शिमला। हिमाचल प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों की सरगर्मियों के बीच सियासी माहौल तेजी से बदल रहा है। एक तरफ जहां प्रदेश में कांग्रेस और भाजपा के असंतुष्ट नेताओं ने हाथ मिलाकर 'थर्ड फ्रंट' (तीसरे मोर्चे) के गठन का बिगुल फूंक दिया है, वहीं दूसरी ओर इस संभावित खतरे को भांपते हुए भाजपा ने अपने किले को बचाने के लिए बड़ी रणनीति तैयार की है। पार्टी अब बागी नेताओं की घर वापसी का रास्ता खोलकर संगठन को एकजुट करने में जुट गई है, ताकि संभावित तीसरे मोर्चे की चुनौती को समय रहते रोका जा सके।

थर्ड फ्रंट का डर या 'डैमेज कंट्रोल' की मजबूरी?

दरअसल मंडी में दो दिन तक चली भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में पार्टी ने एक ऐतिहासिक यू-टर्न लेते हुए उन बागियों की 'घर वापसी' का रास्ता साफ कर दिया है, जिन्हें कभी अनुशासनहीनता के नाम पर बाहर का रास्ता दिखाया गया था। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि भाजपा का यह हृदय परिवर्तन अकारण नहीं है। हाल ही में भाजपा और कांग्रेस के कई कद्दावर लेकिन उपेक्षित नेताओं ने गोपनीय बैठकें कर एक नए राजनीतिक विकल्प की सुगड़बुगाहट तेज कर दी है।

 

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भाजपा को डर है कि यदि यह तीसरा मोर्चा अस्तित्व में आता है, तो आगामी विधानसभा चुनाव में यह पार्टी के पारंपरिक वोट बैंक में बड़ी सेंध लगा सकता है। इसी 'तीसरे विकल्प' की हवा निकालने के लिए भाजपा ने अब अपने रूठे हुए दिग्गजों को वापस गले लगाने की तैयारी की है।

बागियों की घर वापसी की तैयारी

पार्टी ने संकेत दिए हैं कि पिछले चुनावों में विद्रोह कर संगठन से दूर हुए नेताओं की वापसी पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। भाजपा नेतृत्व का मानना है कि चुनाव से पहले बिखरे हुए नेताओं को साथ लाना संगठन को नई ताकत देगा और विपक्षी समीकरणों को कमजोर करेगा।

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अनुशासन कमेटी बनाएगी लिस्ट

बैठक में एक अनुशासन कमेटी गठित करने का निर्णय लिया गया है, जो भविष्य में संगठन के भीतर अनुशासन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाएगी। यह कमेटी न केवल बागी नेताओं के मामलों की समीक्षा करेगी, बल्कि पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल नेताओं पर कार्रवाई की सिफारिश भी करेगी।

किसे मिलेगी वापसी, किस पर गिरेगी गाज

सूत्रों के अनुसार अनुशासन कमेटी यह तय करेगी कि किन नेताओं को पार्टी में दोबारा शामिल किया जा सकता है और किनके खिलाफ सख्त रुख अपनाया जाएगा। यानी एक तरफ जहां “घर वापसी” का रास्ता खुला है, वहीं दूसरी ओर अनुशासनहीनता पर सख्ती भी बरती जाएगी। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि आगामी चुनावों को देखते हुए चुनाव कमेटी के गठन का अधिकार प्रदेश अध्यक्ष को दिया जाएगा। इससे फैसले लेने की प्रक्रिया तेज होगी और संगठन जमीनी स्तर पर बेहतर तैयारी कर सकेगा।

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नाराज नेताओं को साधने की कोशिश

भाजपा ऐसे नेताओं को भी मनाने की रणनीति पर काम कर रही है, जो पार्टी से औपचारिक रूप से बाहर नहीं हैं, लेकिन नाराज होकर दूरी बनाए हुए हैं। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि इन नेताओं की वापसी से चुनावी समीकरण काफी हद तक बदल सकते हैं।

राजनीतिक समीकरण बदलने की तैयारी

हिमाचल की राजनीति में थर्ड फ्रंट की हलचल ने दोनों प्रमुख दलों की चिंता बढ़ा दी है। भाजपा ने इस चुनौती को भांपते हुए समय रहते कदम उठाया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी की यह रणनीति कितनी सफल होती है और क्या यह संभावित तीसरे मोर्चे के असर को कम कर पाएगी।

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