#राजनीति
March 30, 2026
सदन में 'सियासी हमसफर' आमने-सामने: विधायक पत्नी ने उठाया मुद्दा, CM पति ने तुरंत कर दी बड़ी घोषणा
सीएम ने मछुआरों को दो माह की आर्थिक सहायत देने की कही बात
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शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में आज एक ऐसा दुर्लभ और ऐतिहासिक पल देखने को मिला, जिसने सत्ता पक्ष, विपक्ष और दीर्घा में बैठे दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। देहरा से पहली बार विधायक चुनकर आईं कमलेश ठाकुर ने सदन में अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए अपने पति और प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से सवाल दागा। यह पहला मौका था जब सदन की कार्यवाही के दौरान मुख्यमंत्री और उनकी विधायक पत्नी सवाल-जवाब के औपचारिक रिश्ते में आमने-सामने नजर आए। इसने सदन की कार्यवाही को खासा रोचक बना दिया।
देहरा से पहली बार विधायक बनीं कमलेश ठाकुर ने अपनी विधानसभा के पौंग जलाशय से जुड़े हजारों मछुआरों की पीड़ा को सदन के पटल पर रखा। उन्होंने बेहद तल्ख और तार्किक ढंग से सवाल किया कि क्या सरकार पौंग जलाशय की मत्स्य सहकारी सभाओं के पंजीकृत मछुआरों को आजीविका के संकट से उबारने के लिए अतिरिक्त आर्थिक सहायता देगी? साथ ही उन्होंने मत्स्य अवतरण केंद्र के लिए भूमि और बजट आवंटन, गिलनेट और नावों को हो रहे नुकसान, बढ़ती गाद और घटते मत्स्य उत्पादन जैसे गंभीर मुद्दों पर भी विस्तृत जवाब मांगा।
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विधायक पत्नी के सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि सरकार मछुआरों की समस्याओं को लेकर गंभीर है और उनके हित में कई कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने घोषणा की कि प्रभावित मछुआरों को दो माह तक 3500 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। इसके अलावा नदियों में बढ़ती गाद की समस्या से निपटने के लिए मछली पकड़ने वाले क्षेत्रों की मैपिंग माइनिंग और वन विभाग के साथ मिलकर की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया कि नदियों में बढ़ती गाद और खनन गतिविधियों का असर मछली उत्पादन पर पड़ रहा है, जिससे मछुआरों की आय प्रभावित हो रही है। उन्होंने बताया कि गाद हटाने के लिए प्रयास जारी हैं और कोऑपरेटिव सोसायटी के गठन के सुझाव पर भी गंभीरता से विचार किया जाएगा।
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चर्चा के दौरान अन्य सदस्यों ने भी मछुआरों की समस्याओं को लेकर अपनी चिंता जाहिर की। भवानी सिंह पठानिया ने उपायुक्त को निर्देश देकर प्रभावित क्षेत्रों का मानचित्र तैयार करने की बात कही, जबकि जीत राम कटवाल ने कोऑपरेटिव सोसायटी के गठन का समर्थन किया। इंद्र सिंह गांधी ने अपने क्षेत्र में गाद और मरी हुई मछलियों का मुद्दा उठाते हुए सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग की।
विधानसभा में इसी दौरान प्रदेश की सड़कों की खराब हालत का मुद्दा भी जोर-शोर से उठा। विधायक रीना ने कई क्षेत्रों में सड़कों की जर्जर स्थिति को उजागर करते हुए कहा कि कुछ जगहों पर 20 किलोमीटर से अधिक सड़कें खराब पड़ी हैं, जिससे लोगों को भारी परेशानी हो रही है। खासकर उत्तराखंड को जोड़ने वाली सड़क की स्थिति को लेकर चिंता जताई गई।
सरकार की ओर से जवाब में बताया गया कि पांच प्रमुख सड़कों के प्रस्ताव केंद्र को भेजे गए हैं और इन्हें प्राथमिकता के आधार पर लिया जा रहा है। साथ ही इन सड़कों को सेंट्रल रोड फंड (CRF) में शामिल करने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि इनके सुधार के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध हो सके।
चर्चा में शामिल होते हुए सुखराम चौधरी ने भी कहा कि यह सड़क तीन विधानसभा क्षेत्रों को जोड़ती है और इसकी खराब हालत लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। उन्होंने जल्द सुधार कार्य शुरू करने की मांग उठाई।
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पूरे घटनाक्रम ने यह दिखाया कि लोकतंत्र में रिश्तों से ऊपर जिम्मेदारियां होती हैं। एक ओर विधायक कमलेश ठाकुर अपने क्षेत्र की आवाज बनकर सामने आईं, तो वहीं मुख्यमंत्री सुक्खू ने सरकार की ओर से जवाब देकर समाधान का भरोसा दिलाया। इस दौरान सदन में राजनीतिक और पारिवारिक समीकरणों का एक अनोखा संगम देखने को मिला, जिसने बजट सत्र की कार्यवाही को खास बना दिया।