शिमला। हिमाचल कांग्रेस को मंगलवार को बड़ा झटका लगा है। रामपुर विधानसभा क्षेत्र से लगातार चार बार विधायक चुने गए वरिष्ठ कांग्रेस नेता नंद लाल का 72 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने शिमला के चमियाना स्थित अटल सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में सुबह करीब साढ़े पांच बजे अंतिम सांस ली। उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शनों के लिए शिमला स्थित कांग्रेस जिला मुख्यालय में रखा गयाए जहां पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
नंद लाल को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार में सातवें राज्य वित्त आयोग का अध्यक्ष बनाया गया था। उनकी यह नियुक्ति उस समय की गई थीए जब वर्ष 2024 में राज्यसभा चुनाव के दौरान हिमाचल कांग्रेस में बगावत के सुर उठे थे और पार्टी के छह विधायकों ने क्रॉस वोटिंग कर सरकार के सामने राजनीतिक संकट खड़ा कर दिया था। उस सियासी उठापटक के बीच नंद लाल को वित्त आयोग की कमान सौंपना सरकार के भीतर राजनीतिक संतुलन साधने और संभावित असंतोष को थामने के कदम के तौर पर देखा गया था।
बगावत रोकने के लिए नंद लाल को सौंपी थी अहम जिम्मेदारी
वर्ष 2024 में हिमाचल प्रदेश की राजनीति में उस समय बड़ा घटनाक्रम हुआ, जब राज्यसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस के छह विधायकों ने क्रॉस वोटिंग कर पार्टी के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी थीं। इसके बाद प्रदेश में सरकार के भविष्य को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई थीं। कांग्रेस के भीतर संभावित असंतोष और विधायकों की नाराजगी को लेकर भी सवाल उठने लगे थे।
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इसी दौरान मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने वरिष्ठ विधायक नंद लाल को सातवें राज्य वित्त आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया। राजनीतिक हलकों में इस नियुक्ति को सरकार के भीतर संतुलन बनाए रखने और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदारी देने के कदम के तौर पर देखा गया। नंद लाल पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के करीबी माने जाते थे और उनकी नियुक्ति को कांग्रेस के भीतर अलग-अलग राजनीतिक धाराओं के बीच तालमेल बनाने से भी जोड़कर देखा गया।
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2024 में कांग्रेस के भीतर उठी थी बगावत
नंद लाल की पहचान हिमाचल कांग्रेस के उन नेताओं में होती थी, जिनका पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के साथ करीबी राजनीतिक संबंध रहा। वर्ष 2024 के राज्यसभा चुनाव के बाद कांग्रेस के भीतर पैदा हुए संकट के दौरान वीरभद्र सिंह से जुड़े नेताओं की भूमिका भी राजनीतिक चर्चा का विषय बनी थी। ऐसे समय में नंद लाल को राज्य वित्त आयोग की अध्यक्षता देना सरकार का एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक और राजनीतिक फैसला था। मार्च 2024 में उनकी नियुक्ति हुई और उन्होंने इस जिम्मेदारी को संभाला। उनके निधन के बाद अब 2024 के उस सियासी घटनाक्रम में उनकी भूमिका और उन्हें सौंपी गई जिम्मेदारी फिर चर्चा में है।
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2007 में विधायक बने, चार चुनाव जीतकर बनाई अलग पहचान
नंद लाल ने वर्ष 2007 में पहली बार रामपुर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। इसके बाद 2012, 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में भी उन्होंने लगातार विजय दर्ज की। इस तरह वह चार बार लगातार रामपुर से विधायक चुने गए। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने भाजपा के कौल सिंह नेगी को महज 567 मतों के अंतर से हराया था। उनकी लगातार चुनावी जीत ने रामपुर क्षेत्र में उनकी मजबूत राजनीतिक पकड़ को दर्शाया। वीरभद्र सिंह सरकार में वर्ष 2013 में उन्हें मुख्य संसदीय सचिव (CPS) की जिम्मेदारी भी दी गई थी।
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SPG में सेवाएं देने के बाद राजनीति में आए थे नंद लाल
राजनीति में आने से पहले नंद लाल का करियर देश की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ा रहा। उनका जन्म 16 अप्रैल 1954 को रामपुर बुशहर के देवठी गांव में हुआ था। उन्होंने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से वर्ष 1976 में राजनीति विज्ञान में एमए किया। इसके बाद उन्होंने भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) में सेवाएं शुरू कीं। करीब 22 वर्षों तक सुरक्षा बल में काम करने के बाद वर्ष 2007 में उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर राजनीति में प्रवेश किया। सुरक्षा सेवाओं के दौरान उन्हें विशेष सुरक्षा समूह (SPG) में भी करीब 12 वर्षों तक काम करने का अवसर मिला। इस दौरान वह पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और सोनिया गांधी की सुरक्षा से जुड़ी जिम्मेदारियां निभा चुके थे।
राजा वीरभद्र सिंह के संकटमोचक और सबसे करीबी
रामपुर बुशहर की राजनीति में विधायक नंद लाल का नाम उन गिने-चुने नेताओं में शामिल रहा, जिन्हें पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के दिग्गज नेता वीरभद्र सिंह का सबसे खास और करीबी माना जाता था। वीरभद्र सिंह के गृह क्षेत्र रामपुर में नंद लाल ने कांग्रेस संगठन को न सिर्फ संभाला, बल्कि राजा साहब के सबसे मजबूत सिपहसालार बनकर उभरे। साल 2007 में सरकारी नौकरी से वीआरएस (स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना) लेने के बाद वीरभद्र सिंह के आशीर्वाद से ही उन्होंने पहली बार रामपुर से चुनाव लड़ा था। वीरभद्र सरकार के दौरान वह साल 2013 से 2017 तक मुख्य सचिव के अहम पद पर भी रहे।
राजीव गांधी और चंद्रशेखर से मिले थे प्रशंसा पत्र
नंद लाल की सुरक्षा सेवाओं को तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर ने भी सराहा था। दोनों नेताओं की ओर से उन्हें प्रशंसा पत्र दिए गए थे। इसके अलावा सुरक्षा क्षेत्र में उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें राष्ट्रपति पुलिस पदक से भी सम्मानित किया गया था। ITBP में रहते हुए उन्होंने देश के विभिन्न संवेदनशील क्षेत्रों में जिम्मेदारियां निभाईं। सुरक्षा बलों से सेवानिवृत्ति के बाद कांग्रेस में शामिल होकर उन्होंने अपनी राजनीतिक पारी शुरू की और फिर लगातार चार चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे।
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पार्टी मुख्यालय से रामपुर भेजी देह
नंद लाल के निधन की खबर से कांग्रेस पार्टी और रामपुर क्षेत्र में शोक का माहौल है। उनकी पार्थिव देह को अंतिम दर्शन के लिए शिमला स्थित कांग्रेस मुख्यालय में रखा गया, जहां पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू चंबा से रामपुर पहुंचकर उनके अंतिम संस्कार में शामिल होंगे। बुधवार को उनके पैतृक गांव देवठी में अंतिम संस्कार किया जाएगा।
उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने उनके निधन को कांग्रेस पार्टी और रामपुर की जनता के लिए अपूरणीय क्षति बताया। उन्होंने नंद लाल को नेक, ईमानदार और सादगी पसंद व्यक्ति बताते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा जनता की समस्याओं को सुनने और उनके समाधान के लिए प्रयास किया। लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह और पूर्व सांसद प्रतिभा सिंह ने भी उनके निधन पर शोक व्यक्त किया।
