चंडीगढ़/शिमला: हरियाणा की सियासत में राज्यसभा चुनाव की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे जोड़-तोड़ और क्रॉस वोटिंग की आशंकाओं ने जोर पकड़ लिया है। 16 मार्च को होने वाले मतदान से पहले कांग्रेस ने अपने कुनबे को बिखरने से बचाने के लिए 'ऑपरेशन शिमला' शुरू कर दिया है। ठीक उसी तर्ज पर, जैसे पिछले साल हिमाचल प्रदेश की एक राज्यसभा सीट पर भारी क्रॉस वोटिंग के कारण हिमाचल कांग्रेस को जीती हुई बाजी हारनी पड़ी थी] अब हरियाणा कांग्रेस भी उसी खौफ के साये में है।
हिमाचल की तर्ज पर 'अपनों' से डर
हरियाणा की दो राज्यसभा सीटों के लिए तीन उम्मीदवार मैदान में होने से मुकाबला बेहद रोमांचक और पेचीदा हो गया है। कांग्रेस को सबसे बड़ा डर भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल से लग रहा है। इतिहास गवाह है कि 2016 में 'पेन कांड' और 2022 में ' क्रॉस वोटिंग ' की वजह से पर्याप्त संख्या बल होने के बावजूद कांग्रेस को मुंह की खानी पड़ी थी। इसी पुराने 'खेले' की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए हाईकमान के निर्देश पर विधायकों को तत्काल प्रभाव से हिमाचल शिफ्ट कर दिया गया है।
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सुक्खू की 'निगरानी' में हरियाणा के विधायक
हरियाणा कांग्रेस के 31 विधायकों को दो टेंपो ट्रैवलर बसों में भरकर शिमला के निकट कुफरी ले जाया गया है। खास बात यह है कि ये सभी विधायक हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की सीधी देखरेख और मेहमाननवाजी में रहेंगे। मुख्यमंत्री सुक्खू खुद पिछले साल क्रॉस वोटिंग का दंश झेल चुके हैं, ऐसे में पार्टी ने उन्हें इन विधायकों की 'किलेबंदी' की जिम्मेदारी सौंपी है। वहां विधायकों को न केवल एकजुट रहने का पाठ पढ़ाया जा रहा है, बल्कि वोट डालने की बारीकियों का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।
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6 विधायकों की 'गैर-मौजूदगी' ने बढ़ाई धड़कनें
भले ही कांग्रेस एकजुटता का दावा कर रही हो, लेकिन 37 में से 6 विधायकों का हिमाचल न जाना चर्चा का विषय बना हुआ है।
- भूपेंद्र सिंह हुड्डा: केंद्रीय पर्यवेक्षक होने के नाते वे चंडीगढ़ में ही डटे हैं।
- विनेश फोगाट: पारिवारिक कारणों और छोटे बच्चे का हवाला देकर वे बैठक से निकल गईं।
- कुलदीप वत्स: घर में शादी और रिसेप्शन का कारण बताकर साथ नहीं गए।
- मोहम्मद इलियास: खराब स्वास्थ्य के चलते हिमाचल जाने में असमर्थता जताई।
- परमवीर सिंह और चंद्रमोहन: अपनी अलग वजहों से इस 'शिफ्टिंग' से दूर रहे।
- चंद्रमोहन बिश्नोई का बीच बैठक से निकलना और मीडिया से दूरी बनाना कांग्रेस के रणनीतिकारों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच रहा है।
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सियासी गणित और 72 घंटों का सस्पेंस
90 सदस्यीय विधानसभा में एक सीट जीतने के लिए 31 वोटों की जरूरत है। कांग्रेस के पास 37 विधायक हैं, जो आंकड़े के लिहाज से सुरक्षित हैं, लेकिन अतीत के अनुभव बताते हैं कि राज्यसभा चुनाव में 'आंकड़े' नहीं 'वफादारी' मायने रखती है। पूर्व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने भी चुटकी लेते हुए कहा है कि "अगले 72 घंटों में बड़ा खेला होना बाकी है।"
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16 मार्च को होना है हरियाणा राज्यसभा चुनाव
दरअसल हरियाणा में 16 मार्च को राज्यसभा की दो सीटों के लिए मतदान होना है। भाजपा ने जहां संजय भाटिया को उतारकर अपनी एक सीट पक्की कर ली है, वहीं निर्दलीय सतीश नांदल के जरिए कांग्रेस के कर्मवीर बौद्ध की राह में कांटे बिछा दिए हैं। अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री सुक्खू की 'पाठशाला' और हुड्डा की 'निगरानी' कांग्रेस के लिए कितनी कारगर साबित होती है या फिर हरियाणा में एक बार फिर 'कलम और क्रॉस वोटिंग' का कोई नया अध्याय लिखा जाएगा।
