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November 1, 2026

हिमाचल में हिमंत सरमा ने राहुल गांधी को कहा 'पागल', बोले- वोट चोरी छोड़ो, हमसे दिल चोरी करना सीखो

लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ में भाजपा बोली-सिख विरोधी दंगों पर माफी मांगे राहुल गांधी

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himachal BJP

शिमला: हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में रविवार को भाजपा ने 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' पदयात्रा के जरिए कांग्रेस के खिलाफ सियासी मोर्चा खोल दिया। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की अगुवाई में निकली इस महापदयात्रा में भाजपा के कई दिग्गज नेता और बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता शामिल हुए। पुराने बस स्टैंड स्थित गुरुद्वारा साहिब से शुरू हुई पदयात्रा विक्ट्री टनल और विधानसभा मार्ग से होते हुए चौड़ा मैदान पहुंची, जहां विशाल जनसभा का आयोजन किया गया।

 

इस दौरान हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस हाईकमान, राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और हिमाचल की सुक्खू सरकार पर एक के बाद एक तीखे राजनीतिक हमले किए। राहुल गांधी पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि वोट चोरी छोड़ो, भाजपा से ट्यूशन लेकर दिल चोरी करना सीखो। वहीं, हिमाचल में 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की सरकार बनने का दावा करते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू को भी निशाने पर लिया।

राहुल गांधी पर हिमंत का तीखा हमला

जनसभा में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के निशाने पर सबसे ज्यादा कांग्रेस नेता राहुल गांधी रहे। उन्होंने राहुल गांधी की ओर से उठाए जा रहे वोट चोरी और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर पलटवार किया। सरमा ने कहा कि भाजपा चुनाव में विकास के मुद्दे पर जनता का समर्थन हासिल करती है। राम मंदिर निर्माण और जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने जैसे फैसलों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा ने लोगों का दिल जीता है।

 

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उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि राहुल गांधी वोट चोरी छोड़ें और भाजपा से ट्यूशन लेकर दिल चोरी करना सीखें। सरमा ने कांग्रेस के चुनावी इतिहास पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि कांग्रेस आज चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाकर अपनी राजनीतिक विफलताओं से ध्यान हटाने की कोशिश कर रही है।

 

राहुल गांधी को पागल कहने पर सियासी बयानबाजी तेज

अपने संबोधन में हिमंत बिस्वा सरमा ने राहुल गांधी पर बेहद तीखी व्यक्तिगत टिप्पणी भी की। उन्होंने राहुल गांधी को पागल कहते हुए कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति पर निशाना साधा। सरमा के इस बयान ने जनसभा के दौरान राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया। उन्होंने कांग्रेस को चुनौती देते हुए कहा कि यदि पार्टी को चुनाव आयोग और मतदाता सूची की प्रक्रिया पर भरोसा नहीं है तो उसे अपनी बात स्पष्ट रूप से सामने रखनी चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि यदि एसआईआर में गड़बड़ी है तो कांग्रेस रामलीला मैदान से ऐलान करे कि वह उत्तर प्रदेश का अगला विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेगी।

 

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सीएम सुक्खू ने जिस ईवीएम से सत्ता पाई उसी का कर रहे विरोध

हिमंत बिस्वा सरमा ने हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2027 में प्रदेश में भाजपा की सरकार बनेगी और कांग्रेस की विदाई तय है। उन्होंने कहा कि शिमला में उमड़ी भीड़ प्रदेश में राजनीतिक बदलाव का संकेत है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू पर निशाना साधते हुए सरमा ने ईवीएम का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि जिस चुनाव प्रणाली के माध्यम से कांग्रेस हिमाचल में सत्ता में आई, उसी व्यवस्था पर अब सवाल खड़े किए जा रहे हैं। उन्होंने सुक्खू से सवाल किया कि यदि कांग्रेस को ईवीएम पर भरोसा नहीं है तो उसी प्रक्रिया से मिले जनादेश के आधार पर सरकार क्यों चला रही है।

 

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सुक्खू सरकार को गारंटी पर घेरा

असम के मुख्यमंत्री ने हिमाचल में रोजगार और महिलाओं को आर्थिक सहायता देने के मुद्दे पर भी कांग्रेस सरकार को घेरा। उन्होंने असम में सरकारी नौकरियों को लेकर अपनी सरकार के प्रदर्शन का हवाला देते हुए दावा किया कि वहां एक लाख नौकरियां देने के वादे के मुकाबले 1.07 लाख युवाओं को रोजगार दिया जा चुका है। इसके विपरीत उन्होंने हिमाचल कांग्रेस की पांच लाख रोजगार देने की गारंटी पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि प्रदेश के कितने बेरोजगार युवाओं को अब तक रोजगार मिला है और सरकार अपने चुनावी वादों का हिसाब कब देगी।

 

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महिलाओं को 1500 रुपये प्रतिमाह देने की गारंटी पर भी उन्होंने सुक्खू सरकार को घेरा। सरमा ने असम में महिलाओं को दी जा रही 1250 रुपये की मासिक आर्थिक सहायता का उल्लेख करते हुए हिमाचल में कांग्रेस की चुनावी गारंटी के क्रियान्वयन पर सवाल उठाए।

1984 के सिख विरोधी दंगों पर राहुल गांधी से माफी की मांग

अपने भाषण में हिमंत बिस्वा सरमा ने 1984 के सिख विरोधी दंगों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने राहुल गांधी से इस घटना को लेकर सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की। सरमा ने कहा कि कांग्रेस को लोकतंत्र और संविधान की बात करने के साथ अपने राजनीतिक इतिहास से जुड़े सवालों का भी जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि सिख समुदाय के लोगों के साथ हुई हिंसा को लेकर कांग्रेस नेतृत्व को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। इस मुद्दे को उठाकर उन्होंने कांग्रेस को राजनीतिक रूप से घेरने की कोशिश की।

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एसआईआर के समर्थन में भाजपा

पूरी पदयात्रा का प्रमुख मुद्दा मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर रहा। भाजपा नेताओं ने इस प्रक्रिया का समर्थन करते हुए कहा कि लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए मतदाता सूचियों का सही और पारदर्शी होना जरूरी है। हिमंत बिस्वा सरमा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस एसआईआर को लेकर लोगों के बीच भ्रम पैदा कर रही है। उन्होंने कहा कि पात्र नागरिकों का नाम मतदाता सूची में रहना चाहिए, जबकि अपात्र नामों की पहचान और उन्हें हटाने की प्रक्रिया का विरोध नहीं होना चाहिए। भाजपा का कहना है कि मतदाता सूची की शुद्धता लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए जरूरी है, जबकि कांग्रेस इस प्रक्रिया को लेकर लगातार सवाल उठा रही है। इसी मुद्दे पर दोनों दलों के बीच राजनीतिक टकराव तेज होता दिखाई दे रहा है।

जयराम ठाकुर ने राहुल गांधी और खड़गे पर साधा निशाना

जनसभा में नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने भी कांग्रेस नेतृत्व पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सत्ता से बाहर रहने की कुंठा से जूझ रही है और चुनावी हार के बाद लगातार लोकतांत्रिक संस्थाओं पर सवाल उठा रही है। जयराम ठाकुर ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के बाद 85 वर्ष के खड़गे भी पागलपन जैसी बातें कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि हिमाचल में कांग्रेस को ईवीएम की प्रक्रिया पर भरोसा नहीं है तो मुख्यमंत्री सुक्खू उसी चुनाव प्रणाली से मिले जनादेश के आधार पर सत्ता में क्यों बने हुए हैं।

 

 

जयराम ठाकुर ने पंचायत और नगर निगम चुनावों का उल्लेख करते हुए भी कांग्रेस को घेरा। उन्होंने दावा किया कि बैलेट से हुए पंचायत चुनावों में कांग्रेस 12 में से 11 जिलों में हारी, जबकि ईवीएम से हुए नगर निगम चुनावों में चार में से तीन निगमों में उसे हार का सामना करना पड़ा।

एसआईआर से शुरू हुई सियासी लड़ाई अब 2027 के चुनाव तक पहुंची

शिमला में भाजपा की इस महापदयात्रा ने हिमाचल प्रदेश की राजनीति में चुनावी माहौल को और गरमा दिया है। एक तरफ भाजपा एसआईआर के समर्थन, मतदाता सूची की शुद्धता और कांग्रेस की चुनावी गारंटियों को मुद्दा बना रही है, वहीं कांग्रेस पहले से ही चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाती रही है। हिमंत बिस्वा सरमा के तीखे बयानों और जयराम ठाकुर के हमलों से साफ है कि भाजपा अब प्रदेश में कांग्रेस सरकार को रोजगार, महिला सम्मान और चुनावी वादों के मुद्दे पर घेरने की रणनीति के साथ आगे बढ़ रही है। 2027 के विधानसभा चुनाव में अभी समय है, लेकिन शिमला की इस पदयात्रा ने दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच सियासी संघर्ष को नई धार जरूर दे दी है।

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