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October 27, 2026

सियासी तल्खी के बीच विक्रमादित्य सिंह का बड़ा संदेश, 'चुनाव आते-जाते रहेंगे, भाईचारा बना रहना चाहिए'

लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने दिया एकजुटता का संदेश

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Vikramaditya Singh News

शिमला। हिमाचल प्रदेश में इन दिनों सियासी हलचल तेज है। कभी भाजपा नेताओं के बयानों से राजनीतिक माहौल गरमाता है, तो कभी कांग्रेस की ओर से पलटवार देखने को मिलता है। आरोप-प्रत्यारोप के इस दौर के बीच प्रदेश सरकार में लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने चौपाल से आपसी सौहार्द और राजनीतिक मर्यादा का संदेश दिया है। उन्होंने साफ कहा कि चुनाव आते-जाते रहते हैं, लेकिन लोगों के बीच प्रेम, भाईचारा और आपसी रिश्ते हमेशा कायम रहने चाहिए।

 

विक्रमादित्य सिंह का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब प्रदेश की राजनीति में अलग-अलग मुद्दों को लेकर नेताओं के बीच बयानबाजी जारी है। चौपाल में अपने संबोधन के दौरान उन्होंने राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और सामाजिक रिश्तों के बीच संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया। उनका संदेश था कि विचारधाराएं और राजनीतिक पसंद अलग हो सकती हैं, लेकिन इन मतभेदों के कारण समाज में दूरियां नहीं बढ़नी चाहिए।

सियासी खींचतान के बीच भाईचारे पर जोर

लोक निर्माण मंत्री ने कहा कि राजनीति में प्रतिस्पर्धा अपनी जगह है, लेकिन उसे इस हद तक नहीं ले जाना चाहिए कि भविष्य में आपसी संबंधों को सामान्य बनाना मुश्किल हो जाए। उन्होंने कहा कि राजनीति में लकीर उतनी ही खींचनी चाहिए, जिसे समय आने पर मिटाया जा सके। उनके इस बयान को राजनीतिक विरोध के बावजूद संवाद और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की अपील के तौर पर देखा जा सकता है। उन्होंने लोगों को याद दिलाया कि लोकतंत्र में चुनाव एक प्रक्रिया है, जबकि आपसी रिश्ते और सामाजिक एकजुटता लंबे समय तक समाज की ताकत बने रहते हैं।

 

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विकास के लिए सबका सहयोग जरूरी

विक्रमादित्य सिंह ने विकास के मुद्दे पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्र की तरक्की केवल एक व्यक्ति या किसी एक वर्ग के प्रयासों से संभव नहीं होती। इसके लिए समाज के हर वर्ग का सहयोग और सामूहिक भागीदारी जरूरी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब लोग आपसी मतभेदों से ऊपर उठकर साझा लक्ष्यों के लिए काम करते हैं, तभी विकास की संभावनाएं मजबूत होती हैं।

 

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प्रदेश और चौपाल विधानसभा क्षेत्र को आगे ले जाने के लिए सभी को मिलकर प्रयास करने होंगे। मंत्री के मुताबिक, राजनीतिक मतभेदों में उलझे रहने के बजाय जनहित और विकास को प्राथमिकता देना अधिक महत्वपूर्ण है। क्षेत्र की समस्याओं का समाधान तभी बेहतर ढंग से हो सकता है, जब लोग और जनप्रतिनिधि मिलकर काम करने की भावना अपनाएं।

चौपाल की राजनीति पर भी दिया संदेश

अपने संबोधन में विक्रमादित्य सिंह ने चौपाल की राजनीतिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि कुछ समय पहले यहां 'मैं-मैं' की राजनीति का माहौल था। उन्होंने इस तरह की सोच से ऊपर उठकर सामूहिक हितों को प्राथमिकता देने की जरूरत बताई। उनका कहना था कि व्यक्तिगत स्वार्थ के बजाय पूरे क्षेत्र के हितों को ध्यान में रखकर फैसले होने चाहिए। विकास की राह में एकजुटता अहम भूमिका निभाती है, जबकि आपसी खींचतान और टकराव से सामूहिक प्रयास प्रभावित हो सकते हैं।

 

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भाजपा-कांग्रेस की बयानबाजी के बीच क्या है संदेश?

हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक मुद्दों पर बयानबाजी लगातार सुर्खियों में रहती है। ऐसे माहौल में विक्रमादित्य सिंह का चौपाल से दिया गया संदेश राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के साथ सामाजिक संबंधों को भी महत्व देने की बात करता है। हालांकि, उनके बयान को किसी खास राजनीतिक दल के खिलाफ सीधा हमला नहीं कहा जा सकता। उनके संबोधन का मुख्य जोर इस बात पर रहा कि चुनावी मुकाबला लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन उसकी वजह से समाज में कटुता नहीं बढ़नी चाहिए।

 

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'मतभेद रहें, लेकिन मनभेद नहीं'

विक्रमादित्य सिंह ने लोगों से अपील की कि वे अपनी राजनीतिक पसंद और विचारधारा के आधार पर एक-दूसरे से रिश्ते खराब न करें। उन्होंने प्रदेश और विधानसभा क्षेत्र के विकास के लिए सभी से सकारात्मक भूमिका निभाने का आह्वान किया। उनके संदेश का सार यही रहा कि राजनीति में विरोध हो सकता है, विचार अलग हो सकते हैं और चुनावी मुकाबला भी जारी रह सकता है, लेकिन आपसी प्रेम और भाईचारे की जगह कटुता को नहीं लेनी चाहिए। चौपाल से दिया गया यह संदेश सियासी प्रतिस्पर्धा के बीच संवाद, सहयोग और विकास को प्राथमिकता देने की अपील के रूप में सामने आया है।

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