#राजनीति
November 2, 2026
सीएम सुक्खू ने हिमंत बिस्वा को दिया जवाब: बोले- कांग्रेस करेगी रिपीट, शपथ समारोह में आपको भी देंगे न्योता
सीएम सुक्खू बोले- पांच गुटों में बंटी है भाजपा, एकजुट करने को बाहर से बुलाने पड़ रहे नेता
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में बीते रोज भाजपा की ‘लोकतंत्र बचाओ रैली’ के दौरान असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा द्वारा सुक्खू सरकार पर किए गए राजनीतिक हमलों का मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने करारा जवाब दिया है। दिल्ली से लौटे मुख्यमंत्री सुक्खू ने भाजपा पर पलटवार करते हुए कहा कि हिमाचल में भारतीय जनता पार्टी खुद पांच गुटों में बंटी हुई है। पार्टी की अंदरूनी खींचतान इतनी बढ़ चुकी है कि इन गुटों को एकजुट करने के लिए भाजपा को असम के मुख्यमंत्री को हिमाचल बुलाना पड़ा।
सीएम सुक्खू यहीं नहीं रुके। उन्होंने असम के मुख्यमंत्री के उस बयान पर भी तंज कसा, जिसमें उन्होंने अगले साल हिमाचल में भाजपा के शपथ ग्रहण समारोह में आने की बात कही थी। मुख्यमंत्री ने जवाब देते हुए कहा कि अगले साल हिमाचल में कांग्रेस सरकार का ही शपथ ग्रहण होगा और उस समारोह में असम के मुख्यमंत्री को भी बाकायदा निमंत्रण भेजा जाएगा।
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने भाजपा की शिमला रैली को लेकर निशाना साधते हुए कहा कि हिमाचल भाजपा की आंतरिक स्थिति किसी से छिपी नहीं है। उन्होंने दावा किया कि पार्टी पांच अलग-अलग गुटों में बंटी हुई है और नेतृत्व के सामने इन गुटों को एक मंच पर लाना बड़ी चुनौती बना हुआ है। सीएम ने तंज कसते हुए कहा कि यही वजह है कि भाजपा को अपनी रैली के लिए असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को हिमाचल लाना पड़ा। उनके अनुसार भाजपा की अंदरूनी राजनीति ही पार्टी की कमजोर स्थिति को उजागर कर रही है।
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मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि हिमाचल में अगली बार भी कांग्रेस की सरकार बनेगी और कांग्रेस सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को आमंत्रित किया जाएगा। सीएम सुक्खू ने कहा कि असम के मुख्यमंत्री को भी निमंत्रण जरूर भेजा जाएगा। सुक्खू के इस बयान को भाजपा के चुनावी दावे के जवाब में कांग्रेस की ओर से बड़ा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने भाजपा के 16 विधायकों को लेकर भी बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि भाजपा के ये विधायक वर्तमान परिस्थितियों में दोबारा चुनाव जीतने की स्थिति में नहीं हैं। सीएम सुक्खू ने अपने दावे को लेकर पूरा भरोसा जताते हुए कहा कि चुनाव परिणाम आने के बाद स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। उन्होंने कहा कि उनके इस बयान को अभी नोट कर लिया जाए और चुनाव के नतीजे आने के बाद इस मुद्दे पर फिर सवाल किया जाए। सुक्खू ने यह भी दावा किया कि आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा की सीटों की संख्या पिछली बार की तुलना में भी कम हो सकती है।
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भाजपा की ओर से कांग्रेस सरकार की गारंटियों और प्रदेश सरकार की नीतियों पर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने इन आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा को पहले अपनी आंतरिक स्थिति पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस पार्टी को अपने ही पांच गुटों को एकजुट करने के लिए बाहरी राज्यों के नेताओं की मदद लेनी पड़ रही है, वह प्रदेश सरकार पर सवाल उठाने से पहले अपनी राजनीतिक स्थिति का आकलन करे।
दिल्ली के रामलीला मैदान में कांग्रेस और विपक्षी दलों की रैली का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि लोकतंत्र में जनता की आवाज उठाना विपक्ष की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि रैलियां और आंदोलन लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा हैं और इनके माध्यम से जनता से जुड़े मुद्दों को सामने रखा जाता है। मुख्यमंत्री के अनुसार दिल्ली में आयोजित रैली में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी ने यह दिखाया कि लोकतंत्र और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को जनता गंभीरता से ले रही है।
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मुख्यमंत्री सुक्खू ने मतदाता सूची से जुड़े विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के मुद्दे पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके माध्यम से कथित धांधली की जा रही है और कांग्रेस नेता राहुल गांधी इस मुद्दे को लेकर आवाज उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में मतदाताओं के अधिकारों और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवाल उठाना जरूरी है। मुख्यमंत्री के अनुसार दिल्ली में हुई रैली में हिमाचल प्रदेश से भी बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।
ईवीएम को लेकर उठ रहे राजनीतिक सवालों पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मुद्दे को तथ्यों और समयक्रम के आधार पर समझना जरूरी है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव वर्ष 2022 में हुए थे, जबकि ईवीएम को लेकर सवाल बाद के समय में प्रमुखता से उठे। ऐसे में राजनीतिक आरोपों को तथ्यों के आधार पर देखा जाना चाहिए।
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राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार की आर्थिक नीतियों का भी बचाव किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ‘व्यवस्था परिवर्तन’ के माध्यम से हिमाचल प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रही है। सीएम ने कहा कि लंबे समय से प्रदेश को मिलने वाली राजस्व घाटा अनुदान यानी RDG में कमी और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद सरकार ने प्रदेश की वित्तीय व्यवस्था को संभालने का प्रयास किया है। उनके अनुसार करीब 8 से 10 हजार करोड़ रुपये की कमी के बावजूद सरकार आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रही है और इसे प्रदेश सरकार की बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने प्रदेश की वित्तीय स्थिति को एक परिवार के बजट से जोड़ते हुए कहा कि यदि किसी परिवार की मासिक आय में अचानक बड़ी कटौती हो जाए, तो पूरे खर्च का संतुलन बिगड़ जाता है। उन्होंने कहा कि सरकार भी एक बड़े परिवार की तरह होती है और उपलब्ध संसाधनों के बीच प्रदेश की व्यवस्था को चलाना पड़ता है। ऐसे में वित्तीय चुनौतियों के बावजूद सरकार ने प्रदेश के विकास और आर्थिक व्यवस्था को संभालने की कोशिश की है।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने हिमाचल को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रदेश की प्राकृतिक और आर्थिक संपदा के बेहतर उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार हिमाचल के संसाधनों को सुरक्षित रखने और उनका उपयोग प्रदेश के हित में करने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि हिमाचल की संपदा को न तो सरकार लूट रही है और न ही किसी को इसे लूटने दिया जाएगा। उनका कहना था कि प्रदेश के संसाधनों का इस्तेमाल हिमाचल को आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने के लिए किया जाएगा।