#राजनीति
October 31, 2026
हिमाचल भाजपा में चुनाव से पहले सियासी संग्राम, यहां टिकट दावेदारी पर दो गुटों में ठनी; बनेगी चुनौती
जयराम ने मंच से केएल ठाकुर का किया समर्थन, लखविंदर राणा ने जताई नाराजगी
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नालागढ़। हिमाचल प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को अभी करीब एक साल का समय बाकी है, लेकिन प्रदेश में राजनीतिक सरगर्मियां अभी से तेज हो गई हैं। विभिन्न सीटों पर संभावित दावेदारों ने अपनी-अपनी दावेदारी ठोकना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में सोमवार को सोलन जिला के नालागढ़ में भारतीय जनता पार्टी के भीतर का अंदरूनी घमासान पूरी तरह से सतह पर आ गया, जो आने वाले समय में भाजपा हाईकमान के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बन सकता है। नालागढ़ विधानसभा क्षेत्र में भाजपा दो गुटों में बंटी नजर आ रही है। दो अलग-अलग स्थानों पर आयोजित शक्ति प्रदर्शन के कार्यक्रमों ने पार्टी के भीतर जारी कलह पर मुहर लगा दी है।
नालागढ़ में एक ओर पूर्व विधायक और भाजपा नेता केएल ठाकुर ने पंचायती राज जनप्रतिनिधि सम्मान समारोह आयोजित कर अपनी राजनीतिक ताकत दिखाई, तो दूसरी ओर पूर्व विधायक लखविंदर राणा के समर्थन में जुटे कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ ने अलग सियासी संदेश दिया। दोनों नेताओं के अलग-अलग कार्यक्रमों और समर्थकों की सक्रियता को अब केवल संगठनात्मक गतिविधि नहीं, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनाव के टिकट की दावेदारी से जोड़कर देखा जा रहा है।
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राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि नालागढ़ भाजपा फिलहाल दो प्रमुख गुटों में बंटी हुई नजर आ रही है और अगर समय रहते पार्टी ने इस अंदरूनी खींचतान को नहीं संभाला तो आने वाले विधानसभा चुनाव में यह भाजपा हाईकमान के लिए बड़ा सिरदर्द बन सकती है।

ताजा घटनाक्रम नालागढ़ के अंदरोला में आयोजित पंचायती राज जनप्रतिनिधि सम्मान समारोह से शुरू हुआ। इस कार्यक्रम में नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे। मंच से जयराम ठाकुर ने आगामी चुनाव में प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने का दावा किया, लेकिन सबसे ध्यान खींचने वाली बात यह रही कि जयराम ठाकुर ने पूर्व विधायक व भाजपा नेता केएल ठाकुर की जमकर पैरवी की और उन्हें मजबूती देने की अपील करते हुए आगामी चुनाव में टिकट देने के स्पष्ट संकेत दिए।
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"प्रदेश की मौजूदा कांग्रेस सरकार जाने वाली है और प्रचंड बहुमत के साथ भाजपा की वापसी तय है। इसके लिए नालागढ़ की सीट जीतना बेहद जरूरी है। पूर्व भाजपा सरकार के दौरान केएल ठाकुर ने क्षेत्र में अभूतपूर्व विकास कार्य किए हैं, इसलिए जनता का समर्थन उनके साथ होना चाहिए।"
दूसरी ओर, पूर्व विधायक और वरिष्ठ भाजपा नेता लखविंदर राणा के समर्थन में आयोजित स्वागत कार्यक्रम में हजारों कार्यकर्ताओं की भीड़ उमड़ी। अंतिम समय में जयराम ठाकुर का इस कार्यक्रम में न पहुंचना और केएल ठाकुर के पक्ष में बयान देना राणा गुट को रास नहीं आया। लखविंदर राणा ने इसे पुराने कार्यकर्ताओं और संगठन की अनदेखी करार देते हुए सीधा मोर्चा खोल दिया।
"हम शांत बैठने वाले नहीं हैं। हम भारतीय जनता पार्टी के सच्चे सिपाही हैं। हमारे पुराने मंडल, अध्यक्ष और समर्पित कार्यकर्ता आज भी पार्टी के साथ मजबूती से खड़े हैं, लेकिन लगातार उनकी अनदेखी की जा रही है। मैं इस पूरे मामले और कार्यकर्ताओं के सम्मान की बात को सीधे पार्टी हाईकमान के प्लेटफॉर्म पर उठाऊंगा। जनता और कार्यकर्ताओं के इस भारी समर्थन को मैं कभी नहीं भूलूंगा।"
नालागढ़ में फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि दोनों नेताओं के कार्यक्रमों के पीछे आखिर राजनीतिक संदेश क्या है? एक तरफ केएल ठाकुर अपने समर्थकों और जनप्रतिनिधियों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करते नजर आ रहे हैं, तो दूसरी तरफ लखविंदर राणा पुराने संगठन और कार्यकर्ताओं के सहारे अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने में जुटे हुए हैं। यानी विधानसभा चुनाव से पहले ही नालागढ़ में भाजपा के भीतर ‘टिकट की जंग’ शुरू होती दिखाई दे रही है।
नालागढ़ की राजनीति का समीकरण भी भाजपा के लिए आसान नहीं है। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने लखविंदर राणा को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। वहीं, केएल ठाकुर ने निर्दलीय चुनाव लड़कर जीत दर्ज की थी। इसके बाद मार्च 2024 में केएल ठाकुर भाजपा में शामिल हुए और उपचुनाव में भाजपा के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरे, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
अब दोनों नेताओं का अपना राजनीतिक आधार और समर्थकों का अलग-अलग नेटवर्क है। यही वजह है कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले टिकट को लेकर दोनों नेताओं के बीच दावेदारी ने नालागढ़ की सियासत को बेहद दिलचस्प बना दिया है।
नालागढ़ में भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ उम्मीदवार चुनने की नहीं होगी, बल्कि दो गुटों में बंटी पार्टी को एकजुट रखने की भी होगी। अगर भाजपा हाईकमान एक नेता के पक्ष में फैसला करता है तो दूसरे खेमे की नाराजगी को संभालना भी पार्टी के लिए चुनौती बन सकता है। ऐसे में टिकट वितरण से पहले नालागढ़ में संगठनात्मक एकजुटता बनाए रखना भाजपा नेतृत्व की सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी।
राजनीतिक चर्चाओं के बीच अब सवाल यह है कि क्या भाजपा एक बार फिर लखविंदर राणा पर भरोसा जताएगी, केएल ठाकुर को मौका देगी या फिर दोनों गुटों के बीच बढ़ती खींचतान को खत्म करने के लिए किसी नए चेहरे पर दांव खेलेगी? फिलहाल इतना तय है कि हिमाचल विधानसभा चुनाव में अभी एक साल बाकी है, लेकिन नालागढ़ में चुनावी मुकाबला शुरू होने से पहले ही भाजपा के भीतर सियासी संग्राम तेज हो चुका है।