शिमला। हिमाचल प्रदेश की जनता और कारोबारी अभी पेट्रोल-डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों और तेल के मोर्चे पर लगे झटकों से संभल भी नहीं पाए थे कि तेल विपणन कंपनियों ने महंगाई का एक और बड़ा और तगड़ा झटका दे दिया है। पिछले कुछ दिनों से लगातार एलपीजी के दामों में हो रही वृद्धि के सिलसिले को जारी रखते हुए सोमवार को एक बार फिर कमर्शियल गैस सिलेंडर के दामों में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

 

एक तरफ जहां देश में अंतरराष्ट्रीय कारणों से एलपीजी की भारी किल्लत देखी जा रही है, वहीं दूसरी तरफ लगातार इसके बढ़ते दाम अब आम दुकानदारों और पर्यटन कारोबारियों की पहुंच से पूरी तरह बाहर होते जा रहे हैं। ताजा बढ़ोतरी के बाद हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला सहित तमाम पर्यटन क्षेत्रों में हाहाकार मच गया है।

 

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3200 रुपये के पार पहुंचा सिलेंडर

राजधानी शिमला सहित प्रदेश के कई हिस्सों में कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत में करीब 50 रुपये की वृद्धि दर्ज की गई है। इसके बाद कमर्शियल सिलेंडर की कीमत 3200 रुपये के आंकड़े को पार कर गई है। शिमला में 19 किलो के कमर्शियल सिलेंडर की कीमत जून माह में बढ़कर लगभग 3225 रुपये तक पहुंच गई है। देशभर में आज पहली जून से 19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की नई कीमतें लागू हो गई है। 

 

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कारोबारियों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों के भीतर यह लगातार सातवीं बार है जब कमर्शियल सिलेंडर पर महंगाई का यह बम फूटा है, जिससे छोटे और बड़े कारोबारियों की कमर पूरी तरह टूट चुकी है। लगातार हुई बढ़ोतरी ने उनके संचालन खर्च को कई गुना बढ़ा दिया है।

एक तरफ किल्लत दूसरी तरफ महंगाई

इस संकट का सबसे डरावना पहलू यह है कि बाजार में पैसे देने के बावजूद गैस सिलेंडरों की भारी किल्लत चल रही है। हिमाचल के प्रमुख पर्यटन नगरों मनाली और डलहौजी में कमर्शियल गैस सिलेंडरों की सप्लाई लगभग ठप हो चुकी है। इन क्षेत्रों में होटल और रेस्टोरेंट मालिकों को सिलेंडर मिल ही नहीं रहे हैं। वहीं] राजधानी शिमला में भी बेहद मुश्किल और सिफारिशों के बाद ही सिलेंडर की आपूर्ति हो पा रही है। इस आपूर्ति संकट ने पर्यटन सीजन के चरम पर होटल उद्योग के सामने बहुत बड़ा संकट खड़ा कर दिया है।

 

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होटल और ढाबा मालिकों की टूटी कमर

गैस के दामों में इस नई बढ़ोतरी का सीधा और तीखा असर आम जनता की जेब पर पड़ने जा रहा है। शिमला के होटल, रेस्टोरेंट और ढाबा मालिकों का कहना है कि गैस सिलेंडर के दाम ₹3200 पार होने के बाद अब उनके पास अपने मैन्यू (खाद्य पदार्थों) के दाम बढ़ाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है।

 

बीते दिनों हुई बढ़ोतरी के बाद पहले ही खाने-पीने की चीजें महंगी की गई थीं, लेकिन अब चाय, नाश्ता और भोजन की थाली एक बार फिर महंगी होने जा रही है। स्थिति यह है कि कई छोटे ढाबा संचालक घाटे के कारण अपनी दुकानें बंद करने पर मजबूर हो गए हैं, जबकि होटल और रेस्टोरेंट मालिक बेहद मुश्किल से काम चला रहे हैं।

 

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दोबारा काम आए इलेक्ट्रिक चूल्हे

कुछ महीने पहले जब प्रदेश में एलपीजी का गंभीर संकट गहराया था और गैस मिलनी बंद हो गई थी, तब वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर अधिकांश ढाबा और होटल कारोबारियों ने भारी-भरकम पैसे खर्च कर 'इलेक्ट्रिक चूल्हों' और इंडक्शन का इंतजाम किया था। हालांकि, बाद में गैस सप्लाई कुछ सामान्य होने पर वापस गैस पर काम शुरू हुआ था, लेकिन अब सिलेंडर की किल्लत और ₹3215 की भारी कीमत के कारण कारोबारी फिर से बिजली के चूल्हों पर निर्भर होने लगे हैं। मगर, पहाड़ों में बिजली के अघोषित कटों ने इस विकल्प को भी मुश्किल बना दिया है।

कारोबारियों की मांग- राहत दे सरकार

होटल और रेस्टोरेंट संचालकों का कहना है कि पर्यटन आधारित राज्य होने के कारण हिमाचल में गैस की उपलब्धता और कीमत दोनों का सीधा असर कारोबार पर पड़ता है। उनका मानना है कि लगातार बढ़ रही कीमतों और आपूर्ति संबंधी चुनौतियों के बीच सरकार को राहत देने के उपायों पर विचार करना चाहिए।

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