाई की मार : 10 दिन में दूसरी बार बढ़े सीमेंट के दाम- जानें कितने रुपये
50 बैग खरीदने पर 500 रुपये ज्यादा
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बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश में घर बनाने या निर्माण कार्य करा रहे लोगों के लिए सीमेंट की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी हुई है। कंपनियों ने प्रति बैग करीब 5 रुपये और बढ़ा दिए हैं। खास बात यह है कि करीब 10 दिन के भीतर सीमेंट के दाम दूसरी बार बढ़े हैं। इससे पहले 15 सितंबर को भी प्रति बैग 5 रुपये की वृद्धि हुई थी। यानी इस अवधि में सीमेंट कुल मिलाकर करीब 10 रुपये प्रति बैग महंगा हो चुका है। लगातार बढ़ती कीमतों से निर्माण सामग्री का बजट प्रभावित होने लगा है।
सीमेंट कारोबार से जुड़े विक्रेताओं के मुताबिक कंपनियों की ओर से पहले 15 सितंबर को कीमतों में 5 रुपये की वृद्धि की गई थी। इसके बाद शुक्रवार को एक बार फिर प्रति बैग 5 रुपये की बढ़ोतरी कर दी गई।
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लगातार दो बार हुई इस वृद्धि का सीधा असर उन लोगों पर पड़ रहा है, जो मकान निर्माण, मरम्मत या अन्य निजी निर्माण कार्य करवा रहे हैं। निर्माण के दौरान सीमेंट की बड़ी मात्रा में जरूरत होती है, ऐसे में प्रति बैग छोटी बढ़ोतरी भी कुल खर्च को बढ़ा देती है।
नई बढ़ोतरी के बाद बाजार में अलग-अलग कंपनियों के सीमेंट की कीमतों में भी बदलाव देखने को मिला है।
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हालांकि वास्तविक बिक्री कीमत क्षेत्र, डीलर और अन्य स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार कुछ अलग हो सकती है।
सीमेंट की कीमत में 10 रुपये प्रति बैग की कुल बढ़ोतरी का असर मात्रा बढ़ने के साथ साफ दिखाई देता है। यदि कोई ग्राहक 10 दिन पहले की तुलना में अब 50 बैग खरीदता है, तो उसे करीब 500 रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़ेंगे।
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इसी तरह 100 बैग खरीदने पर अतिरिक्त भार करीब 1,000 रुपये तक पहुंच जाएगा। बड़े निर्माण कार्यों में यदि कई सौ बैग सीमेंट की जरूरत पड़े तो बढ़ी हुई कीमत के कारण कुल बजट पर और ज्यादा असर पड़ सकता है।
सीमेंट के अलावा निर्माण कार्य में सरिया, रेत, बजरी, ईंट और मजदूरी समेत कई दूसरे खर्च भी जुड़े होते हैं। ऐसे में किसी एक प्रमुख सामग्री के दाम बढ़ने से पूरे निर्माण बजट की गणना प्रभावित हो सकती है।
स्थानीय सीमेंट विक्रेताओं का कहना है कि कंपनियों की ओर से संशोधित कीमतें जारी होने के बाद बाजार में उसी के अनुसार बिक्री की जा रही है। लगातार हो रही बढ़ोतरी के बीच अब निर्माण कार्य कराने वाले उपभोक्ताओं को अपने बजट में अतिरिक्त राशि का प्रावधान करना पड़ सकता है।