शिमला। हिमाचल प्रदेश के सीएम सुक्खविंदर सिंह सुक्खू बीच बजट सत्र में 24 घंटे में 2 बार दिल्ली रवाना हुए हैं। बता दें कि सीएम सुक्खू पिछले कल ही दिल्ली से 1 बजे वापस हिमाचल पहुंचे थे और इसके बाद आज सुबह 10 बजे उन्हें दोबारा दिल्ली रवाना होना पड़ा, जहां उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की।
केंद्र से सहायता की गुहार
मुख्यमंत्री सुक्खू हिमाचल प्रदेश के लिए बाहरी वित्तीय सहायता जुटाने पर केंद्र सरकार का सहयोग चाहते हैं। सीएम सुक्खू ने केंद्र सरकार से विश्व बैंक और एडीबी जैसी वैश्विक संस्थाओं से बाह्य सहायता प्राप्त करने के लिए लगाई सीलिंग हटाने का आग्रह किया।
सीएम् सुक्खू ने साझा की जानकारी
उधर, सीएम सुक्खू ने अपने फेसबुक पेज पर जानकारी साझा करते हुए लिखा कि, "गृहमंत्री जी से वर्ष 2023 के मानसून के दौरान आई भीषण प्राकृतिक आपदा में प्रदेश को हुए भारी नुकसान के लिए मुआवजा जारी करने को लेकर चर्चा की। इसके अलावा, उन्हें अवगत कराया कि आपदा के कारण पेयजल, सिंचाई योजनाओं, अधोसंरचना, सड़कों और पुलों को गंभीर क्षति पहुंची थी। साथ ही, प्रदेश हित से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर भी चर्चा हुई। गृहमंत्री जी ने प्रदेश को हर संभव सहायता प्रदान करने का आश्वासन दिया।"
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गुरुवार को उन्होंने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात कर विश्व बैंक और एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) जैसी अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं से सहायता प्राप्त करने पर लगी सीमा (सीलिंग) को हटाने का अनुरोध किया था। गृह मंत्री से मुलाक़ात के बाद सीएम सुक्खू ने उम्मीद जताई है कि इससे प्रदेश में अधूरे विकास कार्यों को पूरा करने के लिए अतिरिक्त आर्थिक मदद मिल सकती है।
बजट रिप्लाई के लिए आना पड़ा था वापस
बता दें कि, सीएम सुक्खू वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात कर दूसरे दिन हिमाचल लौट आए थे। जिसका कारण बजट सत्र बताया जा रहा है। सीएम सुक्खू पिछले कल 1 बजे शिमला वापस पहुंचे, जहां उन्होंने बजट का रिप्लाई किया और फिर आज सुबह दोबारा दिल्ली के लिए रवाना हुए।
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मुख्यमंत्री के लगातार दिल्ली दौरे और केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात को लेकर राजनीतिक चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। इसे हिमाचल प्रदेश की आर्थिक स्थिति और केंद्र से संभावित वित्तीय राहत पैकेज से जोड़कर देखा जा रहा है।
बजट सत्र के बीच बढ़ी हलचल
बजट सत्र के दौरान मुख्यमंत्री का लगातार दिल्ली दौरा करना एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है। हालांकि, अभी तक सरकार की ओर से इन मुलाकातों को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। लेकिन सूत्रों का कहना है कि प्रदेश सरकार को आर्थिक संकट से उबारने के लिए केंद्र सरकार की मदद की जरूरत है।
बहरहाल, अब देखना होगा कि इन बैठकों के बाद हिमाचल प्रदेश को केंद्र से कितनी आर्थिक सहायता मिलती है और यह प्रदेश के बजट पर क्या असर डालती है।
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