शिमला। हिमाचल प्रदेश के तीन दिवसीय दौरे पर आए केंद्रीय अल्पसंख्यक और संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने आज शिमला पहुंचते मीडिया से बातचीत की। इस दौरान रिजिजू ने देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और आपातकाल के दौर पर विस्तार से बात की। उन्होंने 1975 में लगाए गए आपातकाल को भारत के संविधान और लोकतंत्र पर हमला करार दिया और कांग्रेस पार्टी पर तीखा हमला बोला।
मीडिया पर सबसे गहरा असर पड़ा था
बतौर रिपोर्टर्स, रिजिजू ने कहा कि जिस पार्टी ने देश पर आपातकाल थोप कर लोकतंत्र की हत्या की, आज उसी पार्टी के कुछ नेता संविधान की किताब लेकर जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं। कांग्रेस का नाम लिए बिना उन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछले 11 वर्षों में भारत में जितनी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है, उतनी दुनिया के किसी भी लोकतांत्रिक देश में नहीं है।
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रिजिजू ने कहा कि 25 जून 1975 की रात को जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आपातकाल लागू किया, तब सबसे ज्यादा चोट देश के मीडिया और बोलने की आजादी पर पड़ी। अखबारों की छपाई रोकी गई, पत्रकारों को जेलों में डाला गया और आवाज उठाने वाले हर व्यक्ति को दबाया गया। उन्होंने कहा कि इस काले अध्याय को देश कभी नहीं भूला सकता।
कैबिनेट प्रस्ताव की जानकारी दी
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हाल ही में एक कैबिनेट प्रस्ताव पारित किया गया है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि 1975 का आपातकाल लोकतंत्र की हत्या थी और इसे संविधान हत्या दिवस के रूप में याद किया जाएगा।
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रिजिजू ने कहा कि इस प्रस्ताव को देश के कोने-कोने तक पहुंचाना हम सबका नैतिक और राष्ट्रीय कर्तव्य है, ताकि आने वाली पीढ़ियां जान सकें कि देश पर एक समय ऐसा भी आया था, जब लोकतंत्र को कुचल दिया गया था।
लाहौल-स्पीति के लिए रवाना हुए
शिमला में पत्रकार वार्ता के बाद किरण रिजिजू लाहौल-स्पीति जिले के दौरे पर रवाना हुए, जहां वे शुक्रवार को कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। उनका यह दौरा केंद्र सरकार की विकास प्राथमिकताओं को ज़मीनी स्तर पर लागू करने के प्रयासों का हिस्सा है।
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अपने वक्तव्य में रिजिजू ने दो टूक कहा, “भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और इसे जिंदा रखना हर नागरिक का कर्तव्य है। हम इस बात के लिए प्रतिबद्ध हैं कि देश में फिर कभी ऐसा काला दिन न दोहराया जाए।”
