धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश में भाजपा नेताओं और विधायकों से जुड़े मामलों में विजिलेंस की सक्रियता ने एक बार फिर राजनीतिक माहौल गरमा दिया है। कांग्रेस से भाजपा में आए धर्मशाला के विधायक सुधीर शर्मा के बाद अब देहरा के पूर्व विधायक और भाजपा में शामिल हो चुके होशियार सिंह से विजिलेंस ने पूछताछ की है। विधायक ऐच्छिक निधि के कथित दुरुपयोग और धोखाधड़ी से जुड़े मामले में विजिलेंस ने शुक्रवार को होशियार सिंह को धर्मशाला थाने बुलाया, जहां करीब तीन घंटे तक उनसे सवाल-जवाब किए गए।

होशियार सिंह से हुई इस पूछताछ के बाद कांगड़ा की राजनीति से लेकर प्रदेश स्तर तक चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। खास तौर पर इसलिए कि भाजपा में शामिल होने के बाद पूर्व विधायक होशियार सिंह लगातार राजनीतिक रूप से चर्चा में रहे हैं और अब विजिलेंस की जांच में उनका नाम सामने आने से इस घटनाक्रम को सियासी नजरिए से भी देखा जा रहा है।

सुधीर शर्मा के बाद होशियार सिंह पर विजिलेंस की नजर

हिमाचल की सियासत में विजिलेंस की कार्रवाई कोई नई बात नहीं है, लेकिन जब जांच की आंच सत्ता पक्ष से जुड़े नेताओं तक पहुंचती है तो राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज होना स्वाभाविक है। सुधीर शर्मा से जुड़े मामलों के बाद अब देहरा के पूर्व विधायक होशियार सिंह से पूछताछ ने प्रदेश की राजनीति में नया मुद्दा खड़ा कर दिया है।

 

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हालांकि, विजिलेंस की कार्रवाई को फिलहाल जांच प्रक्रिया के तौर पर ही देखा जा रहा है और होशियार सिंह पर लगे आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने तथा न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी। बावजूद इसके, तीन घंटे चली पूछताछ ने राजनीतिक गलियारों में हलचल जरूर बढ़ा दी है।

तीन घंटे तक चले सवाल-जवाब

विजिलेंस अधिकारियों ने होशियार सिंह से विधायक ऐच्छिक निधि से जुड़े कथित लेनदेन को लेकर पूछताछ की। जांच एजेंसी की ओर से उनके बयानों और उपलब्ध दस्तावेजों का मिलान किया जा रहा है। पूछताछ में कथित तौर पर बैंक खातों में रकम ट्रांसफर होने, लाभार्थियों और बाद में रकम वापस लिए जाने से जुड़े सवालों पर फोकस रहा। जांच एजेंसी अब यह समझने का प्रयास कर रही है कि सरकारी सहायता के तौर पर जारी धनराशि का वास्तविक इस्तेमाल किस उद्देश्य से हुआ और उससे जुड़े लेनदेन की पूरी कड़ी क्या रही।

 

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आठ लाख रुपये के कथित लेनदेन की जांच

विजिलेंस की जांच का आधार 16 जुलाई 2026 को दर्ज एफआईआर है। आरोपों के अनुसार वर्ष 2023 और 2024 के दौरान पूर्व विधायक से जुड़ी एक कंपनी के 16 कर्मचारियों के बैंक खातों में विधायक निधि से कथित तौर पर 50-50 हजार रुपये की राशि डाली गई। इस तरह करीब आठ लाख रुपये की रकम का लेनदेन सामने आया। जांच एजेंसी इस बात की पड़ताल कर रही है कि इन कर्मचारियों के खातों में राशि किस आधार पर पहुंची और बाद में इसे कथित तौर पर वापस लिए जाने की स्थिति कैसे बनी। विजिलेंस उपलब्ध बैंक रिकॉर्ड, दस्तावेजों और पूछताछ में सामने आए बयानों का क्रॉस-वेरिफिकेशन कर रही है।

 

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17 सितंबर को अदालत में अगली सुनवाई

इस मामले में होशियार सिंह को अदालत से 17 सितंबर तक अंतरिम जमानत मिली हुई है। अब इसी दिन मामले की अगली न्यायालयी सुनवाई होनी है। ऐसे में अदालत की अगली  कार्रवाई से पहले विजिलेंस की पूछताछ को जांच की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जांच एजेंसी की कोशिश है कि मामले से जुड़े दस्तावेजों और संबंधित लोगों के बयानों को आपस में मिलाकर घटनाक्रम की वास्तविक तस्वीर सामने लाई जा सके।

कांगड़ा एयरपोर्ट भूमि मामले में भी जांच का शिकंजा

विजिलेंस की सक्रियता केवल होशियार सिंह से जुड़े मामले तक सीमित नहीं है। कांगड़ा एयरपोर्ट के आसपास संदिग्ध भूमि खरीद के मामले में भी एसआईटी जांच कर रही है। इस मामले में भी संबंधित लोगों को पूछताछ और जांच के लिए बुलाया गया है। भूमि सौदों से जुड़े दस्तावेजों, लेनदेन और अन्य जानकारियों का सत्यापन किया जा रहा है। विजिलेंस यह जांचने में जुटी है कि रिकॉर्ड में दर्ज जानकारी और वास्तविक परिस्थितियों के बीच कोई अंतर तो नहीं है।

 

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कांगड़ा की राजनीति में बढ़ी हलचल

होशियार सिंह से विजिलेंस की तीन घंटे की पूछताछ ने कांगड़ा की राजनीति में चर्चाओं को और हवा दे दी है। देहरा से लेकर धर्मशाला तक राजनीतिक हलकों में अब इस मामले को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। एक तरफ होशियार सिंह का भाजपा में शामिल होना पहले ही देहरा की राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना गया था, वहीं दूसरी तरफ अब विजिलेंस की पूछताछ ने उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलों को जन्म दे दिया है।

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